#अपराध
January 3, 2026
धर्मशाला छात्रा मौ*त मामला दिल्ली पहुंचा- 36 घंटों में नहीं हुई कोई गिरफ्तारी, पुलिस घर- कॉलेज छान रही
पोस्टमार्टम नहीं, पुलिस के सामने सबूत जुटाना चुनौती
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कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला स्थित गवर्नमेंट कॉलेज की पूर्व छात्रा पल्लवी की मौत से जुड़े रैगिंग और मानसिक उत्पीड़न के मामले ने अब राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान खींच लिया है। छात्रा की मौत के बाद उठे सवालों, वायरल वीडियो बयानों और परिजनों के गंभीर आरोपों के बीच अब विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने इस पूरे प्रकरण में हस्तक्षेप किया है।
UGC ने साफ कर दिया है कि यह मामला केवल एक कॉलेज या एक छात्रा तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा और शिकायत निवारण व्यवस्था की सच्चाई को परखने की कसौटी है।
UGC ने धर्मशाला कॉलेज की पूर्व छात्रा पल्लवी की मौत और उससे जुड़े रैगिंग आरोपों को गंभीर मानते हुए फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी गठित करने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
UGC यह भी जांचेगा कि कॉलेज में एंटी-रैगिंग सेल, शिकायत निवारण तंत्र और छात्रों की सुरक्षा से जुड़े नियम वास्तव में कितने प्रभावी हैं और क्या इन्हें सही ढंग से लागू किया गया था या नहीं।
मृतक छात्रा के परिजनों की शिकायत पर भूगोल के प्रोफेसर अशोक कुमार सहित चार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। इन पर रैगिंग और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और सभी आरोपियों से पूछताछ की तैयारी की जा रही है।
DSP निशा कुमारी के नेतृत्व में पुलिस टीम देर रात तक छात्रा के घर पर जांच करती रही। हालांकि, छात्रा का पोस्टमार्टम नहीं हुआ और अंतिम संस्कार पहले ही किया जा चुका है, ऐसे में पुलिस के लिए भौतिक सबूत जुटाना एक बड़ी चुनौती बन गया है। इसी कारण अब जांच का पूरा फोकस तकनीकी और डिजिटल साक्ष्यों पर टिका है।
UGC की दखल के बाद अब यह मामला सिर्फ एक FIR या पुलिस जांच तक सीमित नहीं रहा। सवाल कॉलेज प्रशासन की भूमिका, शिकायतों पर कार्रवाई में देरी और छात्रों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठ रहे हैं। आने वाले दिनों में फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट तय करेगी कि यह केवल एक व्यक्तिगत त्रासदी थी या फिर सिस्टम की गंभीर चूक, जिसकी कीमत एक छात्रा को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।