#अपराध
July 30, 2025
हिमाचल: बीबीए के छात्र ने NIT हॉस्टल में त्यागे प्राण, कंपार्टमेंट ना टूटने से था परेशान
हिमाचली युवक एनआईटी जालंधर में कर रहा था बीबीए, कमरे में उठाया गलत कदम
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बिलासपुर/जालंधर। आज की प्रतियोगिताओं से भरी जिंदगी में जब कुछ छात्र पीछे रह जाते हैं, तो वह मानसिक रूप से परेशान हो जाते हैं। मानसिक रूप से परेशान होने पर कई छात्र आत्महत्या जैसा खौफनाक कदम भी उठा लेते हैं। ऐसा ही कुछ हिमाचल के बिलासपुर जिला के एक युवक ने किया है। इस छात्र ने भी मानसिक तनाव के चलते आत्महत्या जैसा खौफनाक कदम उठा लिया।
दरअसल मामला जालंधर का है। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान एनआईटी जालंधर एक बार फिर दर्दनाक घटना का गवाह बना है। इस संस्थान के एक छात्र ने मानसिक तनाव के चलते अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली है। आत्महत्या करने वाला छात्र हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले का रहने वाला 25 वर्षीय रोहित चंदेल था। बताया जा रहा है कि वह बीबीए में बार.बार फेल होने के कारण गहरे अवसाद में था।
बड़ी बात यह है कि एनआईटी जालंधर में पिछले पांच माह में यह दूसरी बार हुआ है, जब संस्थान के छात्र ने आत्महत्या की हो। इससे पहले भी करीब पांच माह पहले एक छात्र नेइमारत से छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली थी। बड़ी बात यह है कि पांच माह में आत्महत्या करने वाले दोनों छात्रों के पिता एनआईटी में ही जॉब करते हैं।
आत्महत्या करने वाले 25 वर्षीय रोहित के पिता जसवंत चंदेल स्वयं एनआईटी जालंधर में पिछले 25 वर्षों से कार्यरत हैं। पुलिस के मुताबिक सोमवार देर शाम जब उसे गंभीर हालत में जालंधर के सेक्रेड हार्ट अस्पताल ले जाया गया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अस्पताल से थाना मकसूदां को आत्महत्या की सूचना दी गई थी। जिसके बाद पुलिस ने धारा 174 के तहत कार्रवाई करते हुए शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया।
परिवार के अनुसार रोहित बीबीए में कंपार्टमेंट की समस्याओं से जूझ रहा था और पिछले कई महीनों से मानसिक रूप से परेशान था। पढ़ाई में लगातार आ रही विफलताओं ने उसके आत्मविश्वास को तोड़ दिया था। इस मानसिक दबाव के चलते उसने अपने कमरे में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजनों ने इस मामले में किसी के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं करवाई है।
थाना मकसूदां के एएसआई रजिंदर सिंह ने बताया उन्हें सेक्रेड हार्ट अस्पताल से आत्महत्या की सूचना मिली थी। मृतक की पहचान रोहित चंदेल के रूप में हुई है। परिवार ने किसी तरह की शिकायत नहीं की है और फिलहाल धारा 174 के तहत ही कार्रवाई की गई है। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। वहीं दूसरी तरफ जवान बेटे की मौत से परिवार को गहरा सदमा लगा है।
बता दें कि यह घटना एनआईटी में पिछले पांच महीनों में आत्महत्या का दूसरा मामला है। इससे पहले फरवरी में एक और प्रोफेसर के बेटे रजत ने संस्थान की एक इमारत से छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली थी। रजत कुछ समय से मानसिक रूप से परेशान था और उसका इलाज चल रहा था। यह दोनों घटनाएं इस बात की ओर इशारा करती हैं कि युवा छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य की ओर संस्थानों को विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
लगातार हो रही आत्महत्याएं न केवल शैक्षणिक संस्थानों की मानसिक स्वास्थ्य के प्रति उदासीनता को उजागर करती हैं, बल्कि शिक्षा प्रणाली की कठोरता और प्रतिस्पर्धा पर भी सवाल खड़े करती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि छात्रों पर अत्यधिक अकादमिक दबाव और असफलता के डर के कारण वे मानसिक रूप से टूट जाते हैं। ऐसे में जरूरी है कि कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में नियमित काउंसलिंग, तनाव प्रबंधन और सहयोगी वातावरण की व्यवस्था हो।