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December 19, 2025

सुक्खू सरकार ने ठेकेदार के कहने पर कर दिया अधिकारी का तबादला, अब हाईकोर्ट में हुई फजीहत

हिमाचल हाईकोर्ट में सुक्खू सरकार की फजीहत

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शिमला। हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार को एक बार फिर तबादला राजनीति के चलते न्यायिक फटकार झेलनी पड़ी है। एक निजी ठेकेदार की सिफारिश पर ईमानदारी से काम कर रहे अधिकारी का तबादला करना सरकार को भारी पड़ गया। मामला सीधे हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट पहुंचा और अदालत ने न सिर्फ तबादला रद्द किया, बल्कि सरकार की कार्यप्रणाली पर भी कड़ी टिप्पणी कर दी। यह फैसला सुक्खू सरकार के लिए किरकिरी का कारण बन गया और प्रशासन में राजनीतिक व बाहरी दखल पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

हाईकोर्ट ने पलटा सरकार का फैसला

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने हिम ऊर्जा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के तबादले को रद्द करते हुए स्पष्ट कर दिया कि किसी निजी ठेकेदार के कहने पर सरकारी कर्मचारी को इधर.उधर करना कानूनन गलत है। यह फैसला जस्टिस संदीप शर्मा की सिंगल बेंच ने सुनाया। अदालत ने कहा कि तबादला प्रशासनिक जरूरत या जनहित में होना चाहिए, न कि राजनीतिक दबाव या बाहरी सिफारिश के आधार पर।

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क्या है पूरा मामला

दरअसल हिम ऊर्जा विभाग में तैनात वरिष्ठ परियोजना अधिकारी रमेश कुमार ठाकुर धर्मशाला में तैनात थे। लेकिन 15 नवंबर 2025 को उनका अचानक तबादला धर्मशाला से चंबा कर दिया गया। अचानक हुए इस तबादले से हताश अधिकारी ने हिमाचल हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि यह तबादला किसी प्रशासनिक आवश्यकता के तहत नहीं, बल्कि एक निजी ठेकेदार के दबाव में किया गया है। उन्होंने आरटीआई के जरिए प्राप्त दस्तावेज भी अदालत के समक्ष पेश किए, जिनमें ठेकेदार द्वारा मुख्यमंत्री को लिखा गया पत्र शामिल था।

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नोटिस भेजना पड़ा महंगा

कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार तबादले की सिफारिश करने वाला ठेकेदार एमएस हिमालयन टेक्नो का मालिक है, जिसे हमीरपुर, कांगड़ा और बिलासपुर में 500 किलोवाट क्षमता की सोलर पावर परियोजनाओं का कार्य मिला था। निर्धारित समय पर परियोजनाएं पूरी न होने पर अधिकारी ने उसे नोटिस और रिमाइंडर भेजे। इससे नाराज होकर ठेकेदार ने अपने राजनीतिक संपर्कों का सहारा लिया और सीधे मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर अधिकारी के तबादले की मांग कर दी।

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अदालत की सख्त टिप्पणी

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा कि संबंधित ठेकेदार न तो कोई जनप्रतिनिधि है, न संवैधानिक पदाधिकारी और न ही विभाग का कोई अधिकारी। ऐसे व्यक्ति की सिफारिश पर तबादला करना खुला बाहरी और राजनीतिक हस्तक्षेप है। अदालत ने कहा कि इस तरह के तबादले पहले ही सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के कई फैसलों में खारिज किए जा चुके हैं। कोर्ट ने 15 नवंबर, 2025 का तबादला आदेश रद्द करते हुए राज्य सरकार को भविष्य में नियमों और कानून के दायरे में रहकर ही निर्णय लेने की हिदायत दी।

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सुक्खू सरकार की बढ़ी मुश्किलें

यह मामला सुक्खू सरकार के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली सरकार पर एक बार फिर यह आरोप लगा है कि प्रशासनिक फैसलों में राजनीतिक दबाव और ठेकेदारों की दखलअंदाजी हावी है। हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी ने न सिर्फ सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी संदेश दिया है कि ईमानदारी से काम करने वाले अधिकारियों को दबाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह फैसला प्रदेश में तबादला संस्कृति और राजनीतिक हस्तक्षेप पर एक अहम नजीर के तौर पर देखा जा रहा है।

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