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August 28, 2025

हिमाचल : एयरफोर्स में फ्लाइट लेफ्टिनेंट बनी बेटी, माता-पिता के नहीं थम रहे खुशी के आंसू

आर्म्ड फोर्स मेडिकल सर्विस परीक्षा में उन्होंने ऑल इंडिया स्तर पर 54वीं रैंक हासिल की

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Dr Srishti Chauhan

सिरमौर। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिला की एक बेटी ना सिर्फ अपने माता-पिता बल्कि अपने गांव का नाम भी देशभर में रोशन कर दिया है। बेटी ने ऐसा कुछ कर दिखाया है जिससे गिरिपार क्षेत्र का छोटा सा गांव बाम्बल इन दिनों गर्व और खुशी से झूम रहा है।

एयरफोर्स में फ्लाइट लेफ्टिनेंट बनी बेटी

यहां की बेटी डॉ. सृष्टि चौहान ने भारतीय वायुसेना में फ्लाइट लेफ्टिनेंट पद पर चयनित होकर प्रदेश का नाम देशभर में रोशन कर दिया है। उनकी इस सफलता ने न सिर्फ गांव और परिवार, बल्कि पूरे हिमाचल को गौरवान्वित किया है।

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खुशी से भावुक हुए माता-पिता

डॉ. सृष्टि का परिवार लंबे समय से शिक्षा के क्षेत्र से जुड़ा रहा है। उनके पिता मोहन सिंह चौहान सेवानिवृत्त प्रोफेसर हैं, जबकि माता सुरेखा चौहान वर्तमान में CHT पद पर सेवाएं दे रही हैं। शिक्षा से जुड़े इस परिवार की बेटी ने देशसेवा का मार्ग चुनकर एक अनोखी मिसाल पेश की है। बेटी की इस सफलता के बाद माता-पिता के खुशी के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।

शिक्षा और कठिन परिश्रम से हासिल की सफलता

डॉ. सृष्टि ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पांवटा साहिब से प्राप्त की और आगे की पढ़ाई मोहाली से पूरी की। इसके बाद उन्होंने मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल से MBBS की पढ़ाई पूरी की।MBBS के पश्चात करीब दो वर्षों तक वहीं चिकित्सक के रूप में सेवाएं देते हुए उन्होंने अपने सपनों को पंख देने की तैयारी जारी रखी।

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AIR 54 किया हासिल

हाल ही में आयोजित आर्म्ड फोर्स मेडिकल सर्विस परीक्षा (AFMS) परीक्षा में उन्होंने ऑल इंडिया स्तर पर 54वीं रैंक हासिल की और भारतीय वायुसेना में फ्लाइट लेफ्टिनेंट के पद पर चयनित हुईं।

गांव में खुशी और गर्व का माहौल

डॉ. सृष्टि की इस उपलब्धि से पूरे गांव में उत्सव का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी यह सफलता आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देगी। क्षेत्र की अन्य बेटियां भी अब उनके नक्शेकदम पर चलते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं और सैन्य सेवाओं में अपना भविष्य बनाने का हौसला जुटाएंगी।

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सृष्टि का संदेश

अपनी उपलब्धि पर खुशी व्यक्त करते हुए डॉ. सृष्टि चौहान ने कहा कि यह सफलता मेरे माता-पिता और परिवार के मार्गदर्शन एवं आशीर्वाद के बिना संभव नहीं थी। कड़ी मेहनत, आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।

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