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August 28, 2025
हिमाचल में बारिश का तांडव : हाईवे बंद, 2 हजार से ज्यादा लोग रास्तों में फंसे- रेस्क्यू जारी
कई जगह पर पिछले तीन दिनों से मोबाइल नेटवर्क बंद है
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में बरसात का कहर लगातार बढ़ता ही जा रहा है। बुधवार रात हुई भारी बारिश के बाद कई जिलों में जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। चंडीगढ़-मनाली हाईवे जगह-जगह भूस्खलन के कारण ठप पड़ गया है।
मंडी जिले में ओट के पास बनाला क्षेत्र में पहाड़ी दरकने से कई गाड़ियों के मलबे में दबने की सूचना है। हालांकि प्रशासन ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। लगातार भूस्खलन और बारिश से कुल्लू, चंबा और लाहौल-स्पीति जैसे संवेदनशील जिलों का बाहरी दुनिया से संपर्क टूट गया है।
यहां पिछले तीन दिनों से मोबाइल नेटवर्क बंद है। सड़कें जगह-जगह से बह गई हैं और बिजली-पानी की आपूर्ति भी ठप है। नतीजतन, हजारों लोग फंसे हुए हैं और उनके परिजन उनसे संपर्क नहीं कर पा रहे।
जानकारी के अनुसार, चंबा, कुल्लू और लाहौल-स्पीति में करीब दो हजार से अधिक पर्यटक और मणिमहेश यात्री अलग-अलग जगहों पर फंसे हुए हैं। चंबा जिले में नुकसान का सही आंकलन अभी तक नहीं हो पाया है। फिलहाल, लोगों को रेस्क्यू किया जा रहा है।
डलहौजी के विधायक ने बताया कि अकेले उनके क्षेत्र में 50 से अधिक घर बादल फटने से क्षतिग्रस्त हुए हैं। भरमौर और चंबा विधानसभा क्षेत्र में भी भारी बारिश से गांव-गांव में तबाही के निशान देखे जा सकते हैं। लोगों को सुरक्षित जगहों पर भेजने की कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन टूटी सड़कों और मलबे के कारण रेस्क्यू अभियान धीमा है।
कुल्लू जिले के बंजार और मनाली उपमंडल में आज सभी स्कूल बंद रखे गए हैं। वहीं, चंडीगढ़-मनाली फोरलेन को खोलने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है और प्रशासन का कहना है कि सड़क आज शाम तक आंशिक रूप से बहाल की जा सकती है। मंडी से कुल्लू तक छोटे वाहनों के लिए रास्ता बुधवार को बहाल हुआ था, लेकिन रात में दोबारा हुए भूस्खलन ने इसे फिर बंद कर दिया।
इस बीच मौसम विभाग ने गुरुवार को ऊना, हमीरपुर, मंडी, शिमला और सिरमौर जिलों के लिए यलो अलर्ट जारी किया है। शुक्रवार को यह अलर्ट कांगड़ा और बिलासपुर तक भी बढ़ा दिया जाएगा। यानी राज्य में अगले 48 घंटे मौसम का मिजाज और खराब रहने की आशंका है।
हिमाचल प्रदेश में इस बार मानसून का असर पिछले कई वर्षों से कहीं ज्यादा घातक साबित हुआ है। 20 जून से 27 अगस्त तक का आंकड़ा बताता है कि सामान्य से 30% ज्यादा और सिर्फ अगस्त में ही 62% अतिरिक्त बारिश दर्ज हुई है।
इस आपदा में अब तक 310 लोगों की जान जा चुकी है और 38 लोग लापता हैं। राज्यभर में 747 घर पूरी तरह जमींदोज, 2772 घर आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त, 481 दुकानें ढह गईं और 3192 गौशालाएं नष्ट हो चुकी हैं। अकेले संपत्ति का नुकसान ही 2623 करोड़ रुपये आंका गया है।
बारिश का यह सिलसिला कब थमेगा, फिलहाल इसका अनुमान लगाना मुश्किल है। पहाड़ी इलाकों में रहने वाले लोगों के मन में लगातार भय बना हुआ है। खेत, बाग, सड़कें, घर और रोजगार सभी बारिश की मार झेल रहे हैं। वहीं, फंसे हुए पर्यटक और मणिमहेश यात्री राहत टीमों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।