#हादसा
August 15, 2025
हिमाचल: मां ने अंतिम सांस तक नहीं छोड़ी बेटी, पीठ से सटी मिली देह; एक आंगन से उठेंगी दो अर्थियां
नाले में बहने से पहले मां ने पीठ पर कसकर पकड़ी थी बेटी
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शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया है। यहां बीती शाम को नाले में बही मां बेटी का शव घटनास्थल से आधी किलोमीटर दूर मिला। लेकिन मां बेटी के शव को देख कर वहां मौजूद हर शख्स का दिल पसीज गया। छह साल की बेटी का शव मां की पीठ से सटा हुआ था। मां ने अपनी अंतिम सांस तक बेटी को नहीं छोड़ा। इस हृदय विदारक घटना ने समूचे इलाके को गहरे शोक में डुबो दिया है।
बता दें कि बीते रोज शिमला ज़िले के ढली थाना क्षेत्र के अंतर्गत दरभोग पंचायत के पराड़ी गांव में बीती शाम एक ऐसा हृदयविदारक हादसा हुआ, जिसने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया। गांव के एक गरीब किसान किशन की पत्नी लीलावती और उसकी 11 वर्षीय बेटी शीतल की खेत से लौटते समय नाले में बहने से दर्दनाक मौत हो गई। मां-बेटी की चिता अब एक साथ जलेगी।
बताया जा रहा है कि लीलावती अपनी बेटी शीतल के साथ खेतों में लगी गोभी की फसल की रखवाली के लिए रोज की तरह खेत गई थीं। खेत गांव से थोड़ी दूरी पर है, और वहां जाने के लिए एक नाले को पार करना पड़ता है। शाम को लौटते वक्त, अचानक मौसम ने करवट ली और पहाड़ों से आया तेज़ बाढ़ का पानी नाले में आ गया। दोनों मां.बेटी नाले को पार कर ही रही थीं कि पानी के बहाव ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया।
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गांव वालों का कहना है कि लीलावती ने अपनी बेटी को अपनी पीठ से कसकर पकड़ रखा था। ऐसा लग रहा था जैसे आख़िरी सांस तक मां अपनी बच्ची को बचाने की कोशिश कर रही थी। लेकिन बर्फीले पानी और तेज़ बहाव के सामने मां का ममत्व भी हार गया। दोनों के शव घटनास्थल से आधा किलोमीटर दूर जाकर मिले। बेटी की छोटी.सी काया अब भी मां की पीठ से चिपकी हुई थी। यह दृश्य देखकर हर आंख भर आई।
घटना की पुष्टि करते हुए पंचायत वार्ड सदस्य कृष्णानंद शर्मा ने बताया कि जब लीलावती और शीतल शाम तक घर नहीं लौटे, तो गांव वालों ने उनकी तलाश शुरू की। काफी देर की खोजबीन के बाद जब दोनों के शव एक साथ मिलेए तो पूरा गांव स्तब्ध रह गया। लोग बताते हैं कि यह दृश्य किसी की भी रूह को कंपा देने वाला था दृ एक मांए जो मरते दम तक अपनी बेटी को नहीं छोड़ सकी।
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परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से ही बहुत खराब है। किशन खुद अस्वस्थ रहता है और खेती.बाड़ी ही एकमात्र आजीविका का साधन है। जंगली जानवरों से फसल को बचाने के लिए रोजाना खेतों में जाना पड़ता था। उसी ज़रूरत के चलते मां.बेटी खेत गई थींए लेकिन नियति को कुछ और ही मंज़ूर था।
घटना के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शवों को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया। स्थानीय पंचायत प्रधान ने प्रशासन से पीड़ित परिवार को मुआवजा देने और हर संभव सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। इस त्रासदी के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है। हर गली और हर घर से एक ही स्वर सुनाई दे रहा है दृ ईश्वर किशन और उसके परिवार को इस असहनीय पीड़ा को सहने की शक्ति दे।
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आज जब मां.बेटी की चिता एक साथ जलेगी, तो हर आंख नम होगी, और हर मन में एक ही सवाल गूंजेगा क्या किसी मां का ममत्व कभी हार सकता है। लीलावती ने आख़िरी सांस तक अपनी बेटी को नहीं छोड़ा, और जाते.जाते भी यही संदेश दे गई मां का प्यार अमर होता है।