#अपराध
March 9, 2026
हिमाचल में 200 करोड़ का घोटाला : महिला एजेंटों ने फंसाए लोग, CID जांच में हुए बड़े खुलासे
5000 एजेंटों को किय था कंपनी ने नियुक्त
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में सामने आए कथित निवेश घोटाले की जांच अब तेज हो गई है। जांच एजेंसियों के रडार पर आई वेलफेयर क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट कोऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड के जरिए प्रदेश के कई जिलों में बड़े स्तर पर लोगों से पैसा जुटाने का मामला सामने आया है।
शुरुआती जांच और शिकायतों के आधार पर यह आशंका जताई जा रही है कि सोसायटी ने निवेश योजनाओं के नाम पर करीब 200 करोड़ रुपये से अधिक की राशि लोगों से जमा करवाई हो सकती है।
सूत्रों के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क को चलाने के लिए करीब 5000 एजेंटों की नियुक्ति की गई थी। इनमें बड़ी संख्या महिलाओं की बताई जा रही है। अनुमान है कि इस नेटवर्क में शामिल एजेंटों में लगभग 80 प्रतिशत महिला एजेंट थीं, जिन्हें अलग-अलग क्षेत्रों में निवेशकों तक पहुंच बनाने की जिम्मेदारी दी गई थी।
जानकारी के मुताबिक, सोसायटी की ओर से लोगों को RD (रिकरिंग डिपॉजिट), FD (फिक्स्ड डिपॉजिट) और अन्य बचत योजनाओं के नाम पर निवेश के लिए प्रेरित किया जाता था। एजेंट ग्रामीण और शहरी इलाकों में घर-घर जाकर योजनाओं के बारे में जानकारी देते थे।
लोगों को बताया जाता था कि निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद उन्हें बैंक या अन्य वित्तीय संस्थानों से भी अधिक रिटर्न मिलेगा। आकर्षक लाभ और भरोसे के माहौल के कारण धीरे-धीरे बड़ी संख्या में लोग इन योजनाओं से जुड़ते चले गए और निवेश की रकम लगातार बढ़ती चली गई।
सूत्रों के मुताबिक सोसायटी ने अपने नेटवर्क को तेजी से विस्तार देने के लिए स्थानीय स्तर पर महिला एजेंटों को ज्यादा जोड़ा। कई एजेंट अपने ही गांव या आसपास के क्षेत्रों से थीं, जिसके कारण लोगों को उन पर जल्दी भरोसा हो जाता था।
ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक पहचान और रिश्तों का फायदा उठाकर लोगों को निवेश के लिए तैयार किया जाता था। कई परिवारों ने अपनी बचत, पेंशन की रकम और यहां तक कि कर्ज लेकर भी निवेश करने की बात सामने आ रही है।
बताया जा रहा है कि शुरुआत में सोसायटी ने कुछ निवेशकों को तय समय पर भुगतान भी किया। इससे लोगों का भरोसा और मजबूत हो गया और निवेशकों की संख्या बढ़ने लगी। मगर पिछले कुछ समय से कई निवेशकों को उनकी जमा राशि वापस नहीं मिल पाई।
जब उन्होंने एजेंटों और सोसायटी से जुड़े पदाधिकारियों से संपर्क किया तो उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला। कई मामलों में भुगतान को लेकर टालमटोल की शिकायतें सामने आईं।
पैसा वापस न मिलने से परेशान निवेशकों ने अलग-अलग स्तर पर शिकायतें दर्ज करानी शुरू कीं। कई लोगों ने पुलिस और प्रशासन से भी संपर्क किया। इन शिकायतों के आधार पर मामला अब CID की जांच तक पहुंच गया है।
जांच एजेंसियां अब पूरे नेटवर्क की कड़ी-दर-कड़ी पड़ताल कर रही हैं। यह पता लगाया जा रहा है कि सोसायटी ने किन-किन जिलों में अपनी गतिविधियां चलाईं, कितने लोगों से पैसा जमा करवाया गया और कुल राशि कितनी हो सकती है।
जांच के दौरान सोसायटी से जुड़े पदाधिकारियों, संचालकों और एजेंटों की भूमिका भी जांच के दायरे में लाई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।
इस कथित घोटाले के उजागर होने के बाद कई निवेशकों में चिंता का माहौल है। लोग अपनी जमा पूंजी वापस मिलने की उम्मीद में जांच की प्रगति पर नजर बनाए हुए हैं। वहीं जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या इस नेटवर्क के पीछे किसी बड़े संगठित गिरोह की भूमिका रही है या नहीं।
फिलहाल, पूरा मामला जांच के अधीन है और आने वाले दिनों में CID की जांच से कई और तथ्य सामने आ सकते हैं। प्रदेशभर के निवेशकों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि उनकी मेहनत की कमाई वापस मिल पाएगी या नहीं।