शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू एक बार फिर दिल्ली के दौरे पर रवाना हो गए हैं। इस बार मुख्यमंत्री का दिल्ली दौरा प्रदेश की आर्थिक चुनौतियों और हिमाचल के लंबित मुद्दों को केंद्र के समक्ष रखने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शिमला में खराब मौसम के कारण मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर उड़ान नहीं भर सका, जिसके बाद वह सड़क मार्ग से दिल्ली के लिए रवाना हुए।
मुख्यमंत्री 28 और 29 सितंबर को दिल्ली में रहेंगे और इस दौरान नीति आयोग की बैठक समेत विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। दिल्ली प्रवास के दौरान उनका फोकस हिमाचल की आर्थिक स्थिति, केंद्रीय योजनाओं से जुड़े बजट और प्रदेश के हितों से जुड़े अन्य मुद्दों पर रहने की बात सामने आई है।
खराब मौसम ने बदला सीएम का सफर
मुख्यमंत्री सुक्खू का सुबह हेलीकॉप्टर से दिल्ली जाने का कार्यक्रम था, लेकिन शिमला में लगातार बारिश और प्रतिकूल मौसम के चलते चौपर उड़ान नहीं भर सका। इसके बाद मुख्यमंत्री ने सड़क मार्ग से दिल्ली जाने का फैसला किया। पहाड़ों में बिगड़े मौसम के बीच सड़क मार्ग से मुख्यमंत्री का दिल्ली रवाना होना भी दौरे की अहमियत को दर्शाता है। अब मुख्यमंत्री निर्धारित बैठकों में शामिल होकर प्रदेश से जुड़े मुद्दों को केंद्र के समक्ष रखेंगे।
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केंद्र के सामने आर्थिक स्थिति का मुद्दा
मुख्यमंत्री सुक्खू के दिल्ली दौरे में हिमाचल प्रदेश की आर्थिक स्थिति प्रमुख मुद्दों में शामिल रहेगी। मुख्यमंत्री पहले भी नीति आयोग के मंच पर प्रदेश को अधिक वित्तीय सहायता देने और हिमाचल की विशेष आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखने की मांग उठा चुके हैं। जून 2026 में नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की बैठक में उन्होंने राज्य की वित्तीय चुनौतियों और केंद्र से अतिरिक्त सहयोग की जरूरत का मुद्दा उठाया था। इस बार भी मुख्यमंत्री केंद्रीय योजनाओं के तहत प्रदेश को मिलने वाले बजट को समय पर जारी करने समेत हिमाचल के वित्तीय हितों से जुड़े विषयों पर चर्चा कर सकते हैं।
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दो दिन दिल्ली में रहेंगे मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री का दिल्ली प्रवास दो दिनों का रहेगा। इस दौरान नीति आयोग की बैठक के अलावा अन्य बैठकों और मुलाकातों का कार्यक्रम भी प्रस्तावित है। मुख्यमंत्री का प्रयास रहेगा कि हिमाचल से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को केंद्र के समक्ष प्रभावी ढंग से रखा जाए। हाल के दिनों में मुख्यमंत्री ने राज्य को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने को लेकर भी कई योजनाओं और संभावनाओं पर जोर दिया है। उन्होंने जल संसाधनों से राजस्व बढ़ाने और बिजली की बेहतर कीमत प्राप्त करने जैसे उपायों की बात कही है।
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आपदा राहत और केंद्रीय सहायता पर भी नजर
हिमाचल में इस मानसून के दौरान भारी बारिश, बादल फटने, बाढ़ और भूस्खलन से हुए नुकसान के बाद केंद्रीय सहायता का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार ने करीब 3,200 करोड़ रुपये के मानसून नुकसान के लिए केंद्र से सहायता मांगी है। इसी बीच केंद्र की अंतर-मंत्रालयी टीम 28 सितंबर से 1 अक्टूबर तक हिमाचल के प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर नुकसान का आकलन करने वाली है। ऐसे में मुख्यमंत्री के दिल्ली प्रवास के दौरान आपदा प्रभावित हिमाचल के लिए वित्तीय सहायता से जुड़े विषयों पर भी चर्चा महत्वपूर्ण हो सकती है।
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कांग्रेस नेताओं से मुलाकात की भी संभावना
दिल्ली दौरे के दौरान मुख्यमंत्री के कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात करने की भी संभावना है। मुख्यमंत्री 29 सितंबर को कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक में शामिल होने वाले हैं। इसी बीच हिमाचल मंत्रिमंडल में संभावित विस्तार और फेरबदल को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि, नए मंत्री को शामिल करने अथवा मंत्रिमंडल में किसी बदलाव को लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।
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आर्थिक मोर्चे पर केंद्र से चर्चा पर निगाहें
हिमाचल सरकार के सामने वित्तीय दबाव और विकास कार्यों के लिए संसाधन जुटाने की चुनौती लगातार बनी हुई है। 2026-27 के बजट विश्लेषण के अनुसार राज्य ने 6,577 करोड़ रुपये के राजस्व घाटे और 9,698 करोड़ रुपये के राजकोषीय घाटे का लक्ष्य रखा है। ऐसे में मुख्यमंत्री का दिल्ली दौरा आर्थिक मुद्दों के लिहाज से अहम है। अब देखना होगा कि केंद्र के साथ होने वाली चर्चाओं में हिमाचल की वित्तीय जरूरतों और लंबित मांगों को लेकर क्या प्रगति होती है।
30 सितंबर को रोहड़ू जाने का कार्यक्रम
दिल्ली दौरे के बाद मुख्यमंत्री के 30 सितंबर को रोहड़ू जाने की संभावना है। यहां ‘एक शाम गांव के नाम’ कार्यक्रम प्रस्तावित है। इस दौरान मुख्यमंत्री ग्रामीणों से संवाद कर स्थानीय समस्याओं और विकास कार्यों से जुड़े मुद्दों की जानकारी ले सकते हैं। फिलहाल मुख्यमंत्री सुक्खू का दिल्ली दौरा एक बार फिर हिमाचल के आर्थिक और विकास संबंधी मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर रखने का अवसर बना है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि केंद्र के समक्ष हिमाचल की आर्थिक स्थिति और प्रदेश के लंबित हितों को लेकर मुख्यमंत्री की चर्चाओं का क्या परिणाम सामने आता है।
