#उपलब्धि
January 25, 2026
हिमाचल के छोटे से गांव की बेटी AIIMS दिल्ली में बनी डॉक्टर, दो बार सम्मानित कर चुके हैं CM
कविता का सपना समाज और जरूरतमंद लोगों की सेवा करना रहा है
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शिमला। हिमाचल प्रदेश के जिला चंबा की दुर्गम और जनजातीय क्षेत्र पांगी घाटी की बेटी ने हिमाचल का नाम रोशन कर दिया है। डॉ. कविता शर्मा ने देश के सबसे प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान AIIMS दिल्ली तक का सफर तय करने वाली एक नई इतिहास रेखा खींच दी है।
पांगी घाटी, जहां आज भी सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं चुनौतियों से जूझती हैं, वहां से निकलकर एम्स दिल्ली तक पहुंचना किसी सपने से कम नहीं था। लेकिन डॉ. कविता शर्मा ने इस सपने को अपनी मेहनत, लगन और मजबूत इच्छाशक्ति से हकीकत में बदल दिया।
उनके जीवन की कहानी यह साबित करती है कि हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, अगर इरादे मजबूत हों तो मंजिल जरूर मिलती है। डॉ. कविता शर्मा ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पांगी घाटी में कठिन परिस्थितियों के बीच पूरी की।
कई बार खराब मौसम, लंबी दूरी और संसाधनों की कमी उनकी पढ़ाई में बाधा बनी, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। बचपन से ही पढ़ाई में अव्वल रहने वाली कविता ने दसवीं कक्षा में 96 प्रतिशत और बारहवीं कक्षा में 94 प्रतिशत अंक हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। खास बात यह रही कि उन्होंने मेडिकल और नॉन-मेडिकल दोनों विषयों में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
दो बार उनकी इस उपलब्धि के लिए उन्हें दो बार हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा लैपटॉप और छात्रवृत्ति देकर सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके लिए न केवल प्रोत्साहन बना, बल्कि आगे और बेहतर करने की प्रेरणा भी बना।
इसके बाद डॉ. कविता शर्मा ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज, टांडा से MBBS की पढ़ाई पूरी की। मेडिकल की कठिन पढ़ाई के दौरान भी उन्होंने अनुशासन और मेहनत को अपना मूल मंत्र बनाए रखा। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पंडित जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, चंबा में भी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने स्थानीय लोगों को चिकित्सा सुविधाएं प्रदान कीं और जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की चुनौतियों को नजदीक से समझा।
वर्तमान में डॉ. कविता शर्मा देश के सर्वोच्च चिकित्सा संस्थानAIIMS दिल्ली में डॉक्टर के रूप में सेवाएं दे रही हैं। AIIMS जैसे संस्थान तक पहुंचना अपने आप में बड़ी उपलब्धि मानी जाती है, लेकिन पांगी घाटी जैसी दुर्गम जगह से निकलकर वहां तक पहुंचना उनकी सफलता को और भी विशेष बना देता है।
डॉ. कविता शर्मा का कहना है कि उनका सपना शुरू से ही समाज और जरूरतमंद लोगों की सेवा करना रहा है। वे मानती हैं कि डॉक्टर बनना केवल एक पेशा नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और सेवा का माध्यम है। अपनी सफलता का श्रेय वे अपने माता-पिता, परिवार और गुरुओं को देती हैं, जिन्होंने हर कठिन दौर में उनका हौसला बढ़ाया।
डॉ. कविता का यह भी कहना है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत पूरी ईमानदारी से की जाए, तो परिस्थितियां चाहे कितनी भी विपरीत क्यों न हों, सफलता जरूर मिलती है। उनका जीवन संघर्ष कर रहे युवाओं, खासकर पहाड़ी और दूरदराज के क्षेत्रों की बेटियों के लिए एक मजबूत संदेश देता है कि सपने सीमाओं के मोहताज नहीं होते।