कुल्लू । हिमाचल प्रदेश में 20 भादों पर्व पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। कुल्लू के अलग-अलग धार्मिक स्थलों पर सुबह से ही हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही। जिया संगम समेत कई जगहों पर देवी-देवताओं के साथ श्रद्धालुओं ने पवित्र स्नान किया और पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की। इस दौरान ढोल-नगाड़ों और देवी-देवताओं के जयकारों से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया।

पवित्र झरने में नहाकर देवता को चढ़ाया आटे का प्रसाद

20 भादों के स्नान को लेकर शनिवार सुबह से ही जिया संगम, गड़सा, वशिष्ठ, क्लाथ और खीरगंगा समेत कई धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी रही। मणिकर्ण में इस मौके पर विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। राम मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए रहने और खाने-पीने की व्यवस्था की गई थी। वहीं गड़सा घाटी के शौठ निहरगणु स्थित पवित्र झरने में भी हजारों लोगों ने स्नान किया और देवता को आटे का प्रसाद चढ़ाया।

 

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देवी-देवताओं के जयकारों से गूंज उठा जिया संगम

20 भादों के मौके पर पार्वती और ब्यास नदी के संगम स्थल जिया में सुबह से ही भक्तों की भीड़ लगी रही। देवी-देवताओं के जयकारों से पूरा संगम स्थल गूंज उठा। हजारों श्रद्धालु देवताओं के गूर, कारदारों और पवित्र निशानों के साथ संगम में पहुंचे और शाही स्नान किया। लोगों ने स्नान के बाद पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

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ढोल-नगाड़ों, कनाल और शहनाई की धुनों के बीच जब देवी-देवताओं ने संगम के पवित्र पानी में प्रवेश किया तो वहां मौजूद श्रद्धालु भावुक हो गए। पूरे दिन संगम स्थल पर धार्मिक माहौल बना रहा। श्रद्धालु इंदीवर मेहता और शिव कुमार सूर्या ने बताया कि मान्यता है कि बरसात के दौरान पहाड़ों में जड़ी-बूटियां पककर पानी में मिल जाती हैं। इस पानी में स्नान करने से चर्म रोग दूर होने की मान्यता है। उन्होंने बताया कि दो दिन पहले माता पार्वती चोंग ने भी यहां शाही स्नान किया था, जिसके चलते इस जगह को लेकर लोगों में खास धार्मिक आस्था है।

जिया संगम के सौंदर्यीकरण की उठी मांग

ग्रामीणों लोगों ने कहा कि जिया संगम धार्मिक आस्था का बड़ा केंद्र है। इसके साथ ही पर्यटन की नजर से भी यह कुल्लू का महत्वपूर्ण स्थान है। हर साल 20 भादों के मौके पर यहां हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन यहां जरूरी सुविधाओं की कमी है।

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ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन से मांग की कि संगम स्थल का जल्द से जल्द सौंदर्यीकरण करवाया जाए। यहां पक्के घाट, पीने के पानी, शौचालय, कपड़े बदलने के लिए चेंजिंग रूम, साफ-सफाई और सुरक्षा जैसी सुविधाएं उपलब्ध करवाई जानी चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं को परेशानी न हो।