कुल्लू। देव भूमि हिमाचल में भगवान शिव का वास कई रूपों में है। प्रदेश के कुल्लू जिले में एक ऐसा शिवलिंग स्थापित है जिसका अभिषेक प्रकृति खुद करती है। इतना ही नहीं, सर्दियों के दिनों में यहां बर्फ के शिवलिंग का भी निर्माण होता है इसीलिए इसे मिनी अमरनाथ भी कहा जाता है।

खुले आसमान के नीचे विराजित हैं भोलनाथ

भगवान शिव यहां किसी चारदीवारी में स्थापित नहीं हैं बल्कि यहां वे खुले आसमान के नीचे विराजमान है। चारों ओर प्रकृति और बीचे में भोले शंकर बैठे हैं। शिवलिंग के ऊपर प्राकृतिक रूप से पानी की बूंदे लगातार गिरती रहती हैं जो इसे एक प्राकृतिक जलाभिषेक के रूप में पहचान दिलाती है।

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सर्दी में 20-30 फीट ऊंचा बर्फीला शिवलिंग

साल के ज्यादातर महीनों में ये प्रक्रिया चलती रहती है और जब सर्दी आती है तो शिवलिंग बर्फ से ढंक जाता है। हर साल शिवलिंग की ऊंचाई बदलती रहती है। ये 20 फीट से ऊंची होती है जो 30 फीट तक भी पहुंच जाती है। हालांकि हर साल शिवलिंग की ऊंचाई अलग ही निकलती है।

मां अंजनी ने 7000 सालों तक की थी तपस्या

मान्यता है कि त्रेता युग में माता अंजनी ने 7000 सालों तक इसी स्थान पर भगवान शिव की घोर तपस्या की थी। उन्होंने ये तपस्या पुत्र प्राप्ति के लिए की थी। उनकी कठोर तपस्या के चलते ही भगवान शिव यहां प्रकट हुए और माता अंजनी को वरदान दिया जिससे उन्होंने बेटे के रूप में हनुमान जी की प्राप्ति हुई।

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बाबा प्रकाश पुरी ने की थी इस स्थान की खोज

इसीलिए इस जगह का नाम अंजनी महादेव पड़ा। बताया जाता है कि बाबा प्रकाश पुरी ने इस स्थान की खोज की थी। उन्होंने ही इस स्थान की महत्वता को बताया था। मान्यता है कि शिवलिंग के दर्शन करने से हर मनोकामना पूर्ण होती है। ये मनाली की सोलंग घाटी से 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।