#राजनीति
July 30, 2025
सुक्खू सरकार ने जलरक्षकों को दिया प्रमोशन का तोहफा, 1386 को बनाया पंप अटेंडेंट
हिमाचल में 6000 जल रक्षक दे रहे सेवाएं
शेयर करें:
शिमला। सुक्खू सरकार ने जल शक्ति विभाग के जल रक्षकों को बड़ा तोहफा दिया है। सुक्खू सरकार ने 1386 जल रक्षकों की प्रमोशन कर दी है। जल शक्ति विभाग में 12 साल का सेवाकाल पूरा कर चुके जल रक्षकों को पंप अटेंडेंट बना दिया गया है।
हिमाचल सरकार ने 31 दिसंबर, 2024 तक 12 साल या उससे ज्यादा की सेवा अविध पूरी कर चुके जल रक्षकों को पंप अटेंडेंट के रूप में नियुक्त किए जाने की मंंजूरी दे दी है। यह फैसला सुक्खू कैबिनेट की बैठक में दूसरे दिन लिया गया है।
अब ये कर्मचारी हिमाचल सरकार की ओर से तय वेतन और भत्तों का लाभ उठा पाएंगे। विदित रहे कि वर्तमान में हिमाचल में 6 हजार जल रक्षक सेवाएं दे रहे हैं- जिन्हें 5400 रुपए मानदेय मिलता है। इन जल रक्षकों को 60 फीसदी भुगतान जल शक्ति विभाग और 40 फीसदी भुगतान पंचायत कर रही है।
हालांकि, जल रक्षक इन कोटे को खत्म करने की मांग कर रहे हैं। जल रक्षक खुद को जल शक्ति विभाग के अधीन करने की मांग कर रहे हैं। जल रक्षकों का कहना है कि जल रक्षकों के कार्यकाल की अवधि को कम करना चाहिए। जल रक्षकों को प्रमोशन के लिए 12 साल का इंतजार करना पड़ा रहा है।
इस समय हिमाचल प्रदेश भीषण मानसूनी आपदाओं से जूझ रहा है, जिससे प्रदेश में अब तक 1382 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो चुका है। अकेले जल शक्ति विभाग को ही करीब 488 करोड़ रुपये की क्षति हुई है। बाढ़ और भूस्खलन के चलते प्रदेश की सैकड़ों पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं। जिनमें से अभी भी 221 योजनाएं बाधित हैं। जिला मंडी की स्थिति सबसे गंभीर हैए जहां 65 पेयजल योजनाएं पूरी तरह ठप पड़ी हैं।
ऐसे कठिन समय में जल रक्षक लगातार फील्ड में रहकर पेयजल आपूर्ति को बहाल करने में जुटे हैं। उनकी भूमिका न केवल तकनीकी रूप से महत्वपूर्ण रही है बल्कि आपदा के समय लोगों को राहत देने में भी अहम रही है। इसी समर्पण को देखते हुए सरकार ने उनके प्रमोशन का फैसला लिया है।
जल रक्षक लंबे समय से अपनी सेवाओं को स्थायी करने और उच्च पदों पर पदोन्नति की मांग कर रहे थे। आपदा के समय उनके काम ने सरकार को यह सोचने पर मजबूर किया कि इन जमीनी स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों को उचित सम्मान और स्थायित्व मिलना चाहिए।