#विविध

February 12, 2026

हिमाचल में आ सकती है भयंकर बाढ़ : फट सकती हैं चार झीलें, खतरे में कई इलाके

पिघलते ग्लेशियर बने खतरा, हरकत में आई मोदी सरकार

शेयर करें:

four himalayan lakes outburst early warning system alert melting glaciers himachal

शिमला। हिमाचल प्रदेश के ऊंचे हिमालयी इलाकों में जलवायु परिवर्तन का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। सदियों से जमे ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं- जो कि अब नई आपदा की आशंका पैदा कर रही है।

पिघलते ग्लेशियर बने खतरा

ग्लेशियरों के पिघलने से कुल्लू, लाहौल-स्पीति और किन्नौर जिलों में बनी चार बड़ी झीलें अब संभावित ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड (ग्लॉफ) का खतरा बन चुकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इन झीलों के किनारे कमजोर पड़े या अचानक ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा टूटकर झील में गिरा- तो कुछ ही मिनटों में विनाशकारी बाढ़ आ सकती है।

यह भी पढ़ें: हिमाचल में किसने रची ये साजिश? पानी के टैंक में मिलाया जह*र, 200 लोगों पर मंडराया काल

तबाही आने से पहले बजेगा अलार्म

प्रदेश में पहली बार ऐसी झीलों पर अत्याधुनिक सैटेलाइट आधारित अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) ने चार उच्च जोखिम वाली झीलों को चिह्नित कर वहां निगरानी तंत्र स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

बच सकती है कई लोगों की जान

यह कदम इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि पहाड़ी क्षेत्रों में आपदा का समय बेहद सीमित होता है-चेतावनी के कुछ ही मिनट जान बचा सकते हैं। सरकार की ये पहल काफी अहम मानी जा रही है।

यह भी पढ़ें: हिमाचल के दो युवकों से मिली 15 किलो चरस : डील करने जा रहे थे मुंबई, पुलिस ने रास्ते में ही दबोचा

चार झीलों पर मंडराया खतरा

आपको बता दें कि ग्लेशियर के पिघलने से हिमाचल की चार झीलों पर बहुत खतरा मंडरा रहा है। यह झीलें इस सूची में शामिल हैं-

  • वासुकी झील (कुल्लू)

कुल्लू जिला की पार्वती घाटी में स्थित वासुकी झील। वासुकी झील खीरगंगा क्षेत्र के पास समुद्र तल से करीब 14,770 फीट की ऊंचाई पर है। लगभग 12.49 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली यह झील ट्रेकिंग मार्ग के आसपास होने के कारण पर्यटन गतिविधियों के लिहाज से भी संवेदनशील है।

 

Bathymetry survey of Vasuki and Sangla Glacial lakes under early warning  system

  • घेपल झील (लाहौल-स्पीति)

लाहौल-स्पीति की गिपांग (घेपल) झील- जो कि 13 हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर स्थित है। ये झील 92.09 हेक्टेयर क्षेत्रफल के साथ तेजी से विस्तार कर रही है। इसका बढ़ता दायरा वैज्ञानिकों के लिए चिंता का विषय है, क्योंकि झील का फैलाव सीधे तौर पर पिघलते ग्लेशियरों की गति को दर्शाता है।

 

हिमाचल में तबाही मचा सकती है घेपन झील, 173 फीसदा बढ़ गया दायरा...टूटी तो  पाकिस्तान तक आएगी आफत

  • बास्पा झील (किन्नौर)

किन्नौर की सांगला घाटी में 15,465 फीट की ऊंचाई पर बनी बास्पा झील (18.88 हेक्टेयर)।

Baspa River Valley Near Chitkul Village of Himachal Pradesh India. Stock  Image - Image of chitkul, kinnaur: 208983065

  • कलका झील (किन्नौर)

सतलुज बेसिन के काशंग गाड़ क्षेत्र में स्थित कलका झील (27.89 हेक्टेयर) भी संभावित जोखिम क्षेत्र में हैं।

किन्नौर के कल्पा में करने लायक चीज़ें - देखने लायक स्थान, घूमने का सबसे  अच्छा समय, मौसम और भी बहुत कुछ » प्लानमैन ग्रुप द्वारा HPTT

यह भी पढ़ें: पंजाब से हिमाचल सप्लाई हो रहा था 'माल', पुलिस ने धरे पांच तस्कर- ढेर सारा चिट्टा भी किया बरामद

झीलों के फटने से होगा नुकसान

इन झीलों के फटने की स्थिति में पानी चंद्रा, पार्वती और सतलुज नदियों में तेजी से उतरेगा, जिससे निचले इलाकों- गांवों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान हो सकता है।

कैसे रखी जाएगी नजर?

