#उपलब्धि

January 20, 2026

हिमाचल के डॉक्टर का लिम्का बुक में दर्ज होगा नाम, लगातार 3 घंटे सर्जरी कर बचाई महिला की जान

डॉक्टर भानु के पास 10 हजार से ज्यादा लेप्रोस्कोपिक सर्जरी का है अनुभव

शेयर करें:

Mandav Hospital Doctor Uday Bhanu women laparoscopic fibroid surgery successful Limca Book of Records

मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला से चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि सामने आई है। मंडी शहर के निजी मांडव अस्पताल में तैनात वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. उदय भानू ने लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के जरिए 5.21 किलोग्राम वजनी विशाल फाइब्रॉएड को सफलतापूर्वक निकालकर चिकित्सा जगत में नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

हिमाचल के डॉक्टर ने किया कमाल

यह सर्जरी न केवल तकनीकी रूप से अत्यंत जटिल थी, बल्कि इसे लेप्रोस्कोप जैसी न्यूनतम इनवेसिव तकनीक से अंजाम देना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। दरअसल, करीब 40 वर्षीय महिला पेट में असामान्य सूजन की शिकायत लेकर मांडव अस्पताल पहुंची थी।

यह भी पढ़ें : हिमाचल में नागा साधु का अपमान! उप-प्रधान ने जबरन काटी जटाएं और दाढ़ी, तीन पर FIR

गर्भाशय के अंदर थी गंभीर बीमारी

पहली नजर में महिला का पेट इस कदर फूला हुआ था कि वह गर्भवती प्रतीत हो रही थी। प्रारंभिक जांच के बाद डॉक्टरों को गर्भावस्था का संदेह नहीं हुआ, लेकिन जब अल्ट्रासाउंड और अन्य जांचें की गईं, तो पता चला कि महिला के गर्भाशय में एक अत्यंत विशाल फाइब्रॉएड मौजूद है, जो उसके स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुका था।

लेप्रोस्कोपिक सर्जरी करने का फैसला

इतने बड़े आकार के फाइब्रॉएड को देखते हुए डॉक्टरों ने पहले से ही ओपन सर्जरी की पूरी तैयारी कर ली थी। आमतौर पर लेप्रोस्कोपिक सर्जरी छोटे और सीमित आकार के ट्यूमर या फाइब्रॉएड के लिए ही उपयुक्त मानी जाती है। बावजूद इसके, अपने लंबे अनुभव और आत्मविश्वास के चलते डॉ. उदय भानू और उनकी विशेषज्ञ टीम ने लेप्रोस्कोपिक विधि से ही सर्जरी करने का फैसला किया।

यह भी पढ़ें : हिमाचल के बार्डर सील : J&K से तीन आतं.की हुए फरार, मची खलबली- चप्पा-चप्पा छान रहे जवान

महिला के पेट से निकाला 5 KG...

कई घंटों तक चली इस जटिल सर्जरी के दौरान छोटे-छोटे छेदों के माध्यम से फाइब्रॉएड को सावधानीपूर्वक काटा गया और सुरक्षित तरीके से बाहर निकाला गया। अंततः 5.21 किलोग्राम वजनी फाइब्रॉएड को बिना किसी बड़ी जटिलता के निकाल लिया गया। सर्जरी के बाद महिला की हालत तेजी से सुधरी और अब वह पूरी तरह स्वस्थ बताई जा रही है।

लीवर तक फैल चुका था फाइब्रॉएड

डॉ. उदय भानू ने बताया कि यह फाइब्रॉएड केवल गर्भाशय तक सीमित नहीं था, बल्कि महिला के पेट के अंदर लीवर तक फैल चुका था। इससे सर्जरी और भी अधिक चुनौतीपूर्ण हो गई थी।

यह भी पढ़ें : हिमाचल में बारिश-बर्फबारी के लिए हो जाएं तैयार : दो दिन बाद जमकर बरसेंगे बादल, अलर्ट जारी 

