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May 6, 2025

बिजली बोर्ड कर्मियों का आरोप- निजीकरण की ओर धकेल रही है सुक्खू सरकार, शिमला में हल्ला बोल

9000 भर्तियों, पुरानी पेंशन बहाली और बकाया वसूली की मांग 

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electricity Employees protest

शिमला। खाली पदों को भरने, पुराने पेंशन की बहाली और सुक्खू सरकार के विभागों में बकाया 260 करोड़ के बिल की वसूली जैसी मांगों को लेकर बिजली कर्मचारियों ने मंगलवार को शिमला में जोरदार प्रदर्शन किया।

बिजली बोर्ड की रैंकिंग बिगड़ी

हिमाचल प्रदेश की खस्ताहाल वित्तीय स्थिति को देखते हुए सुक्खू सरकार के लिए कर्मचारियों की ज्यादातर मांगें मान लेना वित्तीय बोझ बढ़ाने वाला साबित हो सकता है। हिमाचल प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में केवल 260 करोड़ के बिजली के बिल ही बकाया नहीं हैं। सरकार से 125 यूनिट फ्री बिजली के 710 करोड़ रुपए भी बोर्ड को अभी तक नहीं मिले हैं।

 

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कर्मचारियों को आशंका है कि सरकार की ओर से राज्य बिजली बोर्ड को निजीकरण की ओर धकेला जा रहा है और तभी बोर्ड की लेनदारियों से सरकार मुंह फेर रही है। मंगलवार के प्रदर्शन में बिजली बोर्ड के कर्मचारी, इंजीनियर और पेंशनरों ने सरकार की बोर्ड विरोधी नीतियों के विरोध में जमकर हल्ला मचाया।

 

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उनका कहना था कि सुक्खू सरकार जानबूझकर बिजली बोर्ड की स्थिति बिगाड़ रही है। राष्ट्रीय स्तर पर हिमाचल बिजली बोर्ड की रैंकिंग नीचे आ गई है। बोर्ड में करीब 9 हजार पोस्ट खाली हैं, लेकिन सरकार खराब आर्थिक स्थिति का हवाला दकर भर्तियों को हर बार टाल देती है। 

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सरकार अपनी देनदारी चुकाए

कर्मचारियों का कहना था कि बोर्ड की वित्तीय स्थिति तभी सुधर सकेगी, जब सरकार बोर्ड की लेनदारियां चुका दे। करीब एक हजार करोड़ की इस लेनदारी को चुकाने के लिए सरकार भले बाहर से कर्ज ले या कुछ भी करे, लेकिन उसे अपनी देनदारी चुकानी ही होगी। इसी सूरत में बोर्ड खाली पदों पर कर्मचारियों की भर्ती कर पाएगा। लेकिन सुक्खू सरकार बजाय नई भर्तियों के बोर्ड के कर्मचारियों को अन्य विभागों में भेज रही है। कर्मचारियों ने हाल में खत्म किए गए 51 पदों को दोबारा बहाल करने की मांग भी उठाई।

 

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कर्मियों के सैकड़ों करोड़ बकाया

इसके अलावा कर्मचारियों का कहना था कि साल 2003 के बाद भर्ती कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना के बहाल किया जाए। सरकार के लिए खर्च का यह बोझ उठाना भी अभी मुमकिन नहीं है, क्योंकि उसे मौजूदा सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों को सैलरी/पेंशन देने के लिए हर महीने बाजार से कर्ज लेना पड़ रहा है। हालत यह है कि बिजली बोर्ड के कर्मचारियों और पेंशनरों के बीते 2 साल के बकाया, लीव इनकैशमेंट और ग्रैच्युटी भी अभी तक नहीं मिली है। कमेटी ने चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गईं तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।

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