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August 14, 2025

इतिहास में पहली बार हिमाचल पुलिस के एक भी कर्मी को नहीं मिलेगा राष्ट्रपति पदक; जानें वजह

हिमाचल कैडर के आईपीएस विमुक्त रंजन को राष्ट्रपति पदक

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Himachal Police

शिमला। हिमाचल प्रदेश पुलिस के लिए यह स्वतंत्रता दिवस मायूसी भरा रहेगा, क्योंकि राज्य के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब किसी भी पुलिस अधिकारी या कर्मचारी को प्रतिष्ठित राष्ट्रपति पुलिस पदक के लिए नामित नहीं किया गया। यह अभूतपूर्व स्थिति तब सामने आई जब केंद्रीय गृह मंत्रालय ने वीरता, विशिष्ट सेवा और सराहनीय सेवा के लिए पदकों की घोषणा की, लेकिन उसमें हिमाचल पुलिस का नाम पूरी तरह नदारद रहा।

गृह मंत्रालय ने जारी की सूची

गृह मंत्रालय की ओर से पुलिस सेवा, केंद्र शासित प्रदेश और सीएपीएफ अन्य संगठनों को लेकर जारी सूची में 226 वीरता पदक, 89 राष्ट्रपति विशिष्ट सेवा पदक और 635 सराहनीय सेवा पदक जारी किए गए। लेकिन इसमें हिमाचल पुलिस को एक भी पदक नहीं मिलेगा।

 

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प्रक्रिया में चूक से रह गया हिमाचल पीछे

पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस असामान्य स्थिति के पीछे मुख्य वजह प्रशासनिक लापरवाही मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि हिमाचल पुलिस मुख्यालय की ओर से तैयार की गई अनुशंसा सूची प्रदेश सरकार को तो सौंपी गई थी, लेकिन वह केंद्रीय गृह मंत्रालय तक समय पर नहीं पहुंचाई जा सकी। इसी सूची के आधार पर मंत्रालय पदकों के लिए चयन करता है। नतीजतन, इस साल हिमाचल का नाम किसी भी श्रेणी में नहीं आया।

 

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अन्य राज्यों की चमकी किस्मत

जहां हिमाचल पदकों की दौड़ से पूरी तरह बाहर रह गया, वहीं उसके पड़ोसी राज्यों को कई सम्मान प्राप्त हुए। उत्तराखंड को 5 सराहनीय सेवा पदक मिले, जबकि जम्मू-कश्मीर को 127 वीरता पदक, 2 राष्ट्रपति विशिष्ट सेवा पदक और 14 सराहनीय सेवा पदक प्राप्त हुए। पंजाब और हरियाणा को भी क्रमशः 16 और 13 पदकों से नवाजा गया। यहां तक कि छोटा-सा केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ भी दो पदक पाने में सफल रहा।

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एकमात्र सुकून] हिमाचल कैडर के आईपीएस को मिला सम्मान

हालांकि] इस निराशाजनक खबर के बीच एक राहत की बात यह रही कि हिमाचल कैडर के आईपीएस अधिकारी विमुक्त रंजन को राष्ट्रपति विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया गया है। वर्ष 2009 बैच के ये अधिकारी वर्तमान में स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (SPG) में डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (DIG) के पद पर तैनात हैं। वे पहले एसपी कांगड़ा रह चुके हैं और उन्होंने दलाई लामा की सुरक्षा जैसी अहम जिम्मेदारियां भी संभाली हैं।

 

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सवालों के घेरे में पुलिस प्रशासन

इस पूरे घटनाक्रम ने हिमाचल प्रदेश पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जहां अन्य राज्य अपने जांबाज और निष्ठावान पुलिसकर्मियों को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान दिलवाने में सफल रहे, वहीं हिमाचल जैसे शांतिप्रिय और अनुशासित राज्य की पुलिस को कोई स्थान न मिलना चौंकाने वाला है।

 

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस चूक की जिम्मेदारी कौन लेता है और भविष्य में ऐसे सम्मानजनक अवसरों से वंचित न रहने के लिए कौन-कौन से सुधार किए जाते हैं। साथ ही, यह भी आवश्यक हो गया है कि हिमाचल पुलिस का मनोबल बनाए रखने के लिए राज्य सरकार अपने स्तर पर भी पुरस्कारों की प्रक्रिया को मजबूत बनाए।

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