#अपराध
December 12, 2025
हिमाचल में एक और बड़ा घोटाला : 900 करोड़ के फर्जी बिल बनाए, GST चोरी करने की भी साजिश
बिजली बिल, पैन कार्ड, मोबाइल नंबर सब बनाया फर्जी
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सोलन। हिमाचल प्रदेश में GST चोरी का अब तक का सबसे बड़ा खुलासा हुआ है। राज्य कर एवं आबकारी विभाग के साउथ जोन GST विंग परवाणू की टीम ने 941.39 करोड़ रुपये के फर्जी बिल और कर धोखाधड़ी का पर्दाफाश किया है।
इसके साथ ही टीम ने लगभग 170 करोड़ रुपये की संभावित जीएसटी हानि को रोकने में भी सफलता हासिल की है। यह कार्रवाई विभाग के लिए इसलिए भी अहम रही क्योंकि पहली बार AI टूल्स की मदद से की जा रही डिजिटल पहचान छेड़छाड़ का इस्तेमाल इतने बड़े पैमाने पर सामने आया है।
जांच के दौरान यह सामने आया कि फर्जी टैक्सपेयर्स ने AI टूल्स की मदद से बिजली बिल, आधार कार्ड, पैन कार्ड, किराया समझौता, सहमति पत्र और मोबाइल नंबर में बदलाव करके सिस्टम में अपलोड किए थे। इन दस्तावेजों का इस्तेमाल करके बिना वास्तविक पहचान, बिना कारोबार और बिना असली स्थान के GSTIN रजिस्ट्रेशन हासिल कर लिया गया।
इसी तरह ई-स्टांप पेपर को भी एडिट कर “बिजनेस परिसर” के तौर पर दिखाया गया ताकि उन्हें GST पंजीकरण मिल सके। जांच के बाद विभाग ने ऐसे सभी फर्जी रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिए हैं।
टीम की जांच में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि अधिकांश फर्जी GSTIN शिमला और सोलन के ग्रामीण व अंदरूनी इलाकों से बनाए गए थे, जहां दस्तावेजों की जांच कम होती है। इसी नेटवर्क का विस्तार आगे चलकर ऊना–हरोली क्षेत्र तक पहुंच चुका था, जहां टैक्सपेयर्स की एक चेन भी पकड़ी गई। सभी का ITC (इनपुट टैक्स क्रेडिट) तुरंत ब्लॉक कर दिया गया है।
जांच में यह भी सामने आया कि फर्जी कारोबार करने वाले टैक्सपेयर्स तेलंगाना, राजस्थान और कर्नाटक से बिजनेस ऑपरेट कर रहे थे। उनके बैंक खाते दक्षिण भारतीय राज्यों में खोले गए थे। 90% बिक्री हिमाचल से बाहर के राज्यों में दिखाई गई, लेकिन GSTIN हिमाचल के दूरस्थ इलाकों में बनवाई गई।
मतलब “लोअर रिस्क रजिस्ट्रेशन जोन का फायदा लेते हुए बड़े पैमाने पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का गलत दावा करना। परवाणू के संयुक्त आयुक्त जी.डी. ठाकुर ने बताया कि कई रजिस्ट्रेशन ऐसे व्यक्तियों के नाम पर मिले जो खुद नहीं जानते थे कि उनके नाम पर करोड़ों का कारोबार दिखाया जा रहा है।
कुछ GSTIN सफाई कर्मचारियों, माली और घरेलू नौकरों के आधार कार्ड व मोबाइल नंबर से बनाए गए थे। इन लोगों को यह भी नहीं पता था कि उनकी पहचान पर 6 महीने में इतना बड़ा कारोबार चलाया गया।
कई मकान मालिकों से पूछताछ में सामने आया कि उन्हें अपने परिसरों में “कथित बिजनेस संचालन” के बारे में कोई जानकारी ही नहीं थी। ऐसे 9 फर्जी टैक्सपेयर्स की पहचान की गई है।शिमला में पांच, सोलन में तीन, ऊना में एक और सिरमौर जिले में भी एक इसी तरह की कार्रवाई जारी है। इन सभी जगहों पर भी एक बड़े नेटवर्क की संभावना जताई जा रही है।
विभाग का मानना है कि यह मामला हिमाचल में हाल के वर्षों में सामने आया सबसे बड़ा GST फ्रॉड नेटवर्क है, जिसकी जड़ें हिमाचल से बाहर कई राज्यों तक फैली हो सकती हैं। टीम अब बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजैक्शंस, फर्जी रजिस्ट्रेशन और ITC क्लेम की जांच कर रही है। विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में यह आंकड़ा और भी बड़ा हो सकता है।