बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में डॉक्टरों ने एक बार फिर अपनी दक्षता का परिचय देते हुए ऐसा कार्य किया है- जिसने क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर लोगों का भरोसा और मजबूत कर दिया है। इस उपलब्धि के बाद अस्पताल चर्चा में है और स्थानीय स्तर पर चिकित्सा सुविधाओं को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

डॉक्टरों ने किया कमाल

घुमारवीं के सिविल अस्पताल ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि बेहतर नेतृत्व, प्रशिक्षित टीम और आधुनिक तकनीक के दम पर ग्रामीण क्षेत्र में भी जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक की जा सकती है।

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पेट से निकाली 1KG रसोली

अस्पताल के खंड चिकित्सा अधिकारी एवं वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुपम शर्मा की अगुवाई में चिकित्सकों की टीम ने डायबिटीज से पीड़ित एक महिला के पेट से लगभग एक किलोग्राम वजनी रसौली को सुरक्षित बाहर निकालकर नई मिसाल कायम की है।

बहुत जटिल था ऑपरेशन

मरीज लंबे समय से पेट में दर्द और सूजन की शिकायत से जूझ रही थी। जांच के दौरान उसके पेट में बड़ी आकार की रसौली पाई गई। मामला सामान्य नहीं था, क्योंकि मरीज को मधुमेह (डायबिटीज) की पुरानी समस्या थी। चिकित्सकीय दृष्टि से डायबिटीज के मरीजों में संक्रमण का खतरा अधिक रहता है और ऑपरेशन के दौरान रक्तस्राव नियंत्रित रखना भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

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डायबिटिक पेशंट थी महिला

ऐसे में सर्जरी से पहले मरीज की शुगर को नियंत्रित करने के लिए विशेष तैयारी की गई। एनेस्थीसिया विशेषज्ञों और नर्सिंग स्टाफ ने भी हर चरण में सतर्कता बरती। पूरी मेडिकल टीम ने समन्वय के साथ काम किया, जिसके परिणामस्वरूप ऑपरेशन बिना किसी जटिलता के सफलतापूर्वक पूरा  हुआ।

 

ghumarwin women operation

कुछ घंटों में पूरी हुई सर्जरी

डॉ. अनुपम शर्मा ने बताया कि ऑपरेशन कई घंटों तक चला, लेकिन टीम की सावधानी और अनुभव के कारण किसी प्रकार की गंभीर जटिलता सामने नहीं आई। सर्जरी के बाद मरीज को निगरानी में रखा गया और उसकी हालत लगातार स्थिर बनी रही।

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पूरी तरह से सुरक्षित है महिला

अब वह पूरी तरह सुरक्षित है और डॉक्टरों के अनुसार जल्द ही सामान्य दिनचर्या में लौट सकेगी। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरी टीम की सामूहिक मेहनत और समर्पण का परिणाम है। उनका लक्ष्य है कि ग्रामीण क्षेत्र के मरीजों को भी बड़े शहरों जैसी सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएं।

अस्पताल के लिए मील का पत्थर

यह सफलता घुमारवीं अस्पताल के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। स्थानीय स्तर पर इतनी जटिल सर्जरी का सफल होना स्वास्थ्य सेवाओं में बढ़ते विश्वास का संकेत है। अस्पताल प्रशासन ने भी इस उपलब्धि पर संतोष जताते हुए बताया कि आने वाले सप्ताह से यहां हड्डी संबंधी ऑपरेशन भी शुरू किए जाएंगे।

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स्थानीय लोगों में खुशी

इस निर्णय से क्षेत्र के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी, क्योंकि अब उन्हें साधारण या मध्यम स्तर की सर्जरी के लिए चंडीगढ़, लुधियाना या अन्य बड़े शहरों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा।लोगों का कहना है कि अब घुमारवीं अस्पताल पर उनका भरोसा और मजबूत हुआ है।

अब नहीं जाना पड़ेगा दूर

पहले गंभीर मामलों में मरीजों को रेफर कर दिया जाता था, लेकिन अब यहीं बेहतर इलाज संभव हो रहा है। ग्रामीण इलाकों में उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता से न केवल समय और धन की बचत होगी, बल्कि आपात स्थितियों में जान बचाने की संभावना भी बढ़ेगी।

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स्वास्थ्य सेवाओं में बदलाव की दिशा

स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों का मानना है कि यदि इसी तरह विशेषज्ञ सेवाएं जिला और उपमंडल स्तर पर मजबूत की जाती रहीं, तो प्रदेश के दूरदराज इलाकों में चिकित्सा सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिलेगा।

 

घुमारवीं अस्पताल की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि सीमित संसाधनों के बावजूद यदि इच्छाशक्ति और पेशेवर प्रतिबद्धता हो, तो ग्रामीण क्षेत्र में भी जटिल ऑपरेशन पूरी सुरक्षा और दक्षता के साथ किए जा सकते हैं।

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