शिमला। हिमाचल प्रदेश कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष को लेकर महीनों से चल रही अंतर्कलह के बीच पार्टी हाईकमान ने आखिरकार ऐसा फैसला लिया है, जो न केवल संगठन की अस्त.व्यस्त होती स्थिति को थामने का प्रयास है बल्कि गुटीय राजनीति में एक स्पष्ट पावर बैलेंस भी स्थापित करता है। स्व वीरभद्र सिंह के करीबी और श्रीरेणुकाजी से विधायक विनय कुमार को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर हाईकमान ने यह संदेश दिया है कि होलीलॉज की पकड़ आज भी उतनी ही मजबूत है जितनी वीरभद्र सिंह के जीवनकाल में थी।
वीरभद्र के करीबी विनय को सौंपी जिम्मेदारी
संगठन और सरकार के बीच जारी खींचतान के बीच यह फैसला कांग्रेस की आंतरिक राजनीति में पावर बैलेंस स्थापित करने का प्रयास माना जा रहा है। कांग्रेस हाईकमान ने हिमाचल प्रदेश में पार्टी की कमान स्व वीरभद्र सिंह के करीबी विनय कुमार को सौंप कर पार्टी के भीतर पावर बैलेंस किया। प्रदेश में सरकार सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू चलाते रहेंगे, जबकि संगठन में सुक्खू विरोधी खेमा यानी होलीलॉज और मुकेश अग्निहोत्री गुट को अधिमान दिया है।
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दो गुटों में बंटी कांग्रेस में साधा संतुलन
दरअसल हिमाचल में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के चयन में देरी का सबसे बड़ा कारण भी प्रदेश में दो गुटों के बीच की खींचतान था। हिमाचल कांग्रेस लंबे समय से दो प्रमुख गुटों में बंटी हुई है। एक ओर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का गुट है, जो सरकार का नेतृत्व कर रहा है, जबकि दूसरी ओर वीरभद्र सिंह परिवार का परंपरागत होलीलॉज कैंप है, जिसमें डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री तक स्वयं को शामिल बताते आए हैं। हाईकमान द्वारा विनय कुमार के नाम पर मुहर लगाना न केवल होलीलॉज गुट के सम्मान का प्रतीक है बल्कि यह स्पष्ट संकेत भी कि कांग्रेस अब भी वीरभद्र परिवार के राजनीतिक प्रभाव को नजरअंदाज नहीं कर सकती।
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सीएम सुक्खू ने सुझाए दो अन्य नाम
विनय कुमार की ताजपोशी से पहले मुख्यमंत्री सुक्खू ने अपने दो करीबी विधायकों कसौली के सुल्तानपुरी और भोरंज के सुरेश कुमार के नाम अध्यक्ष पद के लिए सुझाए थे। लेकिन होलीलॉज कैंप की एकजुटता और मुकेश अग्निहोत्री द्वारा दिल्ली में विनय का नाम आगे रखने के बाद हाईकमान ने सुक्खू के सुझावों को अधिक महत्व नहीं दिया। वहीं विनय की वरिष्ठता और उनके राजनीतिक अनुभव के चलते सुक्खू गुट भी खुलकर इसका विरोध नहीं कर सका था।
हाईकमान ने खेला एससी कार्ड
विनय कुमार एससी समुदाय से आते हैं। शिमला संसदीय क्षेत्र में लगभग 27% SC आबादी होने के कारण हाईकमान ने यह फैसला राजनीतिक रूप से भी लाभदायक माना है। इस ताजपोशी से पार्टी ने 2027 के विधानसभा चुनावों व 2029 के लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए एक संवेदनशील वोट बैंक को साधने की रणनीति अपनाई है।
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विनय कुमार का राजनीतिक सफर
विनय कुमार की संगठनात्मक यात्रा भी बेहद व्यापक रही है। वह लगभग तीन साल तक प्रदेश कांग्रेस के वर्किंग प्रेसीडेंट रहे, तीन बार विधायक बने, वीरभद्र सरकार में मुख्य संसदीय सचिव रहे और हाल ही में विधानसभा उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर उन्होंने संगठन की जिम्मेदारी संभालने का रास्ता साफ किया। राजनीतिक जीवन में उन्हें शुरू से ही स्व वीरभद्र सिंह का संरक्षण मिला, जिसने उनके नेतृत्व की स्वीकृति को और मजबूती दी।
विनय के सामने अब बड़ी चुनौती
हिमाचल कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद अब विनय कुमार के सामने संगठन को खड़ा सबसे बड़ी चुनौती होगी। पिछले एक साल से अधिक समय से पूरा संगठन बिखरा हुआ है। जिससक कार्यकर्ताओं में निराशा भर चुकी है। अब विनय कुमार को इन निराश कार्यकर्ताओं को एकजुट कर एक बार फिर मजबूत संगठन को खड़ा करना होगा, ताकि आने वाले दो माह बाद पंचायत चुनाव की तैयारी की जा सके।
