#अपराध
January 20, 2026
हिमाचल में नागा साधु का अपमान! उप-प्रधान ने जबरन काटी जटाएं और दाढ़ी, तीन पर FIR
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही साधु की वीडियो
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सिरमौर। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिला में एक नागा साधु के साथ कथित दुर्व्यवहार का मामला सामने आया है। यह मामला अब गंभीर सामाजिक और प्रशासनिक बहस का विषय बनता जा रहा है। यह घटना न केवल कानून-व्यवस्था से जुड़ी है, बल्कि धार्मिक स्वतंत्रता, मानवीय गरिमा और पंचायत प्रतिनिधियों की जिम्मेदारी पर भी सीधे सवाल खड़े करती है।
यह मामला संगड़ाह क्षेत्र से सटे लगनू गांव का बताया जा रहा है। पीड़ित नागा साधु प्रवेश गिरी पिछले चार से पांच वर्षों से इसी गांव और आसपास के क्षेत्रों में रह रहा था। साधु का आरोप है कि 15 जनवरी को पंचायत उपप्रधान और कुछ ग्रामीणों ने उसके साथ बदसलूकी की, मारपीट की और जबरन उसकी दाढ़ी व जटाएं काट दीं।
साधु का कहना है कि यह कृत्य उसकी धार्मिक पहचान और साधना पर सीधा हमला है। घटना के दो दिन बाद, 17 जनवरी को, उसने संगड़ाह पुलिस थाना में शिकायत दर्ज करवाई। इसके बाद एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें कथित तौर पर साधु के साथ की गई जोर-जबरदस्ती और जटाएं काटे जाने की घटना दिखाई दे रही है। वीडियो के वायरल होते ही मामला पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया।
नागा साधु ने अपनी शिकायत में संगड़ाह पंचायत के उपप्रधान सत्तपाल तोमर, स्थानीय निवासी लेखराम और सुरेश के नाम स्पष्ट रूप से दर्ज करवाए हैं। साधु का आरोप है कि इन लोगों ने न सिर्फ उसे शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया, बल्कि उसकी धार्मिक आस्था से जुड़े स्वरूप को अपमानित करने का प्रयास किया।
नागा साधुओं के लिए दाढ़ी और जटाएं केवल बाहरी पहचान नहीं होतीं, बल्कि यह वर्षों की तपस्या, त्याग और धार्मिक जीवन का प्रतीक मानी जाती हैं। ऐसे में जबरन इन्हें काटा जाना साधु समाज के लिए गंभीर अपमान की श्रेणी में आता है।
हालांकि, दूसरी ओर कुछ ग्रामीणों का कहना है कि साधु शराब के नशे में गांव के घरों के बाहर जाकर हंगामा करता था और लोगों को परेशान करता था। ग्रामीणों के इन आरोपों के चलते अब यह मामला पूरी तरह पुलिस जांच के दायरे में है, जहां दोनों पक्षों के बयानों और सबूतों के आधार पर सच्चाई सामने आएगी।
संगड़ाह पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के तहत FIR दर्ज कर ली है। पुलिस ने पीड़ित नागा साधु के बयान कलमबद्ध कर लिए हैं और उस स्थान का निरीक्षण भी किया है, जहां कथित तौर पर घटना को अंजाम दिया गया।
पुलिस अब वीडियो फुटेज में नजर आ रहे लोगों और प्रत्यक्षदर्शियों को भी पूछताछ के लिए बुलाने की तैयारी कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से की जा रही है और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
पुलिस ने इस मामले में BNS की धारा 299, 122(2), 392(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया है। ये धाराएं धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने, आपराधिक धमकी, हिंसा और सामूहिक अपराध से जुड़ी मानी जाती हैं। कानून विशेषज्ञों के मुताबिक, इन धाराओं के तहत मामला गंभीर श्रेणी में आता है और दोष सिद्ध होने पर कड़ी सजा का प्रावधान है।
मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया, जब नागा साधु ने एक नया वीडियो बयान जारी किया। इसमें साधु ने आरोप लगाया कि पंचायत उपप्रधान की ओर से उस पर FIR वापस लेने का दबाव बनाया जा रहा है। साधु का यह भी कहना है कि उसे डराने के लिए उसके खिलाफ झूठा मामला दर्ज करवाया गया है।
वीडियो में साधु खुद को सनातन धर्म के अपमान का शिकार बताते हुए कह रहा है कि उसे जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। इन आरोपों के बाद प्रशासन और पुलिस पर मामले की निष्पक्ष और गहन जांच का दबाव और बढ़ गया है।
यह घटना ग्रामीण समाज में धार्मिक सहिष्णुता और पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। पंचायत उपप्रधान जैसे जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति पर इस तरह के आरोप लगना न केवल प्रशासनिक व्यवस्था, बल्कि सामाजिक ताने-बाने के लिए भी चिंता का विषय है।