प्रस्तावित अर्ली वार्निंग सिस्टम पूरी तरह सैटेलाइट आधारित होगा। झील के किनारे सेंसर लगाए जाएंगे जो जलस्तर, तापमान, दबाव और भौगोलिक हलचल पर लगातार नजर रखेंगे। जैसे ही जलस्तर असामान्य रूप से बढ़ेगा या ग्लेशियर के टूटने जैसी स्थिति बनेगी, सिस्टम तुरंत अलर्ट जारी करेगा। यह सूचना सीधे मौसम विभाग, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और संबंधित जिला प्रशासन तक पहुंचेगी।

यह भी पढ़ें: हिमाचल : कैंसर मरीज को मिला नया जीवन, डॉक्टरों ने बाहर निकाला महिला का पेट- 6 घंटे चली सर्जरी

झीलों के पास लगेंगे खास सिस्टम

सर्दियों के मौसम में ऊंचाई वाले क्षेत्रों तक पहुंचना मुश्किल होता है, इसलिए बर्फ कम होते ही उपकरणों की स्थापना का काम शुरू किया जाएगा। लाहौल क्षेत्र में लगाए जाने वाले सिस्टम का उपकरण कुल्लू तक पहुंच चुका है, जिससे संकेत मिलता है कि प्रक्रिया अब अंतिम चरण में है।

क्यों जरूरी हैं अर्ली वॉर्निंग सिस्टम?

कुल्लू के अतिरिक्त उपायुक्त अश्वनी कुमार ने पुष्टि की है कि पार्वती घाटी की वासुकी झील में अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित किया जाएगा। प्रशासन का मानना है कि समय रहते चेतावनी मिलने से राहत एवं बचाव दलों को सक्रिय किया जा सकेगा और संवेदनशील क्षेत्रों को खाली कराने का अवसर मिलेगा।

यह भी पढ़ें: हिमाचल में घने कोहरे का येलो अलर्ट : कब होगी बारिश-बर्फबारी? यहां जानें मौसम अपडेट

क्यों पिघल रहे ग्लेशियर?

विशेषज्ञों के अनुसार, बीते कुछ वर्षों में हिमालयी क्षेत्र का औसत तापमान लगातार बढ़ा है। इससे ग्लेशियरों के पिघलने की दर तेज हुई है और झीलों का आकार बढ़ रहा है। कई स्थानों पर झीलों के किनारे सिर्फ मलबे और बर्फ के अस्थायी बांध से बने हैं, जो अधिक दबाव पड़ने पर टूट सकते हैं।

 

melting glaciers in the himalayas raise the pulse

बाढ़-भूस्खलन का खतरा 

अगर झील फटती है तो पानी की तेज धारा अपने साथ चट्टानें, मलबा और पेड़ बहा ले जाती है, जिससे नीचे के इलाकों में बाढ़ के साथ भूस्खलन का खतरा भी बढ़ जाता है। पहाड़ी सड़कों, पुलों और पनबिजली परियोजनाओं के लिए यह गंभीर चुनौती है।

यह भी पढ़ें: हिमाचल : गंभीर बीमारी से जूझ रही थी महिला, कुछ घंटे चली बड़ी सर्जरी- डॉक्टरों ने पेट से निकाली एक KG...

195 झीलों को खतरा

NDMA ने हिमालयी क्षेत्रों में ग्लॉफ जोखिम न्यूनीकरण कार्यक्रम के तहत 195 उच्च जोखिम वाली हिमनद झीलों को चिन्हित किया है। पहले यह संख्या 56 थी, जिसे हालिया आकलन के बाद बढ़ाया गया।

 

देशभर में करीब 7,500 से अधिक हिमनद झीलें हैं, जिनमें से 195 को संभावित खतरे की श्रेणी में रखा गया है। ये झीलें मुख्य रूप से हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड में स्थित हैं।

यह भी पढ़ें : हिमाचल सरकार की कैबिनेट बैठक आज : RDG, बजट समते कई अहम मुद्दों पर होगी चर्चा, जानें विस्तार से

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल तकनीकी निगरानी पर्याप्त नहीं होगी। स्थानीय समुदायों को भी जागरूक करना, आपदा प्रबंधन अभ्यास कराना और संवेदनशील इलाकों में निर्माण गतिविधियों पर नियंत्रण आवश्यक है।

रोकी जा सकती है तबाही

हिमालय की गोद में बसे इन जिलों के लिए यह चेतावनी भी है और अवसर भी समय रहते सतर्कता बरती गई तो संभावित तबाही को रोका जा सकता है। वरना पिघलते ग्लेशियर आने वाले वर्षों में पहाड़ों की शांत वादियों को अचानक आई विनाशकारी बाढ़ में बदल सकते हैं।

नोट : ऐसी ही तेज़, सटीक और ज़मीनी खबरों से जुड़े रहने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर हमारे फेसबुक पेज को फॉलो करें

ट्रेंडिंग न्यूज़
LAUGH CLUB
संबंधित आलेख