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January 19, 2026
कैबिनेट फैसला : युवाओं को नहीं, रिटायर्ड बुजुर्गों को नौकरी देगी सुक्खू सरकार- 70 हजार मिलेगी सैलरी
यह फैसला युवाओं के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा
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शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में हुई आज सुक्खू कैबिनेट की बैठक के बाद लिया गया फैसला प्रदेश के युवाओं के लिए एक बार फिर निराशा का कारण बन गया है। सरकार ने बेरोजगार युवाओं को अवसर देने की बजाय सेवानिवृत्त राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों को दोबारा नौकरी पर रखने का निर्णय लिया है। कैबिनेट ने डिमार्केशन, तक्सीम और इंतकाल जैसे लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए रिटायर्ड स्टाफ को री-एंगेज करने की मंजूरी दी है, जिसके तहत उन्हें मोटा मानदेय दिया जाएगा।
कैबिनेट फैसले के अनुसार, री-एंगेज तहसीलदार को 70 हजार, नायब तहसीलदार को 60 हजार, कानूनगो को 50 हजार और पटवारी को 40 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलेगा। इसके अलावा सात तहसीलदार पदों को भरने की स्वीकृति भी दी गई है।
सरकार का तर्क है कि अनुभव के आधार पर लंबित मामलों का जल्द समाधान किया जा सकेगा, लेकिन इस फैसले ने उन हजारों पढ़े-लिखे युवाओं की पीड़ा को और गहरा कर दिया है, जो वर्षों से भर्ती का इंतजार कर रहे हैं।
प्रदेश का युवा पहले ही सीमित नौकरियों, परीक्षाओं में देरी और भर्ती प्रक्रियाओं के ठप होने से जूझ रहा है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में उम्र निकाल चुके युवाओं के सामने आजीविका का संकट खड़ा है।
कई युवा कर्ज लेकर पढ़ाई कर चुके हैं, लेकिन रोजगार न मिलने से मानसिक तनाव, पारिवारिक दबाव और असुरक्षा का भाव बढ़ता जा रहा है। ऐसे में जब सरकार यह कहती है कि युवाओं को मौका देने के बजाय सेवानिवृत्त कर्मचारियों को फिर से नौकरी दी जाएगी, तो यह युवाओं के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है।
युवाओं का कहना है कि यदि सरकार ने समय पर भर्तियां निकाली होतीं और प्रक्रियाएं पूरी की होतीं, तो आज लंबित राजस्व मामलों के लिए रिटायर्ड कर्मचारियों की जरूरत ही नहीं पड़ती।
अनुभवी लोगों की सेवाएं सलाहकार या अल्पकालिक प्रशिक्षण के रूप में ली जा सकती थीं, लेकिन नियमित री-एंगेजमेंट से साफ संदेश जाता है कि सरकार का भरोसा युवाओं से ज्यादा बुजुर्ग सेवानिवृत्त कर्मचारियों पर है।
बहरहाल, इस फैसले से यह बहस फिर तेज हो गई है कि क्या हिमाचल में रोजगार नीति वास्तव में युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखकर बनाई जा रही है या फिर तात्कालिक प्रशासनिक सुविधा को प्राथमिकता दी जा रही है। जब तक युवाओं को स्थायी और सम्मानजनक रोजगार नहीं मिलेगा, तब तक ऐसे फैसले सरकार और युवा वर्ग के बीच दूरी को और बढ़ाते रहेंगे।