कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में नाबालिग बच्चियों के खिलाफ अपराधों पर सख्त रुख अपनाते हुए धर्मशाला स्थित विशेष पॉक्सो अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। यहाँ अपनी ही नाबालिग भतीजी के साथ अश्लील हरकतें करने और उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के दोषी चाचा को अदालत ने तीन वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही आरोपी पर आर्थिक दंड भी लगाया गया है।

जेल के साथ 10 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया

मिली जानकारी के अनुसार, जिला कांगड़ा में धर्मशाला स्थित फास्ट ट्रैक स्पेशल पॉक्सो कोर्ट में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश विजय लक्ष्मी की अदालत ने मामले की सुनवाई पूरी करने के बाद यह निर्णय सुनाया।

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अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए आरोपी को दोषी करार दिया। अदालत ने आरोपी को जेल की सजा के साथ 10 हजार रुपये का जुर्माना भरने का भी आदेश दिया है। न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि दोषी निर्धारित समय में जुर्माना अदा नहीं करता है, तो उसे एक महीने की अतिरिक्त साधारण कैद भुगतनी होगी।

स्कूल छोड़ने के बहाने गाड़ी में बैठाया

मामला वर्ष 2023 का है। जांच के दौरान सामने आया कि देहरा क्षेत्र की रहने वाली एक नाबालिग छात्रा 20 नवंबर 2023 को रोजाना की तरह स्कूल जा रही थी। इसी दौरान उसके रिश्ते में चाचा लगने वाले व्यक्ति ने उसे रास्ते में रोककर अपनी दुकान पर बुलाया।

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आरोपी ने छात्रा को भरोसे में लेकर स्कूल छोड़ने की बात कही और उसे अपनी गाड़ी में बैठा लिया। लेकिन स्कूल ले जाने के बजाय वह उसे एक सुनसान स्थान पर ले गया।

सुनसान जगह पर की अश्लील हरकतें

अभियोजन पक्ष के अनुसार सुनसान स्थान पर पहुंचने के बाद आरोपी ने नाबालिग के साथ अश्लील हरकतें कीं। पीड़िता ने इसका विरोध किया तो आरोपी ने उसे डराने-धमकाने की कोशिश की। इतना ही नहीं, उसने घटना के बारे में किसी को जानकारी देने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी।

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घटना के बाद नाबालिग ने साहस दिखाते हुए घर पहुंचकर अपने परिजनों को पूरी घटना की जानकारी दी। परिवार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत पुलिस से संपर्क किया। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने पॉक्सो एक्ट सहित विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।

21 गवाहों के बयान बने अहम आधार

जांच के दौरान पुलिस ने आवश्यक साक्ष्य एकत्रित किए और आरोप पत्र अदालत में प्रस्तुत किया, जिसके बाद मामले की नियमित सुनवाई शुरू हुई। अदालत में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मामले को मजबूती से रखा।

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इस दौरान कुल 21 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। गवाहों की गवाही, पीड़िता के बयान और पुलिस द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप सिद्ध होते हैं।

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