#उपलब्धि
April 2, 2025
हिमाचल के जनजातीय जिला की बेटी बन गई अधिकारी, पिता करते हैं किसानी
अंबिका पांगटा ने पास की बैंकिग क्षेत्र की सबसे कठिन परीक्षा
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किन्नौर। हिमाचल की बेटियां विकट परिस्थितियों में भी हिम्मत नहीं हारती हैं और अपने सपनों को सच करने के लिए जी तोड़ मेहनत करती हैं। जिसके चलते ही यह बेटियां आज हर क्षेत्र में बड़े बड़े मुकाम हासिल कर रही हैं। ऐसी ही एक बेटी हिमाचल के जनजातीय जिला किन्नौर की अंबिका पांगटा है। किसान परिवार से संबंध रखने वाली इस बेटी का बैंकिंग क्षेत्र में अधिकारी के पद पर चयन हुआ है।
किन्नौर के शुदारंग गांव की अंबिका पांगटा ने कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प के बल पर प्रतिष्ठित आईबीपीएस पीओ परीक्षा में सफलता हासिल कर सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में प्रोबेशनरी ऑफिसर का पद हासिल कर लिया है। बेटी की इस उपलब्धि से उसके माता पिता और पूरे गांव में खुशी की लहर है। परिवार को लगातार बधाई संदेश मिल रहे हैं।
बता दें कि अंबिका पांगटा की यह उपलब्धि इसलिए भी काफी अहम है, क्योंकि वह ऐसे जनजातीय जिला से संबंध रखती है, जहां साल में छह माह बर्फ रहती है और यहां मूलभूत सुविधाएं भी ना के बराबर होती हैं। अंबिका के पिता राजकिशोर पांगटा एक साधारण किसान हैंए जबकि माता गृहिणी हैं। अंबिका ने सीमित संसाधनों के बावजूद कभी हार नहीं मानी और अपने लक्ष्य की ओर निरंतर बढ़ती रहीं।
आईबीपीएस पीओ परीक्षा बैंकिंग क्षेत्र की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक मानी जाती है। इसमें हर साल लाखों उम्मीदवार भाग लेते हैं, लेकिन केवल कुछ ही उम्मीदवार इसमें सफलता प्राप्त कर पाते हैं। अंबिका ने इस परीक्षा के तीनों चरणों जिसमें प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार को अपनी काबिलियत के दम पर पार कर लिया और एक बड़ी अधिकारी बन गई।
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पिता राजकिशोर पांगटा ने कहा कि अंबिका बचपन से ही मेधावी छात्रा रही है। वह पढ़ने में काफी होशियार थी। बेटी ने आज अपने ही नहीं बल्कि पूरे परिवार के सपने को साकार कर दिया है। माता-पिता ने बताया कि उन्हें बेटी की सफलता पर गर्व है। अंबिका की इस उपलब्धि की पूरे शुदारंग गांव में चर्चा हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि अंबिका की इस उपलब्धि से क्षेत्र के युवाओं को भी नई प्रेरणा मिली है।
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वहीं अंबिका ने अपनी इस सफलता पर कहा कि कड़ी मेहनत, समर्पण और आत्मविश्वास के साथ कोई भी मंजिल हासिल की जा सकती है। उन्होंने बताया कि अनुशासित पढ़ाई, नियमित अभ्यास और सकारात्मक सोच ने उसे इस मुकाम तक पहुंचने में मदद की है। अंबिका का मानना है कि अगर सही दिशा में प्रयास किए जाएं, तो कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है। अंबिका ने इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता.पिताए शिक्षकों और अपनी मेहनत को दिया है।