#विविध
August 28, 2025
हिमाचल : पौंग डैम का बढ़ा जलस्तर, खतरे में 60 गांव- आज 20 हजार परिवारों को छोड़ने होंगे घर
निचले इलाकों में प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में लगातार बारिश से हालात गंभीर होते जा रहे हैं। मंडी, कुल्लू और मनाली में भारी बारिश के बाद अब इसका असर कांगड़ा जिले पर भी पड़ने लगा है। पौंग डैम का जलस्तर 1396 फीट पार कर गया है, जिसके चलते BBMB ने गुरुवार दोपहर 2 बजे डैम से 1.10 लाख क्यूसेक पानी छोड़ने की घोषणा की है।
इससे पहले ही हिमाचल और पंजाब के निचले इलाकों में प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है। प्रशासन के मुताबिक, पानी छोड़े जाने से कांगड़ा जिले के इंदौरा, फतेहपुर और देहरा उपमंडल के कई इलाके जलमग्न हो सकते हैं।
इंदौरा प्रशासन ने ब्यास नदी से सटे 17 पंचायतों और करीब 60 गांवों के लोगों को अलर्ट किया है। वर्ष 2023 की बाढ़ की तरह ही इस बार भी बेला ठाकुरद्वारा, पराल, मल्कवाल जैसे इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित होने की आशंका है।
SDM इंदौरा सुरेंद्र ठाकुर ने कहा कि 28 अगस्त को पानी छोड़े जाने से पहले निचले क्षेत्रों के लोग सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट हो जाएं। उन्होंने विशेष तौर पर बेला ठाकरां क्षेत्र की धुस्सी नहर का जिक्र करते हुए कहा कि अगर यह तेज बहाव में टूट गई तो निचले इलाकों में बड़ी तबाही हो सकती है।
पौंग डैम से लगातार पानी छोड़े जाने के चलते इंदौरा के मंड क्षेत्र में बाढ़ जैसे हालात बन गए हैं। मंगलवार रात को बाढ़ का पानी अर्नी यूनिवर्सिटी तक पहुंच गया। यहां से 254 लड़के और 164 लड़कियों को NDRF ने सुरक्षित बाहर निकाला।
वहीं, मंड सनौर और मंड घंड़रा में भी लोग पानी में फंसे रहे। पंचायत उपप्रधान जसविंदर चंदेल की सूचना पर प्रशासन ने टीम भेजी और 15 लोगों को रेस्क्यू किया, जिनमें 3 बच्चे, 4 महिलाएं, बुजुर्ग और पुरुष शामिल थे।
कांगड़ा के डीसी हेमराज बैरवा ने बताया कि जिले में अभी तक 820 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया है। इंदौरा उपमंडल में 3 रिलीफ कैंप बनाए गए हैं, जहां प्रभावित लोगों को ठहराया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि जिले में इस वक्त 65 से ज्यादा संपर्क मार्ग और 92 पेयजल योजनाएं प्रभावित हैं। खाद्य आपूर्ति विभाग को बड़ा भंगाल क्षेत्र में राशन पहुंचाने के लिए विशेष योजना बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
बीबीएमबी और प्रशासन ने साफ किया है कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है। जरूरत पड़ने पर सेना और अतिरिक्त NDRF की टीमों को भी लगाया जा सकता है। वहीं, प्रभावित क्षेत्रों के लोगों से अपील की गई है कि वे नदी के किनारे न जाएं और प्रशासन के आदेशों का पालन करें।