#रोजगार
April 11, 2026
महिलाओं पर मेहरबान सुक्खू सरकार, बाल देखभाल केंद्र में मिल सकती है नौकरी- यहां जानें डिटेल
पुराने क्रैच कर्मचारियों को भी मिलेगा मौका
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में कामकाजी महिलाओं के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से पूरे प्रदेश में 152 नए क्रैच (बाल देखभाल केंद्र) खोलने का फैसला लिया गया है। इन केंद्रों का उद्देश्य छोटे बच्चों की सुरक्षित और बेहतर देखभाल सुनिश्चित करना है।
इन नए क्रैचों के शुरू होने के साथ ही विभाग में वर्कर और हैल्पर की भर्ती प्रक्रिया भी जल्द शुरू की जाएगी। यानी इस योजना से न सिर्फ बच्चों की देखभाल की व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
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सरकार ने पहले से चल रहे क्रैचों में कार्यरत कर्मचारियों को भी राहत दी है। जिन कर्मचारियों की पात्रता तय मानकों के अनुसार पूरी होगी, उनकी सेवाएं जारी रखी जाएंगी। इससे उनके अनुभव का लाभ बच्चों की देखभाल में लिया जा सकेगा।
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वहीं जो कर्मचारी निर्धारित योग्यता पूरी नहीं करेंगे, उन्हें हटाया जाएगा और उनकी जगह नई नियुक्तियां की जाएंगी। इस फैसले से व्यवस्था को और पारदर्शी और प्रभावी बनाने की कोशिश की जा रही है, ताकि बच्चों की देखभाल में किसी तरह की कमी न रहे और योग्य लोगों को ही जिम्मेदारी दी जा सके।
सरकार की ओर से जारी गाइडलाइंस के अनुसार इन क्रैचों में नियुक्तियां एसडीएम की अध्यक्षता में गठित कमेटी द्वारा की जाएंगी। यह कमेटी पूरी चयन प्रक्रिया की निगरानी करेगी और पात्र उम्मीदवारों का चयन करेगी।
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इन पदों के लिए वेतन भी निर्धारित किया गया है। क्रैच वर्कर को प्रति माह 6500 रुपए और हैल्पर को 3500 रुपए दिए जाएंगे।
योग्यता के तौर पर वर्कर के लिए 12वीं पास और हैल्पर के लिए 10वीं पास होना अनिवार्य रखा गया है।
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इस पूरी योजना का उद्देश्य केवल रोजगार देना ही नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण को मजबूत करना भी है। क्रैच सुविधा उपलब्ध होने से महिलाएं अपने बच्चों की चिंता किए बिना नौकरी और अन्य कार्यों में भाग ले सकेंगी। साथ ही इस योजना से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
महिला एवं बाल विकास विभाग के निदेशक डॉ. पंकज ललित ने बताया कि प्रदेश में 152 नए क्रैच स्थापित किए जा रहे हैं और इनमें जल्द ही वर्कर व हैल्पर की भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। विभाग का मानना है कि इस पहल से बच्चों की देखभाल की व्यवस्था और मजबूत होगी तथा महिलाओं को भी बड़ा सहारा मिलेगा।