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December 9, 2025

पंजाब के दंपत्ति ने हिमाचल में किया कांड, कुत्तों के आगे छोड़ दी गाय, लोगों ने किया बवाल

स्थानीय विधायक ने राज्यपाल और सीएम सुक्खू को लिखा पत्र

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kangra damtal cow

कांगड़ा। देवभूमि कहे जाने वाले हिमाचल प्रदेश से एक ऐसी दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जिसे सुन कर लोगों की रूह कांप गई है। जिला कांगड़ा के डमटाल में एक दंपत्ति ने अपने डॉग शेल्टर में कुत्तों को भोजन के लिए जिंदा गाय को ही छोड़ दिया। जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वायरल हुए इस भयावह वीडियो ने पूरे क्षेत्र में आक्रोश की आग भड़का दी है।

कुत्तों के शेल्टर में छोड़ी गाय

मामला कांगड़ा जिला के इंदौरा विधानसभा क्षेत्र के तहत डमटाल पंचायत के माजरा गांव का है। दंपत्ति द्वारा जिंदा गाय को कुत्तों के आगे नोचने के लिए छोड़ने की इस घटना से लोग उग्र हो गए हैं और जिला प्रशासन से इस संस्था को बंद करने की मांग की। वीडियो में स्पष्ट दिखाई देता है कि कई कुत्ते एक जिंदा गाय को बेरहमी से नोच रहे हैं। इस घटना के बाद ग्रामीणों में भारी गुस्सा फैल गया। ग्रामीणों ने मौके पर एकत्रित होकर शेल्टर के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया और प्रशासन से संस्थान को तत्काल बंद करने व दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।

 

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विवादों में घिरा शेल्टर

जानकारी के अनुसार पंजाब के एक दंपत्ति ने वर्ष 2023 में माजरा गांव में लगभग दो एकड़ भूमि खरीदकर यह डॉग शेल्टर बनाया था। दावा किया जाता है कि वही दंपत्ति गुरदासपुर में वाइसलेस वाइस फाउंडेशन नाम से एनजीओ भी चलाता है। दंपत्ति यह भी कहते हैं कि वे रोजाना करीब 3000 कुत्तों और 30 गायों को भोजन कराते हैं और लगभग 20 गायें शेल्टर में रखी जाती हैं। लेकिन वायरल वीडियो ने उनके सारे दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 

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राज्यपाल से मांगी जांच

इंदौरा के पूर्व विधायक मनोहर धीमान ने घटना को अत्यंत अमानवीय बताते हुए राज्यपाल शिवप्रताप शुक्ल को पत्र लिखकर उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री को भी इसकी प्रति भेजी है। मनोहर धीमान का आरोप है कि दंपत्ति ने जमीन खरीदने के लिए हिमाचल प्रदेश भूमि सुधार अधिनियम की धारा 118 का उल्लंघन किया है। शेल्टर ने न ही स्थानीय पंचायत से एनओसी ली और न ही यह संस्था राज्य में पंजीकृत है। 

 

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प्रशासन व पुलिस में हलचल

वीडियो सामने आते ही प्रशासन भी हरकत में आया। एसडीएम इंदौरा सुरेंद्र ठाकुर ने बताया कि ग्रामीणों ने ज्ञापन दिया है और मामले की पूरी जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस ने भी गाय क्रूरता के इस मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

 

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ग्रामीणों के पांच बड़े सवाल

इस घटना को लेकर ग्रामीणों ने प्रशासन से कई तीखे सवाल भी उठाए हैं—

  • ग्रामीणों की शिकायतों के बावजूद अधिकारियों ने पहले कार्रवाई क्यों नहीं की?
  • बिना एनओसी संस्था कैसे संचालित हो रही थी?
  • एक गैर-हिमाचली महिला को हिमाचल में जमीन कैसे मिल गई?
  • जमीन वास्तव में किसके नाम पर है?
  • आश्रय स्थल किसके संरक्षण में चल रहा था?

देवभूमि की आस्था को ठेस

जिस प्रदेश में गाय को माता मानकर पूजा जाता है, वहां जिंदा गाय को कुत्तों के आगे फेंक देना न सिर्फ अमानवीय है, बल्कि धार्मिक और सामाजिक भावनाओं को आहत करने वाला कृत्य भी है। इस पूरे मामले ने प्रदेश में पशु संरक्षण, प्रशासनिक निगरानी और निजी शेल्टरों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।

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