#अपराध
May 2, 2025
विमल नेगी केस: हरिकेश मीणा को 15 मई तक गिरफ्तारी से राहत, हिमाचल हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत
SIT की स्टेटस रिपोर्ट पढ़ने के बाद कोर्ट का फैसला
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शिमला। हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPPCL) के चीफ इंजीनियर विमल नेगी की मौत के मामले में कंपनी के एमडी हरिकेश मीणा को शुक्रवार को अग्रिम जमानत मिल गई। उन्होंने हिमाचल हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी। इससे पहले कंपनी के डायरेक्टर फाइनेंस देशराज को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत मिली थी। अदालतों के इस फैसले से अब दोनों अधिकारियों को गिरफ्तारी से राहत मिल गई है।
इस मामले की जांच एसआईटी कर रही है। SIT ने शुक्रवार को कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट पेश की। इस रिपोर्ट को देखने के बाद हाईकोर्ट ने मीणा को 15 मई तक अंतरिम जमानत दे दी। अब इस केस की सुनवाई 15 मई को दोबारा होगी। पिछली सुनवाई में भी अदालत ने मीणा की गिरफ्तारी पर रोक लगाई थी।
आपको बता दें कि विमल नेगी के परिजनों ने हरिकेश मीणा, शिवम प्रताप सिंह और डायरेक्टर देशराज पर मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं। विमल नेगी इस साल 10 मार्च को दफ्तर से घर जाने के बजाय टैक्सी में बिलासपुर चले गए थे। 18 मार्च को गोविंद सागर झील में उनका शव मिला था। सूत्रों के अनुसार, SIT जांच की अगुवाई कर रहे एसीएस ओंकार शर्मा की अभी तक की जांच में परिजनों के ज्यादातर आरोपों को सही पाया गया है।
आपको बता दें कि इससे पहले विमल नेगी की पत्नी किरण ने अपने पति की मौत की जांच में सुक्खू सरकार पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने इस मामले की सीबीआई जांच की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका भी दायर की है। विमल नेगी की पत्नी ने कंपनी के डायरेक्टर फायनेंस देशराज की अग्रिम जमानत याचिका को लेकर भी आरोप लगाए थे कि सुप्रीम कोर्ट में हिमाचल सरकार के वकील की गैरमौजूदगी के कारण देशराज को अग्रिम जमानत मिली, क्योंकि उसकी याचिका का विरोध करने वाला कोई नहीं था।
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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सुक्खू सरकार के आदेश पर गठित SIT को 20 मई तक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने की मोहलत दी है। उसके बाद कोर्ट तय करेगा कि मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जाए या फिर शिमला पुलिस ही अभी की तरह जांच करती रहेगी।
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एसीएस ओंकार शर्मा ने सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू को 70 पेज की सीलबंद जांच रिपोर्ट सौंपी है। सूत्रों का कहना है कि इस जांच रिपोर्ट में भी विमल नेगी के परिजनों के आरोपों को सही पाया गया है। हलांकि, सरकार ने SIT की इस रिपोर्ट को मामला कोर्ट में पेंडिंग होने के कारण सार्वजनिक नहीं किया है।