#विविध
August 26, 2025
हिमाचल में नहीं थम रही भारी बारिश, जगह-जगह मची तबाही; कई जिलों में स्कूल बंद
शिंकुला दर्रे में 24 अगस्त की रात से लगातार बर्फबारी हो रही है
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शिमला। हिमाचल प्रदेश इन दिनों लगातार बारिश से जूझ रहा है। पिछले तीन दिनों से जारी भारी बरसात ने पूरे प्रदेश में हालात बिगाड़ दिए हैं। मंडी जिले के बालीचौकी क्षेत्र में बीती रात बड़ा हादसा हुआ, जब जमीन धंसने के बाद दो बहुमंजिला इमारतें देखते ही देखते जमींदोज हो गईं।
इन दोनों इमारतों में 40 से ज्यादा दुकानें चल रही थीं। राहत की बात यह रही कि प्रशासन ने संभावित खतरे को देखते हुए पांच दिन पहले ही बिल्डिंगें खाली करा दी थीं, जिस कारण किसी प्रकार का जानी नुकसान नहीं हुआ।
मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने आज चंबा और कांगड़ा जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। वहीं मंडी और कुल्लू में ऑरेंज अलर्ट लागू है। ऊना, हमीरपुर, बिलासपुर और लाहौल-स्पीति जिलों के लिए यलो अलर्ट जारी किया गया है।
खराब मौसम को देखते हुए शिमला, कांगड़ा, मंडी और कुल्लू जिलों में सभी स्कूलों और कॉलेजों में छुट्टी घोषित कर दी गई है। मनाली में हालात और भी खतरनाक हैं। लगातार बारिश के चलते ब्यास नदी उफान पर है और पानी आलू ग्राउंड तक पहुंच चुका है।
तेज बहाव से मनाली-लेह नेशनल हाईवे का करीब 150 मीटर हिस्सा नदी में समा गया, जिससे आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है। प्रदेशभर में जगह-जगह भूस्खलन होने से 750 से ज्यादा सड़कें बंद पड़ी हैं और यातायात पूरी तरह ठप हो गया है।
लाहौल-स्पीति जिले के शिंकुला दर्रे में 24 अगस्त की रात से लगातार बर्फबारी हो रही है। यहां आधा फीट से अधिक नई बर्फ गिर चुकी है। मौसम विभाग ने लोगों को नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने की सख्त हिदायत दी है।
इस मानसून सीजन ने हिमाचल को गहरे जख्म दिए हैं। अब तक 306 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से 36 लोगों ने जान बाढ़, बादल फटने और लैंडस्लाइड जैसी आपदाओं में गंवाई। वहीं 37 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।
बरसात से अब तक प्रदेश को 2394 करोड़ रुपये की सरकारी और निजी संपत्ति का नुकसान हुआ है। आंकड़ों के अनुसार, 703 मकान पूरी तरह तबाह हो चुके हैं, जबकि 2493 मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके अलावा, इस मानसून में 81 लैंडस्लाइड, 77 बाढ़ और 41 बादल फटने की घटनाएं दर्ज हो चुकी हैं।
सरकार ने जनता से अपील की है कि वे सतर्क रहें और किसी भी हालत में नदी-नालों या भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों की ओर रुख न करें। प्रशासन लगातार रेस्क्यू और राहत कार्यों में जुटा हुआ है।