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July 30, 2025
हिमाचल की संस्कृति को जिंदा रखे हुए हैं ये लोक नृत्य, जानिए क्या होती है 'नाटी'
पारंपरिक पोशाकों में होता है डांस
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शिमला। हिमाचल प्रदेश के हर क्षेत्र के लोग अपनी लोक संस्कृति से जुड़े होते हैं। इसमें लोकगीत तो शामिल होते ही हैं, लोक नृत्य भी इसमें चारचांद लगा देते हैं। अलग-अलग इलाके में अलग-अलग नृत्य होते हैं। आज हम जानेंगे उन 5 लोक नृत्यों के बारे में हिमाचल की पहचान हैं।
कांगड़ा में होने वाले मेलों में झमाकड़ा मुख्य रूप से प्रस्तुत किया जाता है। लोग पारंपरिक पोशाक पहनकर ग्रुप में नाचते हैं। झमाकड़ा का म्यूजिक भी खास होता है जो इसे जीवंत बनाता है।
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लाहौल-स्पीति के लोक नृत्य का नाम राक्षस है। इस में कलाकार राक्षस की एक्टिंग करते हैं जो बुराई का प्रतीक हैं। इस नृत्य में कलाकार रंग-बिरंगे कपड़े पहनकर राक्षसों की कहानियां दिखाते हैं। इस नृत्य के लिए भी खास संगीत होता है।
मंडी जिला अपने डांगी नृत्य के लिए जाना जाता है। इसमें लोग लकड़ी की छड़ियों का इस्तेमाल कर नाचते हैं। इस नृत्य में पुरूष-महिलाएं दोनों हिस्सेदारी रखते हैं। ये नृत्य लकड़ी की छड़ियों को एक दूसरे से टकराते हुए प्रस्तुत किया जाता है।
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किन्नौर जिले में छानक छाम के जरिए धार्मिक कहानियों को प्रस्तुत किया जाता है। इसमें कलाकार शिवजी, हनुमानजी, दुर्गा मां आदि देवी-देवताओं की कहानियों को अभिनय के जरिए दर्शाते हैं। इसमें रंग-बिरंगे कपड़ों और मुखौटों का इस्तेमाल किया जाता है।
हिमाचल के कई हिस्सों में नाटी लोक नृत्य के रूप में अपनाई गई है। कुल्लू, शिमला जैसे जिलों में इसे बहुत ही सुंदर तरीके से प्रस्तुत किया जाता है। विभिन्न कार्यक्रमों में लोग एकजुट होकर विभिन्न नाटियों पर नृत्य करते हैं।
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हिमाचल को करीब से जानना हो तो यहां के लोक गीतों और लोक नृत्यों को करीब से देखिए, ध्यान से सुनिए, आपको भी हिमाचल से ऐसा जुड़ाव हो जाएगा जो आपने कभी नहीं सोचा होगा।