#विविध
January 10, 2026
आपदा में मां-बाप खो चुकी मासूम निकिता को सुक्खू सरकार ने दी बड़ी राहत- 21 लाख की FD सौंपी
10 नवंबर को मुख्यमंत्री ने निकिता के लिए 7.95 लाख रुपये का चेक भी सौंपा था
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मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला में इस बार बरसात ने खूब तबाही मचाई। आपदा के कारण कई हंसते-खेलते परिवार उजड़ गए। आपदा में अपने माता-पिता और दादी को खोने वाली सराज क्षेत्र की नन्ही निकिता की जिंदगी बेहद दर्दनाक हादसे से शुरू हुई।
वहीं, उसके भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सरकार और प्रशासन ने मजबूत कदम उठाया है। आपदा में अपने माता-पिता और दादी को खोने वाली निकिता के नाम 21 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) तैयार कर उसकी आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित की गई है।
उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन ने सराज क्षेत्र के शिकावरी गांव पहुंचकर यह FD की प्रति निकिता की बुआ एवं कानूनी संरक्षक किरन देवी को सौंपी। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार की मंशा निकिता को सिर्फ आर्थिक मदद तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि उसके पालन-पोषण, शिक्षा और सम्मानजनक जीवन की पूरी जिम्मेदारी भी निभाएगी।
CM सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मंडी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान निकिता के लिए 21 लाख रुपये की विशेष आर्थिक सहायता की घोषणा की थी। इसके तहत FD तैयार की गई, ताकि आने वाले वर्षों में निकिता की पढ़ाई और जीवन की जरूरी आवश्यकताओं में कोई बाधा न आए। इससे पहले 10 नवंबर को मुख्यमंत्री ने मंडी में आयोजित कार्यक्रम में निकिता के लिए 7.95 लाख रुपये का चेक भी सौंपा था।
इसके साथ ही प्रदेश सरकार निकिता को सुख आश्रय योजना के तहत प्रति माह 4,000 रुपये की सहायता राशि भी दे रही है। यह राशि उसके दैनिक खर्च, देखभाल और परवरिश के लिए दी जा रही है, ताकि एक अभिभावकविहीन बच्ची को किसी भी तरह की कमी का अहसास न हो।
30 जून, 2025 की वह भयावह रात सराज क्षेत्र के परवाड़ा गांव के लिए कभी न भूलने वाली बन गई। लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण गांव के पास बहने वाले नाले का रुख अचानक घरों की ओर हो गया। उस वक्त घर में निकिता के पिता रमेश कुमार (31), मां राधा देवी (24) और दादी पूर्णो देवी (59) मौजूद थे।
पानी का बहाव घर की ओर बढ़ता देख रमेश कुमार नाले का रुख मोड़ने बाहर निकले। पीछे-पीछे उनकी पत्नी और मां भी निकिता को बिस्तर पर सुलाकर उनकी मदद के लिए पहुंच गईं। लेकिन तभी अचानक भारी मलबा और तेज पानी का सैलाब आया, जिसने तीनों को अपनी चपेट में ले लिया। पल भर में पूरा परिवार नाले के सैलाब में समा गया। घर सुरक्षित रहा, लेकिन निकिता हमेशा के लिए अपनों से बिछड़ गई।
हादसे का पता अगली सुबह तब चला, जब गांव वालों ने घर के अंदर झांक कर देखा। सन्नाटे के बीच बिस्तर पर 11 माह की नन्ही निकिता रोती हुई मिली। उसके माता-पिता और दादी कहीं नजर नहीं आए।
आसपास तबाही का मंजर देखकर गांव वालों को समझते देर नहीं लगी कि तीनों अब इस दुनिया में नहीं रहे। गांव के लोगों ने तुरंत निकिता को गोद में उठाया और प्रशासन को सूचना दी। इसके बाद प्रशासन की मौजूदगी में निकिता को उसकी बुआ किरन देवी के सुपुर्द किया गया, जो अब उसकी कानूनी संरक्षक हैं।
निकिता की कहानी सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि यह दिखाती है कि आपदा के बाद मानवीय संवेदनाएं कितनी जरूरी होती हैं। प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन द्वारा उठाए गए कदम यह संदेश देते हैं कि राज्य अपने सबसे कमजोर नागरिकों के साथ खड़ा है।
लोगों का कहना कि आज निकिता भले ही अपने माता-पिता की गोद से वंचित हो, लेकिन सरकार और समाज ने मिलकर उसके भविष्य के लिए सुरक्षा की एक मजबूत नींव रख दी है। यह मदद न सिर्फ आर्थिक है, बल्कि उस भरोसे की भी है, जो एक उजड़े हुए जीवन को फिर से संवारने की उम्मीद देती है।