#विविध
August 28, 2025
हिमाचल में लोगों से देवी-देवता नाराज, नहीं थमेगी प्रलय; गूरों ने दी चेतावनी
ना ही धन बचेगा, ना ही अन्न- नहीं रूकेगाी पाएगी प्रलय
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मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में इस समय बरसात और आपदाओं से तबाही का जो दौर चल रहा है, उसे लेकर अब देव समाज की भविष्यवाणी ने लोगों की चिंता और गहरा दी है। बीते दिनों मंडी शहर के स्कूल बाजार स्थित माता काली के दरबार में आधी रात को हुए अनुष्ठान के दौरान देव गुरों ने अग्नि परीक्षा देकर सार्वजनिक भविष्यवाणी की कि प्रदेश अभी त्रासदी काल से बाहर नहीं आएगा।
सैकड़ों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में गूरों ने कहा कि देवी-देवता लोगों से नाराज (रूष्ठ) हैं। इसी के कारण मंडी समेत प्रदेशभर में प्राकृतिक आपदाएं लगातार कहर बरसा रही हैं। इतना ही नहीं उन्होंने ये भी कहा कि आने वाले समय में लोगों के पास ना धन बचेगा और न ही अन्न, जबकि ब्यास नदी का उफान और पहाड़ों का दरकना थमने वाला नहीं है।
गूरों ने अपनी वाणी में स्पष्ट कहा कि मनुष्य ने अपने स्वार्थ और भौतिक सुख के लालच में मंदिरों और देव स्थलों को अपवित्र कर दिया। देवताओं से जुड़े जंगलों की अंधाधुंध कटाई की गई।
मंदिरों में आस्था का स्थान अब मात्र सैर-सपाटे और दिखावे ने ले लिया है। लोग भक्ति की बजाय पर्यटन मानसिकता के साथ मंदिरों में आ रहे हैं। देव गूरों का कहना था कि इन सब कारणों से देव समाज नाराज है और यही प्रकोप प्राकृतिक आपदा के रूप में सामने आ रहा है।
देव माहूनाग टारना के गुर रमेश कुमार ने बताया कि माता चामुंडा के दरबार में हुए विशेष होम के दौरान भी यही संदेश आया कि आपदाओं से राहत अभी दूर है। वहीं, देव पराशर मंदिर कमेटी के प्रधान बीरबल शर्मा ने कहा कि लोगों में आस्था भाव खत्म होता जा रहा है। लोग आस्था के नाम पर सिर्फ दर्शनीय स्थल की तरह मंदिर आते हैं।
उन्होंने कहा कि श्रद्धा की जगह दिखावे और लापरवाही ने देवताओं को नाराज किया है, जिसके चलते पराशर क्षेत्र में पहाड़ियां लगातार दरक रही हैं। गुरों का कहना है कि यह तय करना कि मंडी और प्रदेश आपदा से कब उबर पाएगा, अब केवल देव दरबार में ही संभव है।
विशेषकर सत देव श्री बालाकामेश्वर के दरबार में होने वाले निर्णय से ही यह संकेत मिलेगा कि देवता मानव समाज को राहत देंगे या त्रासदी काल और लंबा खिंचेगा। देव वाणी को सुनकर कई लोग सहमे हुए हैं।
रात को हुए इस अनुष्ठान में मौजूद श्रद्धालुओं का कहना है कि देवताओं की भविष्यवाणी को हल्के में नहीं लिया जा सकता। वहीं कुछ लोग इसे अंधविश्वास करार दे रहे हैं। लेकिन सच यह है कि पिछले कई वर्षों से मंडी और आसपास के क्षेत्रों में लगातार बाढ़, भूस्खलन और बादल फटने जैसी घटनाओं ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है।
हाल ही में कुल्लू की हलाण पंचायत में ग्रामीणों ने अपने आराध्य देवता नाग धुंबल ने साफ कहा कि इस तबाही के लिए खुद इंसान जिम्मेदार हैं। देवता का सख्त संदेश कि "देव आदेशों का पालन नहीं"। देव आदेशों का पालन ना होने से देवता काफी नाराज हैं।
ग्रामीणों के आग्रह पर नाग धुंबल देवता ने कहा कि देव आदेशों की लगातार अवहेलना हो रही है। देव-नीति में राजनीति घुस आई है। जंगलों का विनाश, पर्वतों का दोहन और धार्मिक स्थलों की शुचिता भंग होने से प्रकृति नाराज है।
देवता ने स्पष्ट कहा कि विकास के नाम पर पेड़ों की अंधाधुंध कटाई और पहाड़ों की तोड़फोड़ से संतुलन बिगड़ा है। यही कारण है कि आज बारिश और आपदा का प्रकोप झेलना पड़ रहा है।
नाग धुंबल देवता ने ग्रामीणों को चेताया कि हिमाचल के ‘18 करड़ू’ (18 करोड़) देवी-देवता नाराज हैं। देवता ने कहा कि अगर देवी-देवताओं ने नजर फेर ली तो स्थिति और भी विकराल हो सकती है। देवता का कहना था कि वे इस समय 18 करड़ू के आदेश पर ही स्थिति को संभाल रहे हैं।