#अपराध
October 28, 2025
हिमाचल: शिक्षिका ने कांटेदार झाड़ियों से पी*टा मासूम, गिड़गिड़ाता रहा बच्चा; नहीं पसीजा टीचर का दिल
सरकारी स्कूल की शिक्षिका ने नं*गा कर बेरहमी से पीटा मासूम छात्र
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शिमला। हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के रोहडू क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। शिक्षा के मंदिर में एक महिला शिक्षिका ने अपनी क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए मासूम बच्चे को कांटेदार झाड़ियों से नंगा कर बेरहमी से पीट दिया। बच्चे के रोते-बिलखते चेहरे और उसकी मिन्नतों को नजरअंदाज कर शिक्षिका लगातार उस पर झाड़ियां बरसाती रही। यह पूरा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही लोग गुस्से में आ गए और सरकार व शिक्षा विभाग से सख्त कार्रवाई की मांग करने लगे।
घटना रोहडू ब्लॉक के सरकारी प्राथमिक विद्यालय गवाना की है। स्कूल की हेड टीचर रीना राठौर ने एक छोटे बच्चे के पहले कपड़े उतरवाए, फिर कांटेदार झाड़ी से इतनी बेरहमी से पीटा कि उसका शरीर जख्मी हो गया। वीडियो में देखा जा सकता है कि बच्चा रोते हुए मैडम माफ कर दो, दोबारा नहीं करूंगा, कहता रहा, लेकिन शिक्षिका के दिल में दया की एक बूंद तक नहीं आई। वह लगातार झाड़ी से बच्चे को पीटती रही। बच्चे का दर्द और करुणा की पुकार भी रीना राठौर की निर्दयता को रोक न सकी।
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जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ पूरे प्रदेश में आक्रोश फैल गया। लोगों ने इस घटना को शिक्षा जगत पर कलंक करार दिया। शिक्षा विभाग ने मामले का संज्ञान लेते हुए आरोपी शिक्षिका को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया और उनका मुख्यालय प्रारंभिक शिक्षा कार्यालय, सराहन निर्धारित किया गया है।
शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि शिक्षिका का यह कृत्य न केवल नैतिक रूप से निंदनीय है, बल्कि यह कानूनी रूप से भी गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। यह मामला बच्चों को शारीरिक दंड से रोकने वाले आरटीई अधिनियम, 2009 की धारा 17 और शिक्षा विभाग के दिशा-निर्देशों का सीधा उल्लंघन है। साथ ही, यह व्यवहार केंद्रीय सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1964 की धारा 3(1) के तहत गंभीर अनुशासनहीनता और दुर्व्यवहार का उदाहरण है। विभाग ने इस घटना पर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी परिस्थिति में बच्चों पर हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने इस घटना की कड़ी निंदा की है। ग्रामीणों ने कहा कि जिस शिक्षिका पर बच्चों को संस्कार और शिक्षा देने की जिम्मेदारी है, वही अगर हिंसा की प्रतीक बन जाए, तो यह समाज के लिए शर्मनाक है। लोगों का कहना है कि बच्चे को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करने वाली शिक्षिका को केवल निलंबित करना पर्याप्त नहीं है, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई और गिरफ्तारी होनी चाहिए। एक ग्रामीण ने कहा कि हमने अपने बच्चों को स्कूल पढ़ने भेजा है, न कि उन्हें यातना झेलने के लिए। यह शिक्षक नहीं, हैवानियत है।
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यह घटना न केवल एक शिक्षिका की निर्दयता का मामला है, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र की निगरानी प्रणाली पर सवाल खड़े करती है। जहां एक ओर सरकार बाल संरक्षण और सुरक्षित स्कूल वातावरण की बात करती है, वहीं दूसरी ओर सरकारी स्कूलों में इस तरह की घटनाएं इन दावों की पोल खोलती हैं।
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शिक्षा विभाग ने इस घटना के बाद सभी जिलों के स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि किसी भी शिक्षक द्वारा बच्चों के साथ हिंसा, अपमान या डराने-धमकाने की शिकायत मिली तो तुरंत निलंबन और आपराधिक कार्रवाई की जाएगी।