#हादसा
August 28, 2025
हिमाचल : बेटे की आंखों के सामने मां ने तोड़ा दम, देह घर तक पहुंचाने को भटकना पड़ा रातभर
परिजनों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया
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कुल्लू। हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश के कारण कई हाईवे और सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई हैं। कुछ जगहों पर उफनती नदियों ने सड़कों को लील लिया है। सड़के ना होने के कारण लोगों को कई परेशानियों का सामना करना पड़ा रहा है। जबकि, कुछ लोगों की तो जान भी जा रही है।
ताजा मामला कुल्लू जिले से सामने आया है- जहां कुल्लू-मंडी राष्ट्रीय राजमार्ग के धंसने और वैकल्पिक मार्गों के जर्जर हालात ने एक परिवार से उसकी सबसे बड़ी पूंजी छीन ली। यहां एक बेटे की आंखों के सामने उसकी मां ने दम तोड़ दिया।
दरअसल, कल देर रात करीब 2 बजे बंजार निवासी नरेश पंडित की मां की तबीयत अचानक बिगड़ गई। ऐसे में परिजन उन्हें उपचार के लिए अस्पताल ले जाने के लिए घर से निकले। मगर सड़कों बंद होने के कारण एंबुलेंस रास्ते में ही अटक गई।
एंबुलेंस को वहां से निकालने का कोई रास्ता नहीं मिल पाया। ऐसे में नरेश की मां को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचाय जा सका और उन्होंने घर से कुछ दूरी पर ही दम तोड़ दिया। नरेश ने बताया कि उनकी मां ने उनकी आंखों के सामने अंतिम सांस ली।
नरेश पंडित ने रोते हुए कहा मैंने मां को बचाने की हर कोशिश की। विधायक को फोन किया, प्रशासन से मदद मांगी, लेकिन कैंची मोड़ पर सड़क धंसी होने से कोई रास्ता ही नहीं था। एंबुलेंस बार-बार जगह-जगह रुकती रही और मेरी मां जिंदगी की जंग हार गई।"
नरेश ने बताया कि रात के 2 बजे से लेकर सुबह तक वलो अपनी मां की देह के साथ बीच सड़क में फंसे रहे। इतना बेबस हो गए थे कि वो मां के शव को घर नहीं पहुंचा पा रहे थे। शव को घऱ पहुंचाने के लिए रास्ते में कई बार उन्हें एंबुलेंस बदलनी पड़ी- क्योंकि धंसे और टूटे मार्ग शववाहन को गुजरने नहीं दे रहे थे।
परिजनों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि हाईवे बंद होने की जानकारी पहले से थी, लेकिन समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई। यदि रात को ही मार्ग बहाल किया जाता या एंबुलेंस को सुरक्षित निकालने की व्यवस्था होती, तो शायद नरेश की मां को बचाया जा सकता था।
गांववासियों ने चेतावनी दी है कि अगर प्रशासन ने जल्द कार्रवाई कर प्रभावित सड़कों को दुरुस्त नहीं किया, तो लोग आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। स्थानीय लोग कह रहे हैं कि यह सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि लचर सिस्टम का आईना है, और यदि लापरवाही जारी रही तो ऐसे हादसे किसी और परिवार की खुशियां भी निगल सकते हैं।