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September 4, 2026

हिमाचल: 35 साल बाद भाई से मिलने पहुंचीं माता अंबिका, गूर के माध्यम से कहा- आने वाला है कोई बड़ा संकट

दो दिवसीय मेले में होंगी कई देव गतिविधियां

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himachal Mandi News

मंडी। देवभूमि हिमाचल प्रदेश में भाई-बहन के रिश्ते से जुड़ी सदियों पुरानी देव परंपरा का वीरवार को कांडीखल में खास नजारा देखने को मिला। करीब साढ़े 3 दशक बाद आदिशक्ति माता अंबिका अपने भाई देव मार्कंडेय ऋषि के घर कांडीखल पहुंचीं। माता अंबिका के पहुंचते ही माहौल भक्तिमय हो गया और बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस खास पल के गवाह बने।

सैकड़ों देवलुओं के साथ कांडीखल पहुंचीं माता अंबिका

माता अंबिका थाची के प्लाईधार से सैकड़ों देवलुओं के साथ दोपहर बाद कांडीखल पहुंचीं। यहां पहुंचते ही सबसे पहले माता अंबिका और देव मार्कंडेय ऋषि का देव मिलन हुआ। इस दौरान श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा कर दोनों देवी-देवताओं को नमन किया।

 

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देव मिलन देखने उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

करीब 35 साल बाद हुए इस देव मिलन को देखने के लिए कांडीखल में सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचे थे। भाई-बहन के इस पवित्र मिलन के दौरान पूरा माहौल भावुक और भक्तिमय नजर आया। लोगों ने इस खास पल को श्रद्धा के साथ देखा और देवी-देवताओं का आशीर्वाद लिया।

माता अंबिका ने देववाणी में कही बड़ी बात

देव मिलन के बाद माता अंबिका ने अपने गूर के माध्यम से देववाणी की। माता ने कहा कि जब संसार पर कोई बड़ी आपदा आने वाली होती है, तभी भाई-बहन एक साथ इकट्ठे होते हैं। माता ने कहा कि इतने वर्षों बाद दोनों का एक जगह मिलना अपने आप में खास है और इसके पीछे क्या कारण है, इसका पता आने वाले समय में सभी को चल जाएगा।

 

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देववाणी के बाद श्रद्धालुओं में चर्चा

माता अंबिका की देववाणी के बाद वहां मौजूद श्रद्धालुओं के बीच इस बात को लेकर चर्चा शुरू हो गई। लोग आपस में बात करने लगे कि आखिर इतने वर्षों बाद हुए इस देव मिलन के पीछे क्या संकेत है। माता ने देववाणी के माध्यम से अपने क्षेत्रों के साथ-साथ देवभूमि हिमाचल प्रदेश पर भी अपना आशीर्वाद बनाए रखने की बात कही।

दो दिवसीय मेले में होंगी कई देव गतिविधियां

देव मार्कंडेय ऋषि के पुजारी जीवन शर्मा, महेंद्र शर्मा और गूर जयदेव ने बताया कि कांडीखल में चल रहे दो दिवसीय मेले में देव मिलन के बाद हारगी उत्सव सहित कई देव कार्य होंगे। इस दौरान ढोल-नगाड़ों की थाप पर पारंपरिक नाटी और लोकनृत्य भी आयोजित किए जा रहे हैं।

 

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भाई-बहन की प्राचीन देव परंपरा को मिल रहा बढ़ावा

दोनों देवी-देवताओं की मौजूदगी में हो रहे इन आयोजनों से क्षेत्र की पुरानी देव संस्कृति और भाई-बहन के पवित्र रिश्ते की परंपरा को आगे बढ़ाया जा रहा है। शुक्रवार को भी हारगी उत्सव सहित अन्य देव कार्यक्रम जारी रहेंगे।

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