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August 14, 2025

हिमाचल में 6 जगह फटे बादल- जलमग्न हुए कई गांव, प्रशासन ने खाली करवाए मकान- जानें

कई जगह गिरी इमारतें- कुछ गाड़ियां मलबे में बही

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Kotkhai Cloud Burst

शिमला। हिमाचल प्रदेश में बुधवार का दिन प्राकृतिक आपदा के लिहाज से बेहद डरावना साबित हुआ। मौसम विभाग के ऑरेंज अलर्ट के बीच राज्य के 6 अलग-अलग इलाकों में बादल फटने की घटनाएं हुई -श्रीखंड के भीमडवारी और नंती, किन्नौर के पूह, लाहौल की मयाड़ घाटी और कुल्लू की तीर्थन घाटी में।

6 जगह फटा बादल

इन घटनाओं ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया और कई स्थानों पर भारी नुकसान हुआ। श्रीखंड क्षेत्र के भीमडवारी और नंती में बादल फटने से गानवी में अचानक आई बाढ़ में दो शेड बह गए, जबकि छह लोग पानी के तेज बहाव में फंसकर डूब गए।

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पुल और कॉटेज बह गए

गानवी खड्ड का पानी इतना बढ़ा कि एक पुल टूट गया और पास स्थित पुलिस चौकी में पानी घुस गया। प्रशासन ने कुर्पण खड्ड के उफान पर आने के बाद बागीपुल बाजार को खाली करवा लिया। कुल्लू के बंजार उपमंडल की तीर्थन घाटी में बठाहड़ क्षेत्र के मझल्ली गांव के पास बादल फटने से फलाचन खड्ड में बाढ़ आ गई। यहां टिल्ला और दोगड़ा पुल क्षतिग्रस्त हो गए, जबकि पांच गाड़ियां और चार कॉटेज तेज बहाव में बह गए। सौभाग्य से कॉटेज में उस समय कोई मौजूद नहीं था।

लाहौल की मयाड़ घाटी में गांव खाली

लाहौल की मयाड़ घाटी के करपट, छिंगुट और उदगोसे गांव बादल फटने से प्रभावित हुए। करपट गांव में खतरे को देखते हुए प्रशासन ने 22 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया। हालांकि मंगलवार रात को ग्रामीणों ने राहत शिविरों में टेंट डालकर रात बिताई। पानी के तेज बहाव में कई खेत और कृषि भूमि बह गई।

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किन्नौर के पूह में मशीनरी बह गई

किन्नौर के पूह में होजो नाले में बाढ़ आने से आईटीबीपी कैंप के लिए बनाई जा रही ऋषि डोगरी सड़क का काम प्रभावित हुआ। निर्माण में लगी कंपनी की मशीनरी बाढ़ में बह गई और पांच कर्मचारी बीच में फंस गए, जिन्हें प्रशासन और राहत दल द्वारा रेस्क्यू किया जा रहा है।

बिजली-पानी व्यवस्था ठप

भारी बारिश और भूस्खलन से प्रदेश में दो नेशनल हाईवे समेत 323 सड़कें बंद हो गईं। साथ ही 70 बिजली ट्रांसफार्मर और 130 पेयजल योजनाएं ठप हो गईं, जिससे कई क्षेत्रों में अंधेरा और पानी की किल्लत पैदा हो गई है।

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अन्य जिलों में भी नुकसान

कांगड़ा जिले में लगातार हो रही बारिश के चलते तीन कच्चे मकान जमींदोज हो गए, जबकि 16 अन्य घरों, 21 गोशालाओं और दो रसोई घरों को नुकसान पहुंचा। चंबा में मंगलवार रात हुई तेज बारिश से 18 स्कूलों के कमरे, सुरक्षा दीवारें और रसोईघर क्षतिग्रस्त हो गए। हमीरपुर में दो पक्के और सात कच्चे घर, चार गोशालाएं और दो डंगे टूट गए।

कोटखाई में फटा बादल

शिमला जिले के कोटखाई उपमंडल के खलटूनाला क्षेत्र में रात करीब तीन बजे पहाड़ियों पर बादल फटने से नाले में अचानक भारी मात्रा में मलबा और पानी उतर आया। तेज बहाव के साथ आए मलबे ने यहां खड़ी छह से अधिक गाड़ियों को बहा दिया और एक पेट्रोल पंप का आधा हिस्सा ढहाकर दबा दिया। हादसा अचानक हुआ, लेकिन पेट्रोल पंप पर ड्यूटी दे रहे कर्मचारी समय रहते भाग निकले, जिससे एक बड़ी जनहानि टल गई।

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सभी स्कूलों को बंद करने का ऑर्डर

भारी बारिश के चलते प्रशासन ने ऊना जिले, कुल्लू के बंजार उपमंडल और मंडी के थुनाग क्षेत्र के सभी स्कूल आज बंद रखने के आदेश जारी किए। शिमला, कुल्लू, सोलन और सिरमौर में भी लगातार हो रही वर्षा के कारण कई जगह भूस्खलन हुए, जिससे तीन नेशनल हाईवे समेत 500 से अधिक सड़कें पूरी तरह बंद हो गईं। शिमला में तो रात दो बजे से शुरू हुई तेज बारिश के बाद लोग घरों में बेचैनी से सुबह का इंतज़ार करते रहे।

 

किन्नौर जिले के पूह क्षेत्र में भी बीती शाम बादल फटने की घटना हुई। इसके बाद सतलुज नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया, जिससे रामपुर बाज़ार में नदी किनारे स्थित घरों को एहतियातन खाली कराया गया।

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मौसम विभाग की चेतावनी

विभाग ने गुरुवार को चंबा, कांगड़ा और मंडी जिलों में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। बाकी जिलों में येलो अलर्ट लागू रहेगा। 15 अगस्त को सिरमौर, शिमला, मंडी, कुल्लू, कांगड़ा और चंबा में हल्की बारिश की संभावना जताई गई है। बारिश का यह दौर 19 अगस्त तक जारी रह सकता है।

मानसून से अब तक का भारी नुकसान

20 जून से 12 अगस्त तक के आंकड़ों के अनुसार, हिमाचल में इस मानसून सीजन में 241 लोगों की जान गई है, जिनमें 115 मौतें सड़क हादसों में हुई हैं। 36 लोग अब भी लापता हैं और 326 लोग घायल हुए हैं। बादल फटने, बाढ़ और भूस्खलन से अब तक 2,507 घर, दुकानें और अन्य भवन क्षतिग्रस्त हुए हैं, जबकि 2,043 गोशालाएं भी प्रभावित हुई हैं। कुल आर्थिक नुकसान का आंकड़ा 2,031 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

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