#अव्यवस्था
September 30, 2025
हिमाचल में थम जाएंगे 108 और 102 एंबुलेंस के पहिये, जाने कब से हड़ताल पर जाएंगे कर्मी
सुक्खू सरकार और एनएचएम की नीतियों के खिलाफ हड़ताल करेंगे एंबुलेंस कर्मी
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शिमला। हिमाचल प्रदेश की जनता के लिए जीवन रेखा बन चुकी 108 और 102 एंबुलेंस सेवाओं के पहिये थमने वाले हैं। 108 और 102 एंबुलेंस कर्मचारियों ने सुक्खू सरकार और नेशनल हेल्थ मिशन की नीतियों के खिलाफ हड़ताल करने का फैसला लिया है। इस हड़ताल से प्रदेश की जनता को नुकसान उठाना पड़ सकता है। 108 और 102 एंबुलेंस कर्मचारियों के अनुसार वह दो अक्टूबर रात आठ बजे से अगले 24 घंटे की हड़ताल पर जाएंगे। कर्मचारियों का कहना है कि यह हड़ताल तीन अक्तूबर रात आठ बजे तक जारी रहेगी। इस दौरान पूरे प्रदेश में एंबुलेंस सेवाएं ठप रहेंगी और आम लोग परेशानी का सामना करेंगे।
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एंबुलेंस कर्मचारी यूनियन (सीटू संबंधित) ने साफ कहा है कि सरकार की उपेक्षा और शोषणकारी नीतियों के चलते अब उनके पास आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। हड़ताल के दौरान कर्मचारी उपायुक्त कार्यालयों के बाहर धरना.प्रदर्शन करेंगे।
सीटू अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने कहा कि एनएचएम के अधीन कार्यरत कर्मचारियों को न तो न्यूनतम वेतन मिल रहा है और न ही ओवरटाइम का भुगतान। 12-12 घंटे काम करने के बावजूद वेतन 8 घंटे का भी नहीं दिया जाता। उन्होंने आरोप लगाया कि हाईकोर्ट, लेबर कोर्ट और सीजीएम कोर्ट शिमला तक के आदेशों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि कर्मचारियों के ईपीएफ और ईएसआई में गंभीर गड़बड़ियां हैं। वेतन का एक बड़ा हिस्सा कट जाता है और श्रम कानूनों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। इसके अलावा, जो कर्मचारी अपनी आवाज उठाते हैं, उन्हें तबादलों और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है।
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यूनियन नेताओं का कहना है कि 108 और 102 सेवाएं प्रदेशवासियों के लिए लाइफलाइन साबित हुई हैं। लेकिन अब सुक्खू सरकार और एनएचएम की नीतियों के चलते इनके पहिए थमने वाले हैं। जिसका सीधा खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ेगा। बीमार मरीजों, गर्भवती महिलाओं और आपातकालीन हालात में लोगों को समय पर एंबुलेंस न मिलने से गंभीर समस्याएं खड़ी हो सकती हैं।
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यूनियन ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने जल्द सकारात्मक पहल नहीं की तो यह आंदोलन और भी उग्र किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार को समझना चाहिए कि एंबुलेंस सेवाएं सीधे आम जनता की जिंदगी से जुड़ी हैं। ऐसे में देरी करना मरीजों की जान से खिलवाड़ होगा।
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प्रदेश की जनता अब सरकार की ओर टकटकी लगाए बैठी है कि क्या उनकी लाइफलाइन बन चुकी 108 और 102 सेवाओं को बचाने के लिए समय रहते कोई ठोस कदम उठाया जाएगा या फिर सरकार की नीतिगत असंवेदनशीलता का खामियाजा लोगों की जानें देकर चुकाना पड़ेगा।