#अपराध
February 11, 2026
हिमाचल : एक्शन मोड में वन विभाग, ज्वैलरी की दुकानों में पड़ी RAID- 6 दुकानदारों से मिले तेंदुए के...
वन विभाग ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक को अंजाम दिया है
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण को लेकर एक बड़ी और सख्त कार्रवाई सामने आई है। शिमला जिला के रोहड़ू में वन विभाग ने एक विशेष अभियान के तहत ऐसी छापेमारी की, जिसने बाजार में हलचल मचा दी और कई लोगों को चौंका दिया।
वन विभाग ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक को अंजाम दिया है वन विभाग द्वारा रोहड़ू बाजार की आभूषण दुकानों पर छापेमारी की गई। इस कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मचा हुआ है।
DFO रवि शंकर शर्मा के नेतृत्व में चलाए गए विशेष अभियान ‘ऑपरेशन क्लाइंग बैक’ के तहत मंगलवार को रोहड़ू बाजार की कई आभूषण दुकानों पर एक साथ छापेमारी की गई। इस दौरान टीम ने 85 तेंदुए के नाखून और 5 दांत बरामद किए।
वन विभाग को गुप्त सूचना मिली थी कि कुछ दुकानों में वन्यजीव अंगों का अवैध संग्रह और इस्तेमाल किया जा रहा है। सूचना के आधार पर टीम ने योजनाबद्ध तरीके से बाजार के विभिन्न हिस्सों में स्थित ज्वैलरी शॉप्स की जांच की। जांच के दौरान 6 ज्वैलरों के पास से तेंदुए के नाखून और दांत पाए गए, जिन्हें कथित तौर पर बिना वैध अनुमति के रखा गया था।

वन विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि तेंदुआ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत संरक्षित प्रजाति है। उसके किसी भी अंग को रखना, खरीदना, बेचना या प्रदर्शित करना दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। बरामद सभी सामग्री को जब्त कर लिया गया है और संबंधित दुकानदारों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
सूत्रों के अनुसार, कुछ ज्वैलर तेंदुए के नाखून और दांतों का इस्तेमाल ताबीज, लॉकेट और अन्य आभूषणों में सजावट के रूप में करते थे। इन उत्पादों की ऊंची कीमत वसूली जाती थी। माना जा रहा है कि अंधविश्वास और विशेष शक्तियों के भ्रम के चलते लोग ऐसे उत्पाद खरीदते हैं, जिससे वन्यजीवों के अवैध शिकार और तस्करी को बढ़ावा मिलता है।
DFO रवि शंकर शर्मा ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण को लेकर विभाग पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी तरह की लापरवाही या अवैध गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी और दोषियों को कानून के तहत कड़ी सजा दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
वन विभाग ने आम जनता से भी अपील की है कि वे वन्यजीव अंगों से बने उत्पादों को न खरीदें और न ही प्रोत्साहित करें। यदि कहीं भी वन्यजीव अंगों की अवैध खरीद-बिक्री की जानकारी मिले, तो तुरंत विभाग को सूचित करें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।