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February 11, 2026

हिमाचल में डॉक्टर के साथ हुआ बहुत गलत : तीन दिन अपने ही घर में बंधी बना रहा बेचारा- जानें पूरा मामला

शातिरों के जाल में फंसा डॉक्टर, हुआ बर्बाद

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कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में साइबर ठगों का जाल लगातार गहराता जा रहा है। ताजा मामला एक प्रतिष्ठित डॉक्टर से जुड़ा है, जिसे साइबर अपराधियों ने डिजिटल अरेस्ट कर करीब 36 लाख रुपये की ठगी का शिकार बना लिया।

डॉक्टर हुआ डिजिटल अरेस्ट

ठगों ने डॉक्टर को गंभीर आपराधिक मामले में फंसाने का डर दिखाया और करीब तीन दिन तक मानसिक दबाव में रखकर मोटी रकम ऐंठ ली। पीड़ित डॉक्टर ने इस संबंध में साइबर क्राइम पुलिस थाना धर्मशाला में शिकायत दर्ज करवाई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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कैसे फंसा डॉक्टर?

जानकारी के अनुसार, नवंबर 2025 में डॉक्टर के पास एक कॉल आई, जिसमें कॉल करने वालों ने खुद को जांच एजेंसी से जुड़ा बताया। ठगों ने डॉक्टर को बताया कि वह एक गंभीर आपराधिक मामले में आरोपी हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई की तैयारी चल रही है।

डॉक्टर ने चुकाई बड़ी रकम

डर का माहौल बनाते हुए डॉक्टर को डिजिटल अरेस्ट जैसी स्थिति में रखा गया, जिसमें उन्हें किसी से संपर्क न करने और लगातार कॉल पर बने रहने का दबाव बनाया गया। इस दौरान ठगों ने कहा कि यदि वह अपना नाम मामले से हटवाना चाहते हैं, तो इसके लिए उन्हें बड़ी रकम चुकानी होगी।

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मानसिक दबाव और बदनामी के डर में आकर डॉक्टर ने दो अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए कुल 36 लाख रुपये ठगों के बताए खातों में ट्रांसफर कर दिए। इस मामले के उजागर होने के बाद इलाके में हड़कंप मचा हुआ है।

कब हुआ ठगी का अहसास?

कुछ समय बाद डॉक्टर को ठगी का एहसास हुआ, जिसके बाद उन्होंने जनवरी 2026 में साइबर क्राइम पुलिस थाना धर्मशाला में शिकायत दी। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर डिजिटल सबूतों और बैंक ट्रांजेक्शन के आधार पर जांच शुरू कर दी है।

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2.21 करोड़ की साइबर ठगी

कांगड़ा जिले में साइबर अपराध का ग्राफ तेजी से बढ़ता नजर आ रहा है। जनवरी और फरवरी माह के दौरान साइबर क्राइम पुलिस थाना धर्मशाला में कुल चार बड़े मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें 2.21 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी सामने आई है।

इन्वेस्टमेंट से जुड़े फ्रॉड

इनमें से तीन मामले फर्जी निवेश (इन्वेस्टमेंट) फ्रॉड से जुड़े हैं।

  • पहले मामले में एक व्यक्ति से 50.74 लाख रुपये
  • दूसरे में 40 लाख रुपये
  • जबकि तीसरे मामले में 94,80,924 रुपये की ठगी की गई।

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सोशल मीडिया से शुरू हुआ खेल

इन मामलों में ठगों ने सोशल मीडिया के जरिए पीड़ितों से संपर्क किया और उन्हें व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा। ग्रुप में शेयर बाजार या क्रिप्टो निवेश के नाम पर फर्जी टिप्स दी जाती रहीं। इसके बाद एक नकली निवेश एप के माध्यम से दोगुने मुनाफे का लालच देकर लोगों से मोटी रकम निवेश करवाई गई।

 

एप पर शुरुआती दौर में रकम बढ़ती हुई दिखाई जाती रही, जिससे पीड़ितों का भरोसा मजबूत होता गया। लेकिन जब उन्होंने पैसे निकालने की कोशिश की, तो टैक्स, प्रोसेसिंग फीस या अकाउंट वेरिफिकेशन के नाम पर और पैसे जमा करवाने की मांग की गई। कई पीड़ितों ने मुनाफे की उम्मीद में रिश्तेदारों से उधार लेकर भी रकम ट्रांसफर कर दी।

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पुलिस की अपील

साइबर क्राइम के पुलिस उप महानिरीक्षक रोहित मालपानी ने बताया कि जनवरी और फरवरी में डिजिटल अरेस्ट और फर्जी निवेश के नाम पर ठगी के चार मामले दर्ज किए गए हैं। सभी मामलों में प्राथमिकी दर्ज कर जांच की जा रही है और लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई है।

बिना OTP खाते से उड़े पैसे

वहीं मंडी जिले के सुंदरनगर से ऑनलाइन ठगी का एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां भोजपुर बाजार में चाय की दुकान चलाने वाले छोटे कारोबारी हनुमंत पवार के बैंक खाते से 1.35 लाख रुपये रहस्यमयी तरीके से गायब हो गए।

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पीड़ित का कहना है कि उसने न तो किसी को ओटीपी बताया और न ही किसी संदिग्ध लिंक पर क्लिक किया, इसके बावजूद उसके खाते से पूरी जमा राशि निकल गई। जब उन्होंने बैंक खाते की जांच की, तो उसमें मात्र 18 रुपये शेष थे।

सदमे में कारोबारी

मेहनत की कमाई यूं अचानक गायब होने से कारोबारी सदमे में है। शिकायत मिलने पर सुंदरनगर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर ली है। DSP भारत भूषण ने बताया कि मामला साइबर अपराध से जुड़ा प्रतीत हो रहा है और बैंकिंग व तकनीकी पहलुओं की गहनता से जांच कर रही है।

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साइबर अपराध बढ़ती चिंता

लगातार सामने आ रहे ये मामले साफ संकेत दे रहे हैं कि साइबर ठग अब पढ़े-लिखे, पेशेवर और छोटे कारोबारियों सभी को निशाना बना रहे हैं। पुलिस बार-बार चेतावनी दे रही है कि किसी भी अनजान कॉल, निवेश ऑफर या डराने वाली सूचना पर तुरंत भरोसा न करें और संदिग्ध स्थिति में तुरंत पुलिस या साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करें।

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