आसान नहीं थी सर्जरी

उन्होंने बताया कि इससे पहले वे लेप्रोस्कोप के जरिए साढ़े तीन किलो तक के फाइब्रॉएड निकाल चुके हैं, लेकिन इतने बड़े फाइब्रॉएड के लिए जगह की कमी सबसे बड़ी समस्या होती है। छोटे छिद्रों के जरिए अंदर देखना, काटना और सुरक्षित रूप से बाहर निकालना बेहद सूक्ष्म संतुलन और अनुभव की मांग करता है।

10 हजार से ज्यादा लेप्रोस्कोपिक सर्जरी का अनुभव

डॉ. भानू ने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह सर्जरी किसी रिकॉर्ड या प्रचार के उद्देश्य से नहीं की। यह उनके पेशे के प्रति समर्पण और जुनून का परिणाम है। अब तक वे 10 हजार से अधिक लेप्रोस्कोपिक सर्जरी कर चुके हैं, जिसके चलते इस असाधारण चुनौती को स्वीकार करने का साहस जुटा पाए।

यह भी पढ़ें : हिमाचल में पंचायत चुनावों की तैयारी शुरू : HC के आदेशों पर रखी गई अहम मीटिंग- आज होगा फैसला

दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा फाइब्रॉएड

जब उन्होंने चिकित्सा साहित्य और उपलब्ध आंकड़ों का अध्ययन किया, तो पता चला कि लेप्रोस्कोपिक विधि से निकाला गया यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा फाइब्रॉएड है। वर्तमान में इटली के डॉक्टरों के नाम 5.30 किलोग्राम फाइब्रॉएड निकालने का विश्व रिकॉर्ड दर्ज है। इससे पहले भारत में चेन्नई के एक डॉक्टर ने 4.5 किलोग्राम का फाइब्रॉएड निकालकर दूसरा स्थान हासिल किया था, लेकिन अब यह स्थान मंडी के डॉ. उदय भानू के नाम हो गया है।

लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम होगा दर्ज

डॉ. उदय भानू ने बताया कि इस ऐतिहासिक उपलब्धि को लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यदि यह दर्ज होती है, तो यह न केवल उनके लिए, बल्कि हिमाचल प्रदेश के चिकित्सा क्षेत्र के लिए भी गर्व का विषय होगा।

यह भी पढ़ें : कैबिनेट फैसला : युवाओं को नहीं, रिटायर्ड बुजुर्गों को नौकरी देगी सुक्खू सरकार- 70 हजार मिलेगी सैलरी

मंडी को मिली वैश्विक पहचान

इस सर्जरी ने यह साबित कर दिया है कि छोटे शहरों और पहाड़ी राज्यों में भी विश्वस्तरीय चिकित्सा सेवाएं संभव हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की उपलब्धियां न्यूनतम इनवेसिव सर्जरी को बढ़ावा देंगी, जिससे मरीजों को कम दर्द, कम रक्तस्राव और तेजी से स्वस्थ होने का लाभ मिलेगा।

सरकारी अस्पताल में भी दे चुके सेवाएं

गौरतलब है कि डॉ. उदय भानू मूल रूप से मंडी जिले के सरकाघाट क्षेत्र के रोपड़ी गांव के रहने वाले हैं। वे पहले सरकारी अस्पताल में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं, लेकिन बाद में उन्होंने निजी क्षेत्र में आकर आधुनिक चिकित्सा तकनीकों को अपनाया। आज उनकी यह सफलता मंडी जिला ही नहीं, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश को चिकित्सा जगत के विश्व मानचित्र पर नई पहचान दिला रही है।

नोट : ऐसी ही तेज़, सटीक और ज़मीनी खबरों से जुड़े रहने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर हमारे फेसबुक पेज को फॉलो करें

ट्रेंडिंग न्यूज़
LAUGH CLUB
संबंधित आलेख