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April 10, 2025
घाटे में चल रहे निगम-बोर्ड को मर्ज कर सकती है सुक्खू सरकार, जानें इकोनमी पर असर
वित्त सचिव की अध्यक्षता वाले रिसोर्स मोबिलाइजेशन कमेटी ने जुटाए सुझाव
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शिमला। भारी कर्ज में डूबी हिमाचल प्रदेश की इकोनमी को सुधारने के लिए वित्त सचिव अभिषेक जैन की अध्यक्षता में रिसोर्स मोबिलाइजेशन कमेटी ने सरकार को हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स से अपनी हिस्सेदारी निकालने जैसे सुझाव दिए हैं। बैठक में वित्त, योजना और अन्य विभागों के अफसरों ने हिस्सा लिया और अपनी तरफ से भी सुझाव दिए हैं।
विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक, सीएम सुक्खू के गुजरात से शिमला लौटने से पहले कमेटी उनके सामने फिजूलखर्ची रोकने और इकोनमी को मजबूत करने की दिशा में कई सुझाव दे सकती है। इनमें घाटे में चल रहे निगम-मंडलों को मर्ज करने और किराए पर चल रहे सरकारी दफ्तरों को सरकारी इमारतों में शिफ्ट करने जैसे सुझाव अहम हैं, ताकि विभागों का खर्च घटे। इससे पहले कमेटी ने राज्य में आईएएस की संख्या में कटौती, केंद्र से नए आईएएस नियुक्त न किए जाने का आग्रह करने और सरकारी वाहनों की संख्या 10% घटाने जैसे सुझाव दिए थे।
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सूत्रों का यह भी कहना है कि हिमाचल सरकार की राज्य में जिन हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट्स में हिस्सेदारी है, उसे भी निकालने का सुझाव रिसोर्स मोबिलाइजेशन कमेटी के सामने आया है। अभी यह तय नहीं है कि सरकार अपनी पूरी हिस्सेदारी निकालेगी या आंशिक रूप से इक्विटी विड्रॉ की जाएगी। इस पर अंतिम फैसला हिमाचल कैबिनेट का होगा। हालांकि, सूत्रों ने बताया कि सरकार के लिए यह सबसे बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि इससे तात्कालिक रूप से राहत तो मिल सकती है, लेकिन प्रदेश की माली हालत को देखते हुए यह उपाय लंबे समय तक कारगर नहीं होगा।
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रिसोर्स मोबिलाइजेशन कमेटी ने केंद्र से मिलने वाले राजस्व घाटा अनुदान की रकम लगातार कम होने को देखते हुए आय के मामले में आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाने के सुझाव दिए हैं। इसके लिए बजट में तय उपकरों- जैसे पानी और गाय उपकर की वसूली के लिए जल्द अधिसूचना जारी करने पर जोर देने का सुझाव आया है। इससे सरकार को निश्चित आय मिलनी शुरू हो सकेगी। इसके अलावा, बैंकों में हिमाचल सरकार की अतिशेष पड़ी राशि को भी अन्य योजनाओं में फंडिंग के लिए उपयोग करने के सुझाव मिले है।
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17 मार्च को पेश हिमाचल सरकार के 2025-26 के बजट में राजस्व प्राप्तियां 42,343 करोड़ रुपये और राजस्व व्यय 48,733 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। इससे राजस्व घाटा 6,390 करोड़ रुपये होगा। वहीं, राजकोषीय घाटा 10,338 करोड़ रुपये यानी GSDP का 4.04% अनुमानित है। लेकिन केंद्र सरकार से मिलने वाले राजस्व घाटा अनुदान की रकम में लगातार आ रही कमी से सारे समीकरण गड़बड़ा रहे हैं। यह अनुदान 2021-22 में 10,949 करोड़ रुपये से घटकर 2025-26 में 3,357 करोड़ रुपये होने वाला है।