#हिमाचल
January 10, 2026
हिमाचल में टनल निर्माण से हिला पूरा इलाका : आधी रात 15 परिवार हुए बेघर, खतरे में कई मकान
रातभर सड़क पर बैठे रहे लोग, कोई व्यवस्था नहीं
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शिमला। जिस शहर को पहाड़ों की रानी कहा जाता है, उसी शिमला में शुक्रवार रात लोग अपने ही घरों से डरकर सड़कों पर आ गए। राजधानी के चलौंठी इलाके में देर रात उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब एक छह मंजिला रिहायशी इमारत में अचानक बड़ी-बड़ी दरारें नजर आने लगीं।
हालात बिगड़ते देख प्रशासन ने रात करीब 10 बजे इमारत को तत्काल खाली करवा दिया। इस इमारत में रह रहे करीब 15 परिवार, अपने छोटे बच्चों और बुजुर्गों के साथ, कड़ाके की ठंड में घर छोड़कर सड़क पर आने को मजबूर हो गए।
कुछ ही देर बाद प्रशासन ने पास के एक होटल और अन्य मकानों को भी एहतियातन खाली करवा दिया। होटल में ठहरे पर्यटक भी अपना सामान लेकर सड़कों पर आ गए। हालात यहीं नहीं रुके ढली-संजौली बाईपास सड़क पर भी दरारें दिखाई देने लगीं, जिसके बाद देर रात ही इस सड़क पर ट्रैफिक रोक दिया गया और मौके पर पुलिस बल तैनात कर दिया गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले तीन दिनों से उनके घरों की दीवारों में हल्की दरारें दिखाई देने लगी थीं। इसकी सूचना निर्माण कंपनी और जिला प्रशासन को दी गई थी, लेकिन उस समय कर्मचारियों ने इमारत को सुरक्षित बताते हुए किसी बड़े खतरे से इनकार कर दिया।
शुक्रवार शाम अचानक दरारें तेजी से बढ़ने लगीं। कुछ ही घंटों में हालात इतने गंभीर हो गए कि रात में ही मकान खाली करवाने का फैसला लेना पड़ा।
मकान तो खाली करवा दिए गए, लेकिन प्रभावित परिवारों के ठहरने के लिए कोई ठोस व्यवस्था नजर नहीं आई। देर रात तक महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग ढली बाईपास सड़क पर बैठे रहे। ठंड से बचने के लिए कुछ लोगों ने सड़क किनारे आग जलाई।
लोगों में डर के साथ-साथ गुस्सा भी साफ नजर आया।
स्थानीय निवासियों ने टनल निर्माण कार्य में हो रही ब्लास्टिंग और भारी मशीनों को जिम्मेदार ठहराया। लोगों का आरोप है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद काम नहीं रोका गया। कंपनियों को चेताया गया था कि कंपन से घरों में नुकसान हो रहा है, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
चलौंठी की घटना ने शिमला के भट्टाकुफर हादसे की यादें ताजा कर दी हैं, जहां टनल निर्माण के दौरान सड़क धंसने से 15 फीट गहरा गड्ढा बन गया था और एक बहुमंजिला मकान ढह चुका था। पीड़ितों का कहना है कि उस मामले में भी आज तक पूरा मुआवजा नहीं मिला।
चलौंठी क्षेत्र में पहले भी जमीन धंसने और भूस्खलन की घटनाएं सामने आती रही हैं। अब बिना बारिश मकानों में दरारें आने से लोगों में डर और असुरक्षा और गहरा गई है। स्थानीय लोग टनल निर्माण की तत्काल तकनीकी जांच, घरों की स्ट्रक्चरल ऑडिट और प्रभावित परिवारों के लिए सुरक्षित पुनर्वास की मांग कर रहे हैं।