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January 10, 2026

हिमाचल : ड्राइवर ने की थी बस संभालने की कोशिश, खुद भी नहीं बच पाया- पैरापिट होते तो शायद...

39 सीटर बस में सवार थे 66, 14 ने तोड़ा दम- 52 घायल

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Jeet Coach Bus Driver

सिरमौर। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में हुए दर्दनाक बस हादसे ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क सुरक्षा और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हादसे में बस चालक समेत कुल 14 लोगों की जान चली गई। सभी मृतक सिरमौर जिले के कुपवी और आसपास के ग्रामीण इलाकों के रहने वाले बताए जा रहे हैं।

हादसे में बस चालक की मौत

एक ही पल में कई घरों के चिराग बुझ गए और पूरा क्षेत्र शोक में डूब गया। लोगों का कहना है कि बस चालक बलवीर सिंह तोमर ने बस संभालने की कोशिश की थी। उसने बस के स्टीयरिंग को घुमाया, लेकिन बस खाई में गिर गई। बस ने एक के बाद एक पांच बार पलटे खाए और बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। कई लोग बस के नीचे दब गए। मौके पर चीख-पुकार मच गई।

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मुआवजे की घोषणा

इस हादसे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने गहरा शोक व्यक्त किया है। प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।

जांच, बैठकें और फिर वही हालात

जब भी कोई बड़ा सड़क हादसा होता है, तो प्रशासन जांच के आदेश देता है। बैठकों में सड़क सुरक्षा, बसों की फिटनेस और यातायात नियमों पर लंबी चर्चाएं होती हैं। कुछ समय के लिए सख्ती भी दिखाई जाती है, लेकिन जैसे ही मामला ठंडा पड़ता है, हालात फिर पुराने ढर्रे पर लौट आते हैं। इसका खामियाजा छोटे बच्चों, युवाओं और आम लोगों को अपनी जान देकर चुकाना पड़ता है। 

ऊंचाई पर बसे इलाकों में मौत का सफर

स्थानीय लोगों का कहना है कि सिरमौर जिले के ऊंचाई वाले इलाकों में सड़कों की हालत बेहद खराब है। कई मार्ग इतने संकरे हैं कि दो वाहन एक साथ निकल नहीं सकते। जगह-जगह सड़कें टूटी हुई हैं और कई हिस्सों में सुरक्षा के लिए पैरापिट या क्रैश बैरियर तक नहीं लगाए गए हैं। ऐसे में जरा सा संतुलन बिगड़ने पर वाहन को संभालने का कोई मौका नहीं मिलता और वह गहरी खाई में जा गिरता है।

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खतरनाक रास्तों पर सफर

ग्रामीणों का कहना है कि बरसात और कोहरे के मौसम में हालात और भी खतरनाक हो जाते हैं। दृश्यता कम होने और सड़कों के फिसलन भरे होने से हादसों की आशंका कई गुना बढ़ जाती है, लेकिन इसके बावजूद न तो समय रहते मरम्मत होती है और न ही अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम किए जाते हैं।

हर साल दर्जनों हादसे, समाधान शून्य

लोगों के अनुसार सिरमौर जिले में हर साल दर्जनों सड़क हादसे हो रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद न तो सड़कों की चौड़ाई बढ़ाई जा रही है और न ही खतरनाक मोड़ों को सुरक्षित बनाया जा रहा है। कई स्थानों पर तीखे मोड़, कमजोर सड़कें और सुरक्षा इंतजामों की कमी हादसों का बड़ा कारण बन रही है। बसों की नियमित जांच और क्षमता से अधिक सवारियां बैठाने पर रोक जैसे नियम कागजों तक ही सीमित नजर आते हैं।

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प्रशासन से ठोस कदमों की मांग

स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि हादसों के बाद सिर्फ जांच और औपचारिकताओं तक सीमित न रहा जाए। संवेदनशील और दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहां स्थायी समाधान किए जाएं। खतरनाक मोड़ों पर क्रैश बैरियर, पैरापिट, चेतावनी बोर्ड और सड़कों की चौड़ाई बढ़ाने जैसे कदम तुरंत उठाए जाने चाहिए। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस फैसले नहीं लिए गए, तो सिरमौर हर साल इसी तरह लापरवाही की कीमत लोगों की जान से चुकाता रहेगा।

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इन कारणों से होते हैं बस हादसे

प्रदेश में बस हादसों के पीछे कई कारण सामने आते रहे हैं-

  • खराब और जर्जर सड़कें तथा तीखे मोड़
  • ओवरलोडिंग और कई बार बसों की छतों पर यात्रियों का बैठना
  • चालक का नियंत्रण खो देना या तेज रफ्तार
  • भारी बारिश के कारण भूस्खलन या सड़क का धंसना
  • सड़क किनारे सुरक्षा अवरोधों और क्रैश बैरियर का अभाव

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