#अव्यवस्था
July 22, 2025
हिमाचल: सड़क पर उतरे स्कूल के छात्र, किया प्रदर्शन; बोले- एकमात्र शिक्षक का भी कर दिया तबादला
सीनियर सेकेंडरी स्कूल में एक शिक्षक उसका भी कर दिया तबादला, सड़क पर किया प्रदर्शन
शेयर करें:

चंबा। जब किसी देश प्रदेश में छोटे छोटे बच्चों को अपनी शिक्षा के लिए ही सड़कों पर उतरना पड़े तो वहां की सरकार और प्रशासन के लिए यह बेहद ही शर्मनाक होगा। लेकिन हिमाचल प्रदेश में कुछ ऐसा ही हो रहा है। प्रदेश की सुक्खू सरकार और शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर एक तरफ जहां प्रदेश के सरकारी स्कूलों में गुणवत्ता शिक्षा देने के दम भरते हैं। वहीं उनकी यह बातें जमीन पर कितनी सच साबित हो रही हैं, इसका जीता जागता उदाहरण हिमाचल के चंबा जिला में देखने को मिला है। स्कूल के छोटे छोटे बच्चों ने सड़क पर धरना प्रदर्शन करते हुए सड़क को जाम कर दिया।
हिमाचल के जनजातीय जिला चंबा के भरमौर क्षेत्र में छोटे छोटे बच्चों को अपनी शिक्षा के लिए सड़कों पर उतरना पड़ा है। अपने भविष्य को अंधकार में जाता देख इन बच्चों को मजबूरन सड़कों पर उतर कर सुक्खू सरकार से फरियाद लगानी पड़ी। मामला जनजातीय क्षेत्र भरमौर की लामू पंचायत में स्थित सीनियर सेकेंडरी स्कूल का है।
यह भी पढ़ें : हिमाचल: किशोरी के साथ होटल में दो युवकों ने की नीच हरकत, एक आरोपी 18 से भी कम
दरअसल सीनियर सेकेंडरी स्कूल लामू लंबे समय से एक ही शिक्षक के सहारे चल रहा था। लेकिन अब उसका भी तबादला कर दिया गया है। जिससे परेशान सीनियर सेकेंडरी स्कूल लामू में पढ़ रहे छात्रों ने मंगलवार को अपनी पढ़ाई को लेकर सरकार और शिक्षा विभाग के खिलाफ सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया। स्कूल में शिक्षक न होने की वजह से परेशान छात्रों ने पहले स्कूल परिसर में धरना दिया और उसके बाद लामू.चोली.क्वारसी मुख्य सड़क पर बैठकर रास्ता जाम कर दिया।
यह भी पढ़ें : हिमाचल में दरकी पहाड़ी- चलती पिकअप पर गिरे बड़े-बड़े पत्थर, गाड़ी में सवार थे दो लोग
यह घटना प्रदेश के शिक्षा तंत्र की बदहाली और सरकारी व्यवस्था की उदासीनता को उजागर करती है। सवाल यह है कि अगर स्कूली बच्चों को भी अपने भविष्य की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरना पड़े, तो उस प्रदेश की सरकार की प्राथमिकताएं क्या हैं। और क्या यह राज्य की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल नहीं खड़े करता।
लामू सीनियर सेकेंडरी स्कूल में फिलहाल केवल एक ही शिक्षक पॉलिटिकल साइंस का लेक्चरर तैनात था, जो अब न्यायालय के माध्यम से अपना ट्रांसफर करवा चुका है। उनके रिलीव होते ही स्कूल पूरी तरह से शिक्षक विहीन हो जाएगा। यह स्थिति बच्चों के भविष्य को अंधकार में धकेलने जैसी है। बच्चों का कहना है कि बिना पढ़ाई के वे रोज स्कूल आकर समय व्यर्थ कर रहे हैं। इसी कारण अब तक 11 छात्र पास के दूसरे स्कूलों में शिफ्ट हो चुके हैं और केवल 8 छात्र ही लामू स्कूल में बचे हैं।
यह भी पढ़ें : बिजली महादेव रोपवे मामला: MLA सुंदर ठाकुर ने पेश किए कई सबूत, विरोधियों को बताया 'दोगला'
स्कूल प्रबंधन समिति के अध्यक्ष अशोक कुमार ने बताया कि वे कई बार जिला प्रशासन, विधायकों और शिक्षा विभाग से शिक्षक नियुक्त करने की गुहार लगा चुके हैंए लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन ही मिला। उन्होंने कहाए जब पढ़ाई का कोई विकल्प नहीं बचा तो हमें मजबूरी में अपने बच्चों के साथ प्रदर्शन करना पड़ा।
छात्रों ने तख्तियों के साथ सड़क पर बैठकर नारे लगाए और अपने अधिकारों की मांग की। छात्रों का कहना है कि जब तक स्कूल में पर्याप्त शिक्षक नियुक्त नहीं होतेए वे प्रदर्शन जारी रखेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की गईए तो यह मामला और व्यापक रूप ले सकता है। पंचायत प्रधान ने कहा कि बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
ग्राम पंचायत लामू के प्रधान लालचंद ने भी बच्चों के इस कदम को सरकार के लिए एक "जागने वाली घंटी" बताया। उन्होंने कहा, "एक तरफ सरकार डिजिटल और स्मार्ट शिक्षा की बात करती है, दूसरी तरफ जनजातीय इलाकों में बच्चों को एक अदद शिक्षक के लिए सड़क पर उतरना पड़ रहा है। इससे बड़ी विडंबना और क्या हो सकती है?"
यह भी पढ़ें : हिमाचल : भांजे ने बताया- उफनती नदी में नहाने जा रहे मामा, पुलिस को नदी किनारे मिली लोई और चप्पल
जनजातीय क्षेत्र के इस स्कूल की स्थिति हिमाचल के दूरदराज क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था की असल तस्वीर पेश करती है। शिक्षा जैसे मौलिक अधिकार के लिए यदि छात्रों को सड़कों पर उतरना पड़े, तो यह सरकार और शिक्षा विभाग की प्राथमिकताओं पर गहरा प्रश्नचिन्ह है। अब देखना यह है कि क्या सरकार इस गंभीर स्थिति का संज्ञान लेकर शीघ्र आवश्यक कदम उठाती है या फिर शिक्षा विभाग की लापरवाही के चलते भविष्य के निर्माता यूं ही भटकते रहेंगे। छोटे-छोटे बच्चों को जब पढ़ाई के लिए सड़क पर उतरना पड़े, तो ये सिर्फ एक विरोध नहीं, बल्कि व्यवस्था की नाकामी का सजीव उदाहरण बन जाता है।"