शिमला। हिमाचल प्रदेश में अब भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार सख्त एक्शन मूड में नजर आ गई है। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने साफ शब्दों में कहा है कि जिन अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं, उन्हें अब अहम सरकारी पदों पर नहीं रहने दिया जाएगा। यानी साफ है कि ऐसे अधिकारियों की छुट्टी तय मानी जा रही है।
बजट सत्र में उठा भ्रष्टाचार का मुद्दा
दरअसल, आज विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे चरण में जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, सबसे पहले संदिग्ध आचरण वाले अफसरों को सेवा विस्तार देने का मुद्दा उठ गया। सतपाल सत्ती ने इस मामले को सदन में जोर-शोर से उठाया। उन्होंने कहा कि ऊना में रिश्वत कांड में फंसे एक अधिकारी को सेवा विस्तार दिया गया, जिससे सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
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भ्रष्टाचार में शामिल अधिकारियों पर सीधा एक्शन
इस पर जवाब देते हुए CM सुक्खू ने साफ कहा कि वह सिर्फ आश्वासन देने वालों में से नहीं हैं, बल्कि भ्रष्टाचार में शामिल अधिकारियों पर सीधे एक्शन लिया जा रहा है। उन्होंने दो टूक कहा कि जिन अधिकारियों की ईमानदारी पर सवाल हैं, उन्हें सिस्टम में नहीं रहने दिया जाएगा और ऐसे लोगों को अहम जिम्मेदारियों से हटाया जा रहा है।
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सरकार का मकसद साफ है कि प्रशासन में पारदर्शिता लाना और लोगों का भरोसा मजबूत करना। उनका मानना है कि जब कुछ लोगों पर कड़ी कार्रवाई होगी, तो बाकी कर्मचारी और अधिकारी भी सबक लेंगे और गलत काम करने से बचेंगे।
सिस्टम ने सुधार लाने की एक नई पहल
सरकार के इस फैसले से अफसरशाही में हलचल जरूर बढ़ सकती है, लेकिन साथ ही यह उम्मीद भी जताई जा रही है कि इससे सिस्टम में सुधार आएगा और कामकाज ज्यादा ईमानदारी से होगा। आम लोगों को भी इससे राहत मिल सकती है, क्योंकि भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने की दिशा में यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
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सदन में नेता प्रतिपक्ष से मिलने खुद गए CM
वहीं, विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले एक अलग ही माहौल देखने को मिला। CM सुक्खू खुद नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के पास उनकी सीट पर जाकर मिले। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे का मुस्कुराकर स्वागत किया और काफी गर्मजोशी से बातचीत की। राजनीतिक मतभेदों के बावजूद इस तरह की मुलाकात ने सदन के माहौल को सकारात्मक बना दिया।
