#अपराध
January 24, 2026
हिमाचल पुलिस कांस्टेबल को चिट्टा बेचना पड़ा महंगा : हुआ सस्पेंड, दोस्तों संग निकला था सप्लाई करने
11 पुलिस कर्मी पहले ही किए जा चुके हैं बर्खास्त
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शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार की नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के बीच शिमला से एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। राजधानी शिमला में तैनात ट्रैफिक पुलिस के एक कांस्टेबल को चिट्टा (हेरोइन) के साथ गिरफ्तार किए जाने के बाद तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है।
इस संबंध में पुलिस मुख्यालय की ओर से औपचारिक आदेश जारी कर दिए गए हैं। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है, जब राज्य सरकार नशा तस्करी के खिलाफ सख्त रुख अपनाए हुए है। पुलिस मुख्यालय के इस फैसलाे की लोग काफी सराहना कर रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि इसी महीने अब तक 11 अन्य पुलिसकर्मियों को भी चिट्टा तस्करी से जुड़े मामलों में सेवा से बाहर किया जा चुका है, जिससे यह साफ हो गया है कि सरकार और पुलिस विभाग अपने ही महकमे में मौजूद नशा तस्करों पर कोई नरमी नहीं बरत रहे हैं।
मामले के अनुसार, 22 जनवरी की तड़के करीब 2:30 बजे शिमला के शोघी बैरियर पर पुलिस द्वारा नियमित नाकाबंदी और वाहन जांच की जा रही थी। इसी दौरान चंडीगढ़ से शिमला की ओर आ रहे एक वाहन को संदेह के आधार पर रोका गया।
वाहन में राहुल कुमार, गौरव और विकास सवार थे। पुलिस ने नियमानुसार वाहन और आरोपियों की तलाशी ली। तलाशी के दौरान तीनों के कब्जे से कुल 9.480 ग्राम चिट्टा बरामद किया गया, जिसे पुलिस ने मौके पर जब्त कर लिया।
जांच को आगे बढ़ाने पर एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि राहुल कुमार हिमाचल प्रदेश पुलिस में कांस्टेबल के पद पर कार्यरत था और शिमला में ट्रैफिक पुलिस में तैनात था। नशे के खिलाफ अभियान चला रही पुलिस में ही तैनात एक कर्मी का इस तरह चिट्टा तस्करी में लिप्त पाया जाना विभाग के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया।
पुलिस ने मामले में NDPS अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई करते हुए राहुल कुमार और गौरव को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, मामले में अन्य कड़ियों की भी गहनता से जांच की जा रही है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने आरोपी कांस्टेबल राहुल कुमार को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 311(2)(बी) के तहत तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है। यह प्रावधान ऐसे मामलों में लागू किया जाता है, जहां कर्मचारी का आचरण सेवा और जनहित के लिए गंभीर खतरा माना जाता है और नियमित विभागीय जांच को भी आवश्यक नहीं समझा जाता।
इस कार्रवाई के जरिए सरकार और पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि नशे के खिलाफ लड़ाई में कोई भी पद, वर्दी या रुतबा आड़े नहीं आएगा। चाहे आरोपी आम नागरिक हो या पुलिस का कर्मचारी- कानून सभी के लिए बराबर है। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि आरोपी कांस्टेबल किसी बड़े चिट्टा तस्करी गिरोह से तो नहीं जुड़ा था।
आपको बता दें कि शिमला पुलिस द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान में अब तक कुल 28 सरकारी कर्मचारियों को चिट्टे से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें डॉक्टर, बैंक अधिकारी, पुलिसकर्मी और शिक्षा विभाग के कर्मचारी तक शामिल हैं। पुलिस इनमें से 27 कर्मचारियों की सूची प्रदेश सरकार को भेज चुकी है, ताकि विभागीय स्तर पर भी कार्रवाई की जा सके।