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May 27, 2025

हिमाचल: सरकारी स्कूल के शिक्षक ने बेरहमी से पी*ट दिया 9वीं का छात्र, शरीर पर पड़ गए निशान

छात्र के शरीर पर बने निशान शिक्षक की करतूत कर रहे ब्यां

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govt School Teacher student

नाहन। हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिला से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक सरकारी स्कूल में एक शिक्षक ने कक्षा में शोर मचाने पर एक छात्र की बेरहमी से पिटाई कर दी। शिक्षक की पिटाई से छात्र के शरीर पर गहरे निशान बन गए हैं। पिटाई के चलते पीड़ित छात्र की बाजू, टांग और पीठ पर चोट के निशान पड़ गए हैं, जिसके चलते उसे सिविल अस्पताल पांवटा साहिब में भर्ती करवाना पड़ा। यह घटना आज मंगलवार की बताई जा रही है। छात्र के पिता ने इसकी शिकायत पुलिस थाना में दर्ज करवाई है और आरोपी शिक्षक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। 

9वीं के छात्र की शिक्षक ने बेरहमी से की पिटाई

दरअसल यह मामला सिरमौर जिला के सरकारी मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल अंबोया से सामने आया है। यहां 9वीं कक्षा में पढ़ने वाले 13 वर्षीय छात्र निखिल पुत्र तारा चंद वार्ड नंबर दो अंबोया जिला सिरमौर के साथ शिक्षक ने बेरहमी से पिटाई कर दी है। इस मारपीट से छात्र के बाजू और टांग पर चोट के गहरे निशान दिख रहे हैं। मंगलवार को स्कूल में घटित हुई इस घटना की जानकारी छात्र ने घर जाकर अपने परिजनों को दी। छात्र के शरीर पर पड़े गहरे निशानों को देखते हुए उसे अस्पताल ले जाना पड़ा।

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पिता ने थाना में दर्ज करवाई शिकायत

छात्र ने अपने पिता तारा चंद को बताया कि स्कूल में शिक्षक अनिल कुमार ने शोर मचाने पर उसके साथ मारपीट की। जिससे उसे चोटें लग गईं और उसे काफी दर्द भी हुआ। बेटे की बात सुन कर पिता तारा चंद ने पुरुवाला पुलिस थाना में पहुंच कर शिक्षक के खिलाफ मामला दर्ज करवाया। पिता ने अपनी शिकायत में कहा कि स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए। स्कूल में बच्चों के साथ की गई इस तरह की हिंसा किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पिता तारा चंद और स्थानीय लोगों में इस घटना को लेकर काफी रोष है और सभी आरोपी शिक्षक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

पिता ने लगाएं गंभीर आरोप

पीड़ित छात्र के पिता का आरोप है कि आरोपी शिक्षक इससे पहले भी इस तरह के कृत्यों को अंजाम दे चुका है। बावजूद इसके ना तो स्कूल प्रशासन और ना ही शिक्षा विभाग ने उस शिक्षक पर कोई एक्शन लिया। शिक्षक की पिटाई के बाद छात्र के मन में डर बैठ गया है और अब वह स्कूल जाने से भी डर रहा है।

 

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क्या बोले स्कूल प्रधानाचार्य

वहीं इस मामले में स्कूल के प्रधानाचार्य डॉ नरेंद्र नेगी ने बताया कि उन्हें यह जानकारी बच्चे के पिता द्वारा दी गई शिकायत के माध्यम से मिली है। फिलहाल वे किसी आधिकारिक बैठक के चलते स्कूल में उपस्थित नहीं हैं, लेकिन उन्होंने छात्र और उसके पिता को बुधवार को स्कूल बुलाकर मामले की पूरी जांच करने की बात कही है।

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हिमाचल में शारीरिक दंड पर सख्त प्रतिबंध

बता दें कि हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग द्वारा सभी शासकीय एवं निजी विद्यालयों में छात्रों को शारीरिक दंड देने पर सख्त रोक लगाई गई है। कोर्पोरल पनिशमेंट न केवल नैतिक रूप से अनुचित है, बल्कि यह राइट टू एजुकेशन एक्टए 2009 और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015 के तहत दंडनीय अपराध भी है। शिक्षा विभाग की गाइडलाइन के अनुसार, स्कूलों में शिक्षकों को छात्रों पर किसी भी प्रकार का मानसिक या शारीरिक अत्याचार करने की अनुमति नहीं है।

 

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यदि कोई शिक्षक इस प्रकार की अनुशासनहीनता करता है, तो उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ.साथ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है, जिसमें निलंबन, एफआईआर दर्ज होना, और शिक्षण कार्य से निष्कासन जैसे कठोर कदम शामिल हैं।

अभिभावकों और स्थानीय समुदाय की प्रतिक्रिया

पीड़ित छात्र के पिता तारा चंद ने शिक्षक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि स्कूल बच्चों के लिए एक सुरक्षित स्थान होना चाहिए, न कि डर का कारण। उन्होंने यह भी अपील की कि ऐसे मामलों को गंभीरता से लिया जाए, ताकि भविष्य में किसी और बच्चे के साथ इस तरह की अमानवीय घटना न हो। वहीं कई ग्रामीणों ने आरोपी शिक्षक को निलंबित करने की भी मांग की है।

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