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January 20, 2026
हिमाचल में पंचायत चुनावों की तैयारी शुरू : HC के आदेशों पर रखी गई अहम मीटिंग- आज होगा फैसला
आरक्षण रोस्टर लागू करने और वोटर लिस्ट पर होगा फैसला
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों को लेकर हलचल तेज हो गई है। हिमाचल हाईकोर्ट के सख्त निर्देशों के बाद स्टेट इलेक्शन कमीशन आज पंचायत चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए एक बेहद अहम और उच्च स्तरीय बैठक करने जा रहा है। इस बैठक को चुनावी प्रक्रिया की दिशा तय करने वाला निर्णायक कदम माना जा रहा है।
स्टेट इलेक्शन कमीशन ने इस बैठक के लिए राज्य के मुख्य सचिव संजय गुप्ता, अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व एवं आपदा प्रबंधन) केके पंत, प्रधान सचिव शहरी विकास देवेश कुमार और सचिव पंचायती राज सी. पालरासू को विशेष तौर पर तलब किया है। बैठक में पंचायत चुनाव से जुड़े सभी अहम पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की जाएगी, क्योंकि इसकी पूरी जानकारी और अनुपालन रिपोर्ट हाईकोर्ट को सौंपनी अनिवार्य है।
आज की इस उच्च स्तरीय बैठक में पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण रोस्टर लागू करने और वोटर लिस्ट को अंतिम रूप देने पर गहन चर्चा होगी। जिलों से प्राप्त प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक अधिकांश जिलों में आरक्षण रोस्टर तैयार किया जा चुका है, लेकिन अब इसे अंतिम मंजूरी दी जानी है। अगर कहीं संशोधन या फेरबदल की जरूरत होगी, तो उस पर भी आज दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं।
साथ ही जिन पंचायतों में पहले से तैयार वोटर लिस्ट में बदलाव आवश्यक है, उसे लेकर भी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए जाएंगे। इसके अलावा वोटर लिस्ट की प्रिंटिंग और वितरण की प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने पर भी बैठक में निर्णय लिया जा सकता है।
दरअसल, हिमाचल हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए पंचायत चुनाव हर हाल में 30 अप्रैल से पहले कराने के स्पष्ट आदेश दिए हैं। जस्टिस विवेक सिंह ठाकुर और जस्टिस रोमेश वर्मा की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि राज्य सरकार और इलेक्शन कमीशन आपसी समन्वय बनाकर चुनावी प्रक्रिया को समय पर पूरा करें। अदालत के इस आदेश के बाद चुनाव आयोग और सरकार दोनों पर दबाव बढ़ गया है।
प्रदेश की कुल 3577 पंचायतों में से 3548 पंचायतों में वोटर लिस्ट पहले ही तैयार की जा चुकी है। इन पंचायतों में कुल 55 लाख 19 हजार 709 मतदाता दर्ज हैं। इनमें सबसे अधिक मतदाता कांगड़ा जिले में हैं, जहां 13 लाख 17 हजार 390 वोटर सूचीबद्ध हैं। वहीं, लाहौल-स्पीति जिला सबसे कम मतदाताओं वाला जिला है, जहां कुल 25 हजार 602 मतदाता हैं।
मतदाता आंकड़ों के अनुसार, इस बार महिला मतदाताओं की संख्या 27 लाख 26 हजार 548 है, जबकि पुरुष मतदाता 27 लाख 93 हजार 161 हैं। इसके अलावा प्रदेश की 29 पंचायतों में अभी वोटर लिस्ट तैयार किया जाना शेष है, जिसे लेकर भी आज की बैठक में ठोस दिशा तय की जाएगी।
हाईकोर्ट के आदेशों के तहत सरकार को पंचायत और नगर निकाय चुनाव के लिए 28 फरवरी तक आरक्षण रोस्टर लागू करना अनिवार्य है। वहीं, इलेक्शन कमीशन को इसी समयसीमा में वोटर लिस्ट को पूरी तरह तैयार करना होगा। आयोग ने साफ संकेत दिए हैं कि इस बार किसी भी स्तर पर देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सूत्रों के मुताबिक, आज की बैठक में इलेक्शन कमीशन सरकार और जिला प्रशासन को कड़े दिशा-निर्देश जारी कर सकता है। पूर्व में कुछ जिलों के उपायुक्तों द्वारा आयोग के आदेशों की अनदेखी किए जाने की बात सामने आई थी, लेकिन अब हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बाद सभी अधिकारियों को आयोग के निर्देशों का पालन करना ही होगा।
प्रदेश की 3577 पंचायतों और 72 नगर निकायों में पंचायत चुनाव प्रस्तावित हैं। मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए माना जा रहा है कि अप्रैल के पहले सप्ताह में कभी भी पंचायत चुनाव का औपचारिक ऐलान किया जा सकता है। जैसे ही आरक्षण रोस्टर और वोटर लिस्ट को अंतिम रूप मिलेगा, चुनावी प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ेगी।
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प्रदेश में मौजूदा पंचायत प्रतिनिधियों का पांच साल का कार्यकाल 30 जनवरी को समाप्त हो रहा है। यदि तय समय पर चुनाव नहीं हो पाते हैं, तो नई पंचायतों के गठन तक ग्राम पंचायतें बिना चुने हुए जनप्रतिनिधियों के रहेंगी। इस दौरान सरकार द्वारा पंचायतों में प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए एडमिनिस्ट्रेटर नियुक्त किए जाएंगे।