#राजनीति
February 11, 2026
सुक्खू सरकार का खजाना खाली : केंद्र ने भी पैसा किया बंद, अब मंत्रियों-विधायकों की जेब से होगी भरपाई
मंत्रियो-विधायकों की बढ़ी हुई सैलरी पर लग सकता है ब्रेक
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शिमला। हिमाचल प्रदेश को मिलने वाली RDG बंद होने के बाद से सियासत गरमाई हुई है। वहीं, राज्य की आर्थिक स्थिति को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। अब प्रदेश की सुक्खू सरकार खर्चों में बड़ी कटौती की तैयारी में दिखाई दे रही है।
सबसे अहम चर्चा यह है कि मुख्यमंत्री, मंत्रियों, विधायकों, विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के वेतन व भत्तों में कटौती की जा सकती है। गौरतलब है कि बीते वर्ष ही इन सभी माननीयों के वेतन और भत्तों में करीब 24 फीसदी की बढ़ोतरी की गई थी। उस समय विधानसभा में सर्वसम्मति से संशोधन विधेयक पारित हुआ था। लेकिन अब आर्थिक दबाव बढ़ने के बाद उसी बढ़ोतरी पर पुनर्विचार के संकेत मिल रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, सरकार इस बात पर भी विचार कर रही है कि जो वेतन वृद्धि लागू की गई है, उसे फिलहाल आर्थिक हालात सुधरने तक रोका जा सकता है। इस विषय पर जल्द निर्णय लिया जा सकता है।
इस पूरे मुद्दे को लेकर विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया का बयान सामने आया है, जिसने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। पठानिया ने कहा कि CM सुखविंदर सिंह सुक्खू ने साफ संकेत दिए हैं कि राज्य की वित्तीय स्थिति को देखते हुए कड़े से कड़े फैसले लेने से सरकार पीछे नहीं हटेगी। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जनहित की योजनाओं पर किसी प्रकार की रोक नहीं लगेगी।
RDG बंद होने को लेकर विपक्ष के पूर्व मुख्यमंत्रियों और नेताओं की आलोचना पर स्पीकर ने तीखा जवाब दिया। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर, प्रेम कुमार धूमल, शांता कुमार और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जो लोग आज फिजूलखर्ची और खर्चों में कटौती की नसीहत दे रहे हैं, उन्होंने अपने कार्यकाल में ऐसे कदम क्यों नहीं उठाए।
पठानिया ने कहा कि कर्ज लेना किसी एक सरकार की मजबूरी नहीं रही, बल्कि हर सरकार ने परिस्थितियों के अनुसार कर्ज लिया है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि RDG की मांग पूर्व की भाजपा सरकारों ने भी की थी और उसका उपयोग भी किया गया था।
विधानसभा अध्यक्ष ने आगामी बजट सत्र को लेकर भी संकेत दिए कि राज्य की वित्तीय स्थिति को ध्यान में रखते हुए इस बार का बजट अनुशासन और प्राथमिकताओं पर आधारित होगा। खर्चों की समीक्षा की जाएगी और गैर-जरूरी मदों में कटौती संभव है।
केंद्र द्वारा करीब 40 हजार करोड़ रुपये की RDG बंद किए जाने के बाद प्रदेश की सियासत गरमा गई है। सत्तापक्ष इसे राज्य के हितों से जुड़ा मुद्दा बता रहा है, जबकि विपक्ष सरकार की वित्तीय प्रबंधन क्षमता पर सवाल उठा रहा है।