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January 14, 2026

आज से हिमाचल के देवी-देवता स्वर्ग प्रवास पर : नियमों में बंधे कई गांव, ना चलेगा TV-ना बजेगा मोबाइल

साजो सामान के साथ स्वर्ग प्रवास पर निकले देवी-देवता

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शिमला। देवभूमि हिमाचल के कण-कण में देवी-देवताओं का वास है। हिमाचल के लोगों की देवी-देवताओं से अनोखी आस्था जुड़ी हुई है। हिमाचल के लोग देवी-देवताओं को अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा मानते हैं। लोगों की देवी-देवताओं के प्रति आस्था इतनी गहरी है कि वे अपने दैनिक जीवन के हर छोटे-बड़े निर्णय में उन्हें शामिल करते हैं।

स्वर्ग प्रवास पर देवी-देवता

हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के रामपुर बुशहर क्षेत्र में मकर संक्रांति के पावन पर्व के साथ ही देव परंपरा से जुड़ा एक विशेष और आस्था से भरा दौर शुरू हो गया है। आज 14 जनवरी मकर संक्रांति यानि माघ के साजे पर क्षेत्र के कई प्रमुख देवी-देवताओं के मंदिरों के कपाट विधिवत रूप से बंद कर दिए गए हैं।

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नहीं होगा कोई शुभ कार्य

सदियों पुरानी परंपरा के अनुसार देवी-देवता स्वर्ग प्रवास के लिए प्रस्थान कर गए हैं, जिसके चलते अब करीब एक माह तक मंदिरों में नियमित पूजा-अर्चना नहीं होगी। पूरे अप्पर हिमाचल में अब एक महीने तक शुभ कार्य नहीं होंगे और ना ही धार्मिक अनुष्ठान होंगे।

TV-रेडियो पर 42 दिन तक बैन

आपको बता दें कि हिमाचल के कुल्लू जिला की पर्यटन नगरी मनाली के कई गांवों में मकर संकांति से कुछ अलग देव नियम शुरू हो जाते हैं। मनाली की ऊझी घाटी के नौ गांवों में अगले 42 दिन तक ना तो TV, रेडियो बजता है और ना ही DJ का शोर शराबा सुनाई देगा। गांव में कोई भी सीटी तक भी नहीं बजा सकेगा। मोबाइल पर भी जोर जोर से नाटी या गाने सुनने की मनाही होती है। इन गांवों के लोग अगले 42 दिन तक मनोरंजन के साधनों से पूरी तरह से दूरी बना लेते हैं। इस दौरान ना तो मंदिरों में पूजा होती है और ना ही घंटी बजाई जाती है।

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माना जाता है कमजोर समय

कोई देवता एक महीना तो कोई तीन महीने तक स्वर्ग में रहेंगे और फिर देवताओं की वापसी के साथ पूरे एक साल की भविष्यवाणी होगी।  इस संक्रांति से लेकर देवता के लौटने तक का समय काफी कमजोर माना जाता है। मगर देवता के वापसी के बाद सारी रौनक लौट जाती है।

साजो सामान के साथ स्वर्ग प्रवास पर

बिजली महादेव सहित कुल्लू जिले के करीब 250 देवी-देवता अपनी तिथियों के हिसाब से पिछले महीने ही स्वर्ग प्रवास पर जा चुके हैं। मगर आज मकर संक्रांति के अवसर पर शिमला रामपुर, ऊपरी शिमला, आउटर सिराज और किन्नौर जिले के देवी-देवता अपने पूरे साजो सामान के साथ स्वर्ग प्रवास पर चले गए हैं।

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देवी-देवताओं की होती है कहासुनी

मान्यता के अनुसार ये सभी देवी-देवता स्वर्ग के राजा इंद्र के दरबार में अपने-अपने क्षेत्रों की खुशहाली के लिए कई दिनों तक मंत्रणा करते हैं और शक्तियां हासिल करते हैं। इस दौरान कई सारे देवी-देवताओं के बीच कहासुनी भी हो जाती है। देवताओं के स्वर्ग प्रवास के दौरान जब असमान में बादल गरजते हैं, तो ऐसा माना जाता है कि स्वर्ग में देवताओं का युद्ध हो रहा है।

फिर खोले जाएंगे मंदिरों के कपाट

मान्यता ये है भी है कि स्वर्ग प्रवास पर देवता रोजमर्रा का काम करते हैं। कुछ बैल चुगाने के लिए जाते हैं, तो कोई हल लगाता है। वहीं, जब अपने-अपने काम करके एक या तीन महीने के बाद ये देवताजन स्वर्ग से वापस लौटते हैं, तो इनके मंदिर परिसरों को फिर से खोला जाता है।

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एक साल की करेंगे भविष्यवाणी

जहां ये देवता अपने-अपने गूर के माध्यम से स्वर्ग में हुई घटनाओं को बताते हुए। अगले एक साल की भविष्यवाणी करते हैं- जैसे इस साल कहां कितनी फसल होगी और कहां कितनी तबाही आएगी।  स्वर्ग से लौटने के बाद ये देवता अपने भक्तों को वरदान और आशीर्वाद भी देते हैं।

श्रद्धा के साथ किया विदा

विदित रहे कि, मंगलवार सुबह तड़के ही मंदिर परिसरों में धार्मिक गतिविधियां शुरू हो गई थीं। पुजारियों द्वारा ब्रह्म मुहूर्त में देवी-देवताओं का स्नान करवाया गया। इसके बाद विशेष पूजा-पाठ, मंत्रोच्चारण और पारंपरिक अनुष्ठानों के साथ स्वर्ग प्रवास की प्रक्रिया पूरी की गई। श्रद्धालुओं ने अंतिम दर्शन किए और इसके पश्चात मंदिरों के कपाट बंद कर दिए गए। इस दौरान पूरे क्षेत्र में धार्मिक माहौल बना रहा और लोगों ने श्रद्धा भाव से देवी-देवताओं को विदा किया।

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पीढ़ियों से चल रही परंपरा

स्वर्ग प्रवास पर जाने वाले प्रमुख देवी-देवताओं में देवता साहेब छीजा कलेश्वर, छतरखंड पंचवीर ब्रांदली, दत्त महाराज, देवता साहेब डंसा दमुख, गसो काजल और देवता साहेब रचोली जाख सहित अन्य देवी-देवता शामिल हैं। मान्यताओं के अनुसार, यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है, जिसका क्षेत्र की धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक जीवन से गहरा संबंध है। इस अवधि को आत्मसंयम, नियम और आस्था का समय माना जाता है।

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