#अव्यवस्था
August 25, 2025
हिमाचल: सुख की सरकार में जनता बेहाल !, इस जोनल अस्पताल में एक बिस्तर पर तीन-तीन मरीज
सुक्खू सरकार के दावों की खुली पोल, जोनल अस्पताल में एक बैड पर तीन मरीज
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मंडी। हिमाचल प्रदेश में सुक्खू सरकार जहां एक ओर जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के दावे कर रही है, वहीं मंडी जिले के जोनल अस्पताल की जमीनी हकीकत इन दावों की पूरी तरह से पोल खोल रही है। मंडी के सबसे बड़े अस्पताल में मरीजों को गंभीर हालात में एक.एक बिस्तर पर तीन.तीन मरीजों के साथ उपचार लेने को मजबूर होना पड़ रहा है। यह न सिर्फ चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल उठाता है, बल्कि संक्रमण फैलने का गंभीर खतरा भी उत्पन्न कर रहा है।
महिला रोगी वार्ड में बीते चार महीनों से बेड की भारी कमी चल रही है। स्थिति यह है कि एक ही बिस्तर पर दो से तीन मरीजों को लिटाया जा रहा है। इससे मरीजों की हालत बद से बदतर होती जा रही है। तीमारदारों में रोष और तनाव की स्थिति बनी हुई है, आए दिन अस्पताल में हंगामे जैसी नौबत आ रही है।
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ऊपरी बल्ह की धर्मा देवी, जिन्हें बुखार और डायरिया है, उन्हें तुंगल क्षेत्र की गोदावरी के साथ बेड साझा करना पड़ रहा है, जो खुद सर्दी-जुकाम से पीड़ित हैं। दोनों के तीमारदारों ने संक्रमण के बढ़ते खतरे की चिंता जताई है। वहीं, बालीचौकी की रेशमु देवी (बुखार), कोटली की इंद्रा देवी (डायरिया), और तुंगल की भावना (उल्टी-दस्त) तीनों एक ही बिस्तर पर लेटने को मजबूर हैं। इस हालात में मरीजों को न तो आराम मिल पा रहा है और न ही सही इलाज।
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थाना शिवा की गणु देवी, जिन्हें फैटी लीवर की समस्या है, और सराज क्षेत्र की लता, जो पेट दर्द से परेशान हैं, ने बताया कि अस्पताल परिसर में कई कमरे ऐसे हैं जो खाली पड़े हैं। वहां पुराने वार्ड और बिस्तर मौजूद हैं, लेकिन उनका उपयोग नहीं किया जा रहा।
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. दिनेश ठाकुर ने हाल ही में कार्यभार संभाला है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में मैनपावर और संसाधनों की कमी जरूर है, लेकिन जल्द ही समाधान की दिशा में काम किया जाएगा। हालांकि, पिछले चार महीनों से यह स्थिति जस की तस बनी हुई है और मरीजों को लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
हिमाचल प्रदेश की सत्तारूढ़ सुक्खू सरकार ने चुनावों के दौरान प्रदेश में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने के बड़े.बड़े वादे किए थे। मगर मंडी के जोनल अस्पताल की तस्वीर इन वादों की सच्चाई बयां कर रही है। एक ओर सरकार व्यवस्था परिवर्तन की बात करती है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर व्यवस्थाएं पूरी तरह से चरमराई हुई हैं। प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की यह स्थिति बेहद चिंताजनक है। सवाल यह है कि अगर जिला मुख्यालय का सबसे बड़ा अस्पताल इस तरह की बदहाली से जूझ रहा है, तो फिर ग्रामीण क्षेत्रों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों की हालत क्या होगी?
जनता अब यह जानना चाहती है कि आखिर कब तक उन्हें इस तरह की स्वास्थ्य सेवाओं के भरोसे छोड़ दिया जाएगा। मंडी के हालात ने राज्य सरकार के दावों पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है। अब जरूरत है ठोस कदम उठाने की,ताकि स्वास्थ्य व्यवस्था को धरातल पर सुधारा जा सके, न कि केवल भाषणों और घोषणाओं में।