#अपराध
August 28, 2025
हिमाचल: महिला ने पति को छोड़ा-प्रेमी से की शादी, फिर दो मासूम बच्चियों की सांसें छीन लौटी वापस
सत्र न्यायालय ने महिला को सुनाई कठोर आजीवन कारावास की सजा
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मंडी। हिमाचल प्रदेश में इंसानियत को झकझोर देने वाला एक ऐसा मामला सामने आया था जिसने मां जैसे पवित्र रिश्ते को कलंकित कर दिया था। मंडी शहर की एक महिला ने अपने स्वार्थ और पुराने रिश्ते की खातिर अपनी ही करीब डेढ़ महीने की दो जुड़वां बेटियों को बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया। इस कलयुगी मां को मंडी की सत्र न्यायालय (पारिवारिक कोर्ट) ने दोषी करार देते हुए कठोर आजीवन कारावास और 10ए000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है।
यह हृदयविदारक घटना 19 सितंबर 2021 को सामने आई थी, जब नीलकंठ अस्पताल के पास एक खड्ड में दो नवजात बच्चियों के शव मिलने की सूचना पुलिस को दी गई। पुलिस जांच में सामने आया कि यह मासूम बच्चियां मंडी की ही रहने वाली रोहिना उर्फ हिना की संतान थीं, जिनका जन्म नौ अगस्त 2021 को पंजाब के एक सरकारी अस्पताल में हुआ था।
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मूल रूप से मंडी शहर के सुहड़ा मोहल्ले की रहने वाली रोहिना ने पहले अपने पति सौरभ को छोड़ दिया और पंजाब के एक युवक से प्रेम विवाह किया। इसी रिश्ते से उसे जुड़वां बेटियां हुईं। लेकिन कुछ समय बाद उसे पुराने पति की याद सताने लगी और वह दोबारा सौरभ के पास लौटना चाहती थी। मगर सौरभ ने साफ कह दिया था कि वह बच्चों के साथ उसे स्वीकार नहीं करेगा।
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इसी कारण रोहिना ने अपनी दोनों मासूम बच्चियों को रास्ते से हटाने की योजना बनाई। 17-18 सितंबर 2021 की रात वह उन्हें लेकर सकोड़ी पुल के पास गई और करीब 10 फीट ऊंचे डंगे से नीचे खड्ड में फेंक दिया, जिससे दोनों बच्चियों की सिर में गंभीर चोट लगने से मौके पर ही मौत हो गई।
पुलिस को इस घटना की जानकारी चपरासी पंकज कुमार से मिली] जिसने सकोड़ी पुल के नीचे दो नवजात शव देखे थे। पुलिस जांच में शामिल एसएफएसएल जुन्गा द्वारा की गई डीएनए जांच से पुष्टि हुई कि मृत बच्चियां रोहिना की ही थीं। सीसीटीवी फुटेज में एक महिला को बच्चों के साथ पुल की ओर जाते और फिर अकेले लौटते हुए देखा गया। हालांकि चेहरा स्पष्ट नहीं था] लेकिन अन्य साक्ष्यों के साथ अभियोजन पक्ष ने इस फुटेज को महत्वपूर्ण कड़ी माना। इसके अलावा एक ऑटो चालक और एक बस कंडक्टर ने रोहिना की मंडी तक की यात्रा की पुष्टि की।
पुलिस हिरासत में रोहिना ने स्वीकार किया कि उसने ही बच्चियों को फेंका था। उसने घटनास्थल की पहचान भी करवाई। दो महिला चिकित्सकों ने पुष्टि की कि उसने सवा महीने पहले ही जुड़वां बच्चों को जन्म दिया था। इतना ही नहीं, पंजाब में रहते हुए भी वह पहले बच्चों को नुकसान पहुंचाने की धमकी दे चुकी थी।
रोहिना के वकील ने अदालत में तर्क दिया कि कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं था, सीसीटीवी स्पष्ट नहीं था, और उसे उसकी ननद करुणा द्वारा फंसाया गया है। लेकिन अदालत ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि डीएनए, पोस्टमार्टम, सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्य यह साबित करने के लिए पर्याप्त हैं कि यह केवल परित्याग नहीं, बल्कि सुनियोजित हत्या थी।
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न्यायालय ने स्पष्ट रूप से कहा कि बच्चों को जानबूझकर ऊंचाई से फेंकना क्रूर और अमानवीय कृत्य है, जिसे केवल "मां" नाम की कोई महिला ही अंजाम दे सकती है, जिसने अपने अंदर की ममता को मरने दिया और एक रिश्ते के लिए दो मासूमों की बलि चढ़ा दी। न्यायालय ने इसे अत्यंत जघन्य अपराध मानते हुए रोहिना को कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
यह मामला न केवल कानून की दृष्टि से, बल्कि सामाजिक और मानवीय दृष्टिकोण से भी अत्यंत चौंकाने वाला है। एक मां द्वारा अपनी ही बेटियों की हत्या, वह भी सिर्फ इसलिए क्योंकि दूसरा व्यक्ति उन्हें स्वीकार करने को तैयार नहीं था — यह घटना आज के समाज में रिश्तों की गहराई और गिरते नैतिक मूल्यों पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करती